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Author: Yogacharya Dhakaram

Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.

सोफे और कुर्सी पर बैठने का सही तरीका: कमर दर्द से बचाव

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का फिर से स्वागत है। आज हम बात करेंगे आप सोफे पर कैसे बैठे और अपने आप को इससे होने वाली तकलीफों से बचाए। गलत तरीके से बैठने से कमर दर्द, स्लिप डिस्क और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

सोफे पर बैठते समय:

  • ठोस सोफा चुनें: नरम सोफे से कमर पर दबाव बढ़ता है।
  • कंबल या बेडशीट का उपयोग करें: यह कमर को सीधा रखने में मदद करता है।
  • घुटने कूल्हे से नीचे रखें: पैर लटकाकर न बैठें।
  • सीधे बैठें: छाती फूली रहेगी और ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होगा।

कुर्सी पर बैठते समय:

  • कमर सीधी रखें: आगे झुककर न बैठें।
  • टेबल ऊंची रखें: झुककर काम करने से बचें।
  • पैर जमीन पर टिकाएं: घुटने कूल्हे से नीचे रखें।

पैर लटकाकर बैठने के नुकसान:

  • पैरों में सूजन
  • कमर दर्द
  • स्लिप डिस्क

आप भी आज से ही सही तरीके से बैठने की आदत डालें।

अतिरिक्त टिप्स:

  • अपने बैठने की आदतों पर ध्यान दें।
  • हर 30 मिनट में उठकर थोड़ा टहलें।
  • नियमित रूप से योग और व्यायाम करें।
  • अच्छी मुद्रा बनाए रखें।

तो प्यारे मित्रों इसी के साथ आपका बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत आभार,

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक योगापीस संस्थान
अन्य जानकारी के लिए क्लिक करें www.dhakaram.com

पेट की समस्याओं का जड़ या कारण: नाभि का खिसकना

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। आप सभी हमारा नमस्कार स्वीकार करें। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। आप सभी आनंद में होंगे। आज हम बात करने वाले हैं नाभि खिसकने के बारे में। नाभि खिसकना यानी धरण यह आप सभी जानते होंगे। हमारे पेट में 70 से 80 प्रतिशत बीमारियों का कारण हमारे पेट में नाभि का खिसकना हो सकता है। जैसे एसिडिटी, गैस्ट्रिक, कब्ज, अपच, उल्टी का मन, दस्त, मन खराब होना और भूख का ना लगना ऐसे अनेक प्रकार की बीमारियां हैं जो हमारे नाभि खिसकने से होती हैं। मेडिकल साइंस में धरण को नहीं मानते हैं लेकिन कुछ डॉक्टर आजकल इसे मानने लग गए हैं।

आज हम बात करेंगे धरण क्या है वह क्यों होती है? धरण को हम कैसे सही कर सकते हैं? नाभि हमारे शरीर का बहुत महत्वपूर्ण भाग है। जब बच्चा मां के पेट में होता है तो गर्भ में शिशु अपना आहार नाभि के माध्यम से ही ग्रहण करता है। नाभि को शक्ति का केंद्र भी माना जाता है इसलिए हमारे मुख से नाभि ज्यादा महत्वपूर्ण है। जब हम नाभि पर हाथ रखते हैं तो हमें हृदय की जैसी धडकनें महसूस होती हैं यही हमारी धरण होती है। हमारी नाभि अधिक वजन उठाने से, झटका लगने से खिसक जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं यह क्यों खिसकती है? जब हमारी पेट की मांसपेशियां कमजोर होती है तो हमारी नाभि खिसकती है। हमारी नाभि नीचे की ओर खिसक जाने से दस्त हो सकते हैं। अगर हमारी नाभि ऊपर की ओर खिसकती है तो हमें उल्टी, पेट में जलन या गैस हो सकते हैं। नाभि का खिसकना हमारे अंगों को प्रभावित करता है। नाभि जिस भी तरफ खिसकती है उसी तरफ के अंग से संबंधित समस्या उत्पन्न हो सकती है।

धरण क्या है?

धरण नाभि का अपनी जगह से खिसक जाना है। यह अधिक वजन उठाने, झटका लगने, या पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण हो सकता है।

धरण के लक्षण:

  • पेट में दर्द
  • एसिडिटी
  • गैस्ट्रिक
  • कब्ज
  • अपच
  • उल्टी
  • दस्त
  • मन खराब होना
  • भूख न लगना

धरण का निदान:

धरण का निदान करने के लिए कई तरीके हैं:

  • हाथों से: अपनी हथेलियों की रेखाओं को मिलाएं। यदि रेखाएं एक सीध में हैं, तो धरण नहीं है। यदि रेखाएं ऊपर-नीचे हैं, तो धरण हो सकती है।
  • रस्सी से: नाभि से निप्पल और पैर के अंगूठे तक की दूरी को नापें। यदि दूरी में अंतर है, तो धरण हो सकती है।
  • धड़कन से: अपनी उंगलियों को नाभि पर रखकर धड़कन को महसूस करें। यदि कहीं दर्द के साथ धड़कन महसूस हो, तो धरण उसी दिशा में हो सकती है।

धरण का उपचार:

धरण का उपचार करने के लिए कई तरीके हैं:

  • योग: नौकासन, उत्तानपादासन, और जठर परिवर्तनआसान पेट की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं और धरण को ठीक करने में मदद करते हैं।
  • नाभि बिठाना: योगाचार्य या धरण बिठाने वाले व्यक्ति से नाभि को सही करवाया जा सकता है।
  • घरेलू उपचार: सरसों के तेल, जैतून के तेल, या नीलगिरी के तेल से नाभि की मालिश करना धरण को ठीक करने में मदद कर सकता है।

धरण से बचाव:

  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • स्वस्थ भोजन खाएं।
  • अधिक वजन न उठाएं।
  • झटके से बचें।

ध्यान दें:

  • धरण का उपचार करने के बाद कुछ ना कुछ जरूर खाएं।
  • धरण का उपचार करते समय उठते समय अपने शरीर को सीधा रखें।

आप सभी का बहुत-बहुत आभार, आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

ग्रीवा शक्ति विकासक: गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने का सरल तरीका

नमस्कार प्यारे मित्रों! आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमन आज हम “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में ग्रीवा शक्ति विकासक के बारे में बात करेंगे।

ग्रीवा शक्ति विकासक क्या है?

यह एक सरल योग क्रिया है जो गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और गर्दन दर्द को दूर करने में मदद करती है। इसे आप कहीं भी जैसे कुर्सी, सोफे या बिस्तर पर बैठकर कर सकते हैं।

ग्रीवा शक्ति विकासक के लाभ:

  • गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
  • गर्दन दर्द और सर्वाइकल को दूर करता है
  • रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है
  • एकाग्रता और स्मरण शक्ति को बढ़ाता है
  • तनाव और चिंता को कम करता है

ग्रीवा शक्ति विकासक कैसे करें:

  1. सीधे बैठें। यदि आपको सीधे बैठने में परेशानी हो रही है, तो अपने कूल्हों के नीचे तकिया, मसंद या लकड़ी का पाटा रखें मतलब ऊंचाई दें।
  2. अपनी गर्दन को धीरे-धीरे दाएं ओर घुमाएं। अपनी क्षमता के अनुसार गर्दन को घुमाएं, जैसे कि नाक को कंधे के समानांतर लाने का प्रयास करें। 30 सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें।
  3. अब धीरे-धीरे अपनी गर्दन को बाईं ओर घुमाएं। अपनी क्षमता के अनुसार गर्दन को घुमाएं और 30 सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें इस प्रकार दाहिनी तरफ दो बार और बाएं तरफ दो बार करें।
  4. धीरे-धीरे अपनी गर्दन को वापस बीच में लाएं और आंखें बंद करके मांसपेशियों को आराम करने दे ।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • गर्दन को घुमाते समय कंधों को न घुमाएं।
  • गर्दन को सीधा रखें, ऊपर या नीचे की ओर न झुकाएं।
  • प्रत्येक तरफ 30 सेकंड के लिए गर्दन को घुमाएं।
  • कम से कम 3 मिनट के लिए ग्रीवा शक्ति विकासक करें।

क्रिया के बाद परिवर्तन को महसूस करें:

  • आंखें बंद करके क्रिया के पहले और बाद में गर्दन में आए बदलाव को महसूस करें।
  • क्रिया करते समय ध्यान पूरी तरह से गर्दन पर होना चाहिए।

ग्रीवा शक्ति विकासक एक सरल और प्रभावी क्रिया है जो गर्दन को स्वस्थ रखने में मदद करती है। इसे नियमित रूप से करें और गर्दन दर्द से मुक्ति पाएं।

  • आप इस क्रिया को सुबह या शाम अथवा किसी भी समय कर सकते हैं।

आशा है यह जानकारी आपके लिए और आपकी शुभचिंतकों के लिए बहुत उपयोगी होगी।

धन्यवाद!

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

टखना और घुटने के दर्द के लिए गुल्फ चक्र क्रिया

नमस्कार दोस्तों! एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे गुल्फ चक्र के बारे में।गुल्फ का मतलब होता है टखना और चक्र का मतलब होता है गोलाकार घूमना। यह एक योग क्रिया है जो टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करती है। यह टखना और घुटने के दर्द को दूर करने के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

कैसे करें :

सबसे पहले नीचे बैठ जाएं और पैरों को दंडासन की स्थिति में सामने फैलाएं। पैरों के बीच एक से डेढ़ फुट का फासला रखें। अपने हाथों को अपनी कमर के पीछे जमीन पर लगाएं और छाती को फूला हुआ रखें।

अब अपने पैरों के टखनों को गोलाकार घुमाएं। इसके लिए अपने बाएं पैर के पंजे से दाएं पैर की एड़ी को और दाएं पैर के पंजे से बाएं पैर की एड़ी को छूने का प्रयास करें। इस प्रकार कम से कम तीन बार करे और एक चक्र में कम से कम 15 से 20 सेकंड लगना चाहिए जितनी बार दाएं ओर टखनों को हमने घड़ी की दिशा में घुमाया है उतनी बार हम घड़ी की विपरीत दिशा में पैरों को गोलाकार घुमाएंगे। पैरों को घुमाते हुए एड़ी टखनों पिंडलियों और घुटनों के साथ जांघो में होने वाले खिंचाव का अवलोकन करें और अपने पैरों को विश्राम की अवस्था में ले आएं। जब आप विश्राम करें गुल्फ चक्र करने से पहले और करने के बाद की परिवर्तन को महसूस करें।

गुल्फ चक्र के लाभ:

  • टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों को मजबूत और लचीला बनाता है।
  • टखना और घुटने के दर्द को दूर करता है।
  • रक्त संचार में सुधार करता है।

गुल्फ चक्र के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:

  • गुल्फ चक्र को धीरे-धीरे करें। जल्दी-जल्दी करने से इसका प्रभाव कम हो जाएगा।
  • दोनों पैरों के बीच एक से डेढ़ फुट का फासला अवश्य रखें। इससे पैरों पर पूरा खिंचाव आएगा।
  • आंखें बंद करके चेहरे पर मुस्कुराहट रखते हुए सहज भाव से क्रिया करें।
  • क्रिया करने के बाद शरीर को ढीला छोड़ दें।

प्रतिदिन कितनी बार करें गुल्फ चक्र:

जिन लोगों को टखनों, पिंडलियों, घुटनों या जांघों में दर्द है उन्हें दिन में तीन बार गुल्फ चक्र करना चाहिए। इसे सुबह, दोपहर और शाम में कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

गुल्फ चक्र एक सरल लेकिन प्रभावी योग क्रिया है जो टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। नियमित रूप से गुल्फ चक्र करने से आप इन क्षेत्रों में होने वाली समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। और खास बात इसकी यह है आप अपने बिस्तर के ऊपर भी कर सकते हैं लेकिन बिस्तर स्पंजी नहीं होना चाहिए ना बहुत नरम और ना बहुत कठोर होना चाहिए

इसी के साथ आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद और आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमन। अन्य जानकारी के लिए क्लिक करें www.DhakaRam.com

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

कमर दर्द से राहत के लिए कटि चक्रासन

नमस्कार दोस्तों! एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आपका स्वागत है। आज हम कटि चक्रासन के बारे में बात करेंगे। कटि का मतलब होता है कमर और चक्रासन का मतलब होता है गोलाकार घूमना। यह एक योग क्रिया है जो कमर को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करती है। यह कमर दर्द को दूर करने के लिए भी बहुत फायदेमंद है। कटी का मतलब कमर चक्र का मतलब गोलाकार अपनी कमर को चक्र की भांति गोलाकार घूमना इसीलिए इसका नाम कटि चक्रासन है।

कैसे करें कटि चक्रासन:

  • कटि चक्रासन के लिए हम दोनों पैरों के बीच एक से डेढ़ फुट का फैसला रखेंगे।
  • पैरों के पंजे थोड़ा सा अंदर की तरफ रखेंगे और एड़ियों को थोड़ा सा बाहर की तरफ रखेंगे।
  • अपने हाथों को जांघों पर रखेंगे धीरे-धीरे हाथों को ऊपर उठा कर कंधों के बराबर ले जाएंगे।
  • दोनों हाथों को अच्छी तरह तानेंगे दाएं हाथ को दाई तरफ खींचेंगे और बाएं हाथ को बाई तरफ खींचेंगे और श्वास छोड़ते हुए हम दाहिनी तरफ कमर को मरोड़ देंगे।
  • दाहिने हाथ को धीरे से कमर के पीछे से लाकर बाई तरफ की पसलियों पर रख देंगे और उंगलियों से नाभि को छूने का प्रयास करेंगेऔर बाएं हाथ को हम दाहिने कंधे पर बहुत ही हल्के हाथों से रखेंगे। हमारी कमर को ज्यादा से ज्यादा मरोड़ने की कोशिश करेंगे। कम से कम हम एक मिनट दाहिनी तरफ इसी अवस्था में रहेंगे।
  • धीरे-धीरे हम जैसे गए थे वैसे हम वापस आएंगे और हाथों को जांघों के ऊपर रख देंगे और आधा मिनट हम अपने आसन को करने के बाद क्या परिवर्तन हुआ है उसे महसूस करेंगे।
  • एक तरफ करने के बाद विश्राम करना जरूरी है ताकि एक तरफ करने का जो खिंचाव है वह हमारे दूसरी तरफ आसान करने पर ना पड़े।
  • अब हम इसे दूसरी तरफ दोहराएंगे।दोनों हाथों को हम धीरे-धीरे अपने बगल से उठाएंगे। दोनों हाथों को बगल में तान देंगे।
  • दाहिने हाथ को हम दाई तरफ खींचेंगे और बाएं हाथ को हम बाई तरफ खींचेंगे। धीरे-धीरे अब हम श्वास छोड़ते हुए कमर को घुमाएंगे।
  • अब धीरे-धीरे बाएं हाथ को हम कमर के पीछे से दाहिनी तरफ की पसलियां पर रखेंगे और उंगलियों से नाभि छूने का प्रयास करेंगे और दाएं हाथ को हम बाएं कंधे पर हल्के से रखेंगे और इसी अवस्था में हम 1 मिनट तक रुकेंगे।
  • 1 मिनट पूरा होने के बाद हम जैसे आसन में गए थे वैसे ही धीरे-धीरे हम आसान से बाहर आएंगे। हम आधा मिनट विश्राम करेंगे और जब हम विश्राम करेंगे तो हम हमारे शरीर में हुए परिवर्तन का अवलोकन करेंगे।

कटि चक्रासन के लाभ:

  • कमर को मजबूत और लचीला बनाता है।
  • कमर दर्द को दूर करता है।
  • मेरुदंड को स्वस्थ रखता है।
  • गुर्दे, यकृत और अग्नाशय को स्वस्थ रखता है।
  • पाचन क्रिया को बेहतर करता है।

कटि चक्रासन के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:

  • पैरों में एक से डेढ़ फीट का फासला होना चाहिए सरल भाषा में कहीं तो कंधे जितना फासला।
  • पंजे थोड़े से अंदर की तरफ और एड़ियां थोडी सी बाहर की तरफ होनी चाहिए।
  • जैसे हम आसन में गए थे वैसे ही हमें आसान से वापस आना चाहिए।
  • कटि चक्रासन में हमें अपने कंधों को थोड़ा ऊपर की ओर उठा कर समान रखना चाहिए न की ऊपर नीचे।
  • कटि चक्रासन में शरीर को घुमाते समय हमें कोशिश करनी है कि हमारे कमर से नीचे का हिस्सा नहीं घूमें।
  • अपने हाथों से नाभि को छूने की कोशिश करनी चाहिए मतलब जब दाहिनी तरफ मरोड़े तब दाहिने हाथ बाई ओर से और जब बाई तरफ से मरोड़े तब बाई ओर से दाहिने पीछे से नाभि छूने का प्रयास करेंगे।

कटि चक्रासन के बाद क्या करें:

  • आसन को करने के बाद उसका आंखें बंद करके अवलोकन अवश्य करें।
  • कम से कम आधा मिनट तक आराम करें।

निष्कर्ष:

कटि चक्रासन एक सरल लेकिन प्रभावी योग क्रिया है जो कमर के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। नियमित रूप से कटि चक्रासन करने से आप कमर दर्द से छुटकारा पा सकते हैं और अपनी कमर को मजबूत और लचीला बना सकते हैं।

तो प्यारे मित्रों अपना अभ्यास जारी रखें। आप सभी का मुस्कुराता हुआ धन्यवाद आप का दिन मंगलमय हो। और ऐसे ही एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में हमारा साथ देते रहिए और हमारे साथ अपने शरीर को मजबूत और निरोगी बनाकर अपने नियर और डियर को शेयर कर उन्हें भी स्वास्थ्य का लाभ प्राप्त कर कर विश्व कल्याण में अपना योगदान प्रदान करें।

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योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

आगे झुकने का वैज्ञानिक तरीका: उत्तानासन

उत्तानासन एक योगासन है जो हमारे मन और मस्तिष्क के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे हमारे टखनो, पिंडलियों और जांघ की मांसपेशियों को ताकत मिलती है। यह आसन कमर दर्द में भी बहुत लाभकारी है।

आसान का तरीका:

  1. अपने एड़ी और पंजों को मिला लीजिए।
  2. अपने बगल से दोनों हाथों को धीरे-धीरे ऊपर उठा लीजिए।
  3. अब हाथों को कंधों के बराबर लाकर हाथों को कंधों से आकाश की तरफ घुमा लीजिए।
  4. अब दाएं हाथ को दाहिनी तरफ खींचेंगे और बाएं हाथ को बाएं तरफ खींचेंगे दोनों हाथों को खींचते हुए सर के ऊपर ले जाएंगे।
  5. अब हाथों को खींचते हुए धीरे-धीरे कमर को सीधा रखते हुए कूल्हों के जोड़ से मतलब ( हिप्स जॉइंट )सेआगे की ओर झुकेंगे।
  6. हाथों की हथेलियों को हम पैरों के पास रखेंगे जितना झुक सकते हैं हम आगे की ओर झुकेंगे।
  7. हमारी स्पाइन बिल्कुल सीधी रहेगी।
  8. धीरे-धीरे श्वास को निकलते हुए और आगे झुकने की कोशिश करना है।
  9. कम से कम 1 से 2 मिनट तक आपको इस आसन में रहना है।
  10. आसन से वापस आने के लिए, धीरे-धीरे जैसे हम आसन में गए थे वैसे ही हम वापस आएंगे।

आसान के फायदे:

  • टखनो, पिंडलियों और जांघ की मांसपेशियों को ताकत देता है।
  • कमर दर्द में फायदा करता है।
  • मन और मस्तिष्क को शांत करता है।
  • खून का संचार सिर की तरफ करता है।

सावधानियां:

  • अगर आप पहली बार इस आसन को कर रहे हैं तो शुरुआत में 1 मिनट तक ही इस आसन में रहें। धीरे-धीरे समय बढ़ा सकते हैं।
  • अगर आपको आसन करते समय किसी भी तरह की तकलीफ महसूस हो तो आसन तुरंत छोड़ दें।
  • आसन के बाद शांत होकर कुछ देर तक विश्राम करना चाहिए।
  • आसन को नियमित रूप से करने से अधिक लाभ मिलता है।

निष्कर्ष:

उत्तानासन एक बहुत ही फायदेमंद योगासन है। अगर आप इस आसन को सही तरीके से करते हैं तो आपको इसके कई फायदे मिलेंगे।

Slipped Disc and Sciatica – Apeksha Kutheda, Jaipur

After suffering from a back pain for over 4 months, I visited several doctors, physiotherapist, chiropractic etc, but there was no relief. All of them has suggested me for the surgery. At that time I felt mentally and physically weak. Then yoga was the last option in my mind before going for the surgery. Then “YogaPeace Sansthan” came in my mind as earlier also I have join the same for my diabetic illness.

60 minutes of silence, relaxation and traction helps body to get relief, stress free and heal the mind and soul.

I highly recommended “YogaPeace Sansthan” for anyone who is stressed and exhausted with severe back pain, joint pain or any other illness. Therapy yoga provide unique attention to each and every person according to their ailment and health issues.

The road of recovery has been a long one. But I credit Guruji and Yogi Anil and in-fact entire staff of “YogaPeace Sansthan” as one of the reason for getting my health back.

Now I am completely fit.

Thank you
Apeksha Khunteta
Jaipur

आनंदम योग शिविर पोस्टर का विमोचन हुआ – गलता पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य जी महाराज का तिरुनक्षत्र श्री गलता पीठ में मनाया गया

गलतापीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित श्री स्वामी सम्पतकुमार अवधेशाचार्य जी महाराज का तिरुनक्षत्र उत्सव श्री गलता पीठ में हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गलतापीठाधीश्वर स्वामी जी महाराज ने प्रातः श्री गलता पीठ में विराजमान समस्त विग्रहों की पूजाअर्चना की एवं भगवान को विशेष भोग लगाया। श्री स्वामी जी ने समस्त पूर्ववर्ती आचार्यों का भी पूजन किया। इस अवसर पर जयपुर सहित देश विदेश से पधारे सैकड़ों शिष्यों व भक्तों ने स्वामी जी के दर्शन किए व उनसे आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर आनंदम योग शिविर के पोस्टर का विमोचन गलतापीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित श्री स्वामी सम्पतकुमार अवधेशाचार्य जीमहाराज, योगपीस संस्थान के संस्थापक विख्यात योग गुरु योगाचार्य ढाकाराम, श्री गलता पीठ के युवराज स्वामी राघवेंद्र, शिविर के मुख्य समन्वयक योगी मनीष भाई विजयवर्गीय ने किया।

उत्सव में सम्मिलित हो महाराज श्री को बधाई देने एवं शुभाशीर्वाद पाने के लिए पधारे भक्त जनों को सुख शांति एवं आनंद से परिपूर्ण यशस्वी जीवन जीने के लिए नियमित योगाभ्यास करने एवं योगी दिनचर्या का संदेश महाराज ने दिया। युवराज स्वामी राघवेन्द्र ने बताया कि शरीर स्वस्थ हो तो मन भी प्रसन्न एवं आनंदित रहता है जो की भक्ति योग, ज्ञान योग एवं कर्म योग में अत्यावश्यक है, इसलिए भक्तगणों के स्वास्थ्य को ख्याल में रखते हुए श्री गलता पीठ द्वारा योगापीस संस्थान एवम् अंजू देवी मेमोरियल ट्रस्ट के सहयोग से आगामी 10 दिसंबर शाम 4:00 से 6:00 बजे तक मंदिर प्रांगण में आनंदम योग शिविर आयोजित किया जाएगा जिसमें योगाचार्य ढाकाराम योग प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

शीतली प्राणायाम

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

प्यारे मित्रों, आज हम लेकर आए हैं आपके लिए शीतली प्राणायाम। इसके नाम से ही लगता है कि यह हमारे शरीर को शीतलता प्रदान करने वाला प्राणायाम है। गर्मी के समय में तो यह रामबाण है। जिन लोगों को पित्त ज्यादा बनता है, जिनके पसीना ज्यादा आता है, जिनके मुंह में छाले होते हैं, जिनके पेट में अल्सर है, उनके लिए बहुत फायदेमंद है। अब हम आपको शीतली प्राणायाम करने का सही तरीका बताएंगे ताकि आप ज्यादा से ज्यादा फायदा ले सकें।

शीतली प्राणायाम की क्रियाविधि

शीतली प्राणायाम करने के लिए आप किसी भी आसन में बैठ सकते हैं जिसमें आप सुखपूर्वक बैठ सकें। शीतली प्राणायाम के लिए आप सुखासन, पद्मासन, अर्ध पद्मासन, कुर्सी पर, मेज पर या बेड पर बैठ सकते हैं। इसमें यह बात ध्यान रखना है कि आपकी कमर सीधी हो, आपकी कमर और पीठ एक सीध में हो जिससे आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहे। आपकी छाती फूली हुई होनी चाहिए। आपकी पेट की मांसपेशियां शिथिल होनी चाहिए। आपके चेहरे और गर्दन पर कोई तनाव नहीं होना चाहिए।

अब आप अपनी जांघों पर हाथों की कोई भी मुद्रा बनाकर रखते हैं। आप हाथों से प्राण मुद्रा या ज्ञान मुद्रा बना सकते हैं। इसके लिए आपको होठों को ओ की आकृति बनाते हुए जीभ को बाहर निकालते हुए जीभ का पाइप बनाएंगे। अब इसी पाइप से धीरे-धीरे श्वास को अंदर लेंगे। पूरा श्वास अंदर लेने के बाद हम इसे अंदर निगल लेंगे। फिर नाक के माध्यम से इसे धीरे-धीरे बाहर कि और निकाल देंगे।

शीतली प्राणायाम के लाभ

  • यह पेट की गर्मी को कम करता है।
  • यह शरीर को शिथिल करता है और तन और मन को शांत करता है।
  • यह तनाव को कम करने में रामबाण है।
  • यह गले और क्रोध से होने वाली बीमारियों में लाभदायक है।
  • जिन लोगों को अधिक गर्मी लगती है, पसीना ज्यादा आता है, पेट में अल्सर है, मुंह में छाले हैं, जिनको नकसीर बहती है, जिनको बहुत ज्यादा पित्त बनता है, उनको यह बहुत फायदा देता है।

सावधानियां

  • यह प्राणायाम केवल गर्मी के मौसम में किया जा सकता है।
  • इसमें हमारी रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए।
  • अगर हमें सर्दी की बीमारियां हो रखी हों, जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, जुखाम, खांसी आदि, तो हमें यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • जो लोग जीभ को मोड़कर पाइप नहीं बना सकते, उनको शीतली की जगह शीतकारी प्राणायाम करना चाहिए।
  • अगर आप शीतली प्राणायाम करना चाहते हैं तो आप हाथों से अपनी जीभ को सहारा देकर भी कर सकते हैं।
  • यह प्राणायाम एक सामान्य व्यक्ति 5 मिनट तक कर सकता है। और जो लोग किसी प्रकार की बीमारी के लिए करना चाहते हैं तो वे लोग 5 मिनट सुबह, 5 मिनट शाम को और अगर समय हो तो 5 मिनट दोपहर में भी कर सकते हैं।
  • इस 5 मिनट के समय में 4 मिनट आपको प्राणायाम करना है और 1 मिनट के लिए आपको प्राणायाम के प्रभाव को आंखें बंद करते हुए महसूस करना है।

प्राणायाम का पूरा फायदा लेना चाहते हैं तो प्राणायाम आंखें बंद करके ताकि आप अपने शरीर में हो रहे बदलाव को महसूस कर पाए।

आप सभी का बहुत-बहुत आभार। आप सभी का दिन मंगलमय हो।

हँसी के बिना जीवन नहीं

आप सभी को हमारा मुस्कुराता नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। मित्रों, आज हम बिंदास होकर हँसने की बात को समझेंगे। कहते हैं ना, हँसी के बिना जीवन नहीं(Laughter Yoga) । हँसने के बाद आँखें बंद करके ऐसा महसूस होगा कि हमारे शरीर का अंग-अंग हँस रहा है।

जब मैं हँसने की बात करता हूँ तो आप बोलेंगे कि बिना बात क्यों हँसें?

आप जरा ध्यान से सोचिए, हँसी के बिना कोई जीवन है क्या? हँसी के बिना जीवन में सब कुछ नीरस ही नीरस है। आप उदास आदमी के पास जाना पसंद करेंगे क्या? नहीं करेंगे ना? किस तरह के लोगों के पास जाना पसंद करेंगे? खुशनुमा हो, जो हँसता रहे, मुस्कुराता रहे। उससे हमारी बात करने की भी इच्छा होगी।

मैं किसी कारपोरेट जगत की बात करूं या किसी अन्य जगह की बात करूं, जब खुशनुमा और आनंदित लोग मिलते हैं तो उसके चारों तरफ का वातावरण बहुत ही आनंद में हो जाता है। जब मैं योग की बात करूं तो योग का मतलब ही आनंद होता है। जब हँसते रहेंगे, मुस्कुराते रहेंगे तो आपके चारों तरफ का वातावरण सकारात्मक होगा। आपके सारे काम अच्छे होंगे। अगर सारे काम अच्छे नहीं हो तो भी कोई बात नहीं, क्योंकि जीवन के सारे कार्य अच्छे हो ऐसा संभव नहीं है। कभी खुशी, कभी गम, सिर्फ हमारे देखने का नजरिया है। क्योंकि जैसे कि दिन और रात है, इस प्रकार हमारे जीवन में दुख और सुख भी है। मैं कहता हूं, मुस्कुराते हुए देखना चाहिए।

आप बोलेंगे, हम सारा दिन हँसेंगे तो लोग क्या बोलेंगे? लोग बोलते भी हैं, सारा दिन पागलों की तरह हँसते रहते हो। मैं तो बोलता हूं, बिना वजह हँसते रहना चाहिए। कहते हैं ना, हँसते-हँसते कट जाए रास्ते। मैं बोलता हूं, दिन भर कहां से हँसने का वजह लाएंगे, कहां से चुटकुले सुनेंगे या सुनायेंगे? मैं आपको हँसने की वजह देता हूं या यूं कहें हँसने की चाबी देता हूं। जब भी आप परेशान हो, उदास हो तो आप एक बात को याद रखें और बिंदास होकर हँसे और अपने जीवन में आनंद को लाएं।

तो मेरे प्यारे मित्रों, इस दुनिया में अनगिनत लोग आए हैं, अनगिनत लोग चले गए और अनगिनत लोग हमारे और आपके जैसे चले जाएंगे। यह निश्चित है, आए हैं तो जाना ही है। लेकिन क्या आपने कभी गौर से सोचा कि कोई हमारे जैसा है? बिल्कुल भी नहीं है। हम दूसरों को देखते हैं, लेकिन हमारे जैसा कोई नहीं है। इसलिए आप आज के बाद जब भी दुखी हों, परेशान हों, अकेले हों, तो यह सोचकर हँसें कि मेरे जैसा इस दुनिया में कोई भी नहीं है। परमपिता (सुप्रीम पावर) परमेश्वर ने मुझे अनोखा (यूनिक) बनाया है। आपके जैसा खूबसूरत इंसान इस दुनिया में कोई नहीं है। यही सोचकर हम लोगों को हँसना चाहिए। इस दुनिया में मेरा जैसा दूसरा कोई नहीं है। और सभी माताएं और बहनें सोचेंगी कि मेरे जैसी खूबसूरत महिला इस दुनिया में कोई नहीं है। यहां कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, यह बहुत बड़ी बात है और हम बहुत खुशकिस्मत हैं कि हम, हमारे जैसा इस पूरे सृष्टि में कोई भी नहीं है। इसलिए स्वयं को देखकर हँसना और परमपिता परमेश्वर को धन्यवाद व्यक्त करना चाहिए। हम लोग बाहर देखते हैं। मैं बोलता हूं, आप लोग अपने अंदर देखें। जैसे-जैसे हम अंदर देखने लगेंगे, वैसे-वैसे सचमुच की मुस्कुराहट और खुशी बाहर बिखरने लगेगी।

यहाँ सोचकर कि सुप्रीम पावर परमेश्वर की अनुकंपा बरस रही है और आपके शरीर के रोम-रोम आनंद और मस्ती से लबालब हो गया है। चेहरा एकदम खिला हुआ, शरीर के प्रत्येक अंग-प्रत्यंग जैसे आनंद से खिल रहे हों, ऐसे भाव। कुछ मत सोचिएगा, बस हँसिएगा। जब तक हँसते रहिएगा, जब तक आपके शरीर का अंग-अंग हँसने नहीं लगे। हँसता हुआ ध्यान कीजिए, खिलखिलाता हुआ ध्यान।