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Tag: laughingyoga

आंखों से संबंधित समस्याओं को कैसे दूर रखें: नेत्र शक्ति विकासक क्रिया

नमस्कार मित्रों आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमन! आज हम “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में नेत्र शक्ति विकासक क्रिया के बारे में बात करेंगे।

आंखों की समस्याएं: एक बढ़ती चिंता

आजकल हम सभी मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टीवी का अत्यधिक उपयोग करते हैं। जिसके कारण आंखों में सूखापन, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। इन समस्याओं से बचने और आंखों को स्वस्थ रखने के लिए हमें नेत्र शक्ति विकासक क्रिया का अभ्यास करना चाहिए।

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया क्या है?

यह एक सरल योग क्रिया है जो आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करती है और आंखों से संबंधित समस्याओं को दूर रखती है।

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया कैसे करें:

  1. जमीन पर, कुर्सी पर, सोफे पर या बेड पर सीधे बैठ जाएं।
  2. अपने दोनों हाथों को बगल में फैलाकर कंधे के बराबर मुष्टि बना लें। आपका अंगूठा ऊपर की तरफ होना चाहिए।
  3. तिरछी नजर से 10 से 15 सेकंड के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे को देखें। अपनी गर्दन सीधी रखें।
  4. 10 से 15 सेकंड रुकने के बाद आंखों को बाईं ओर, बाएं हाथ के अंगूठे को देखें।
  5. धीरे-धीरे अपनी आंखों को दाईं ओर और बाईं ओर देखना शुरू करें।
  6. इस क्रिया को दोहराएं। नेत्र शक्ति विकासक क्रिया करते समय 15 सेकंड दाईं ओर और 15 सेकंड बाईं ओर देखना है। इस प्रकार आपको इसे 6 बार करना होगा (तीन बार दाहिनी ओर और तीन बार बाईं ओर)।
  7. नेत्र शक्ति विकासक क्रिया करने के बाद आंखें बंद करके आंखों की मांसपेशियों को आराम दें और उनमें आए बदलाव को महसूस करें।

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:

  • अपनी गर्दन को सीधा रखें और तिरछी नजर से अंगूठे की तरफ देखें।
  • अपने हाथों को पूरी तरह से तना हुआ रखें।
  • अपने चेहरे पर मुस्कुराहट रखें और तनाव मुक्त रहें।
  • अपने कंधों को सामान्य रूप से रखें, उठे हुए नहीं।

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया के लाभ:

  • आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
  • आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है
  • आंखों में सूखापन और कमजोरी को कम करता है
  • आंखों की थकान को दूर करता है
  • आंखों से संबंधित समस्याओं को दूर रखता है

अतिरिक्त सुझाव:

  • नहाते समय अपनी आंखों को पानी से धोएं।
  • अपनी आंखों को साफ रखने के लिए ठंडे पानी से धोएं।
  • आंखों को स्वस्थ रखने के लिए आंवला और पपीता का सेवन करें।
  • आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए त्रिफला के पानी से आंखों को धो सकते हैं।

निष्कर्ष:

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया एक सरल और प्रभावी क्रिया है जो आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करती है। इसे नियमित रूप से करें और आंखों से संबंधित समस्याओं से मुक्ति पाएं।

धन्यवाद!

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

हँसता हुआ ध्यान: एक आनंददायक और लाभकारी अभ्यास

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

आज हम सभी बिंदास होकर हँसता हुआ ध्यान करेंगे। आप सोचेंगे कि हम क्यों हँसे और हँसता हुआ ध्यान कैसे करेंगे लेकिन हँसने का कोई कारण नहीं होता है। आप लोगों को याद होगा कि हमने पिछली बार “हँसी के बिना जीवन नहीं” लेख लिखा था जिसमें हँसने के बारे में बताया था। हमने कहा था कि हमारे जैसा कोई नहीं इसलिए हम सब हँसेंगे क्योंकि हम यूनिक है और परमपिता परमेश्वर ने किसी भी मनुष्य या किसी भी जीव जंतु को रिपीट नहीं किया है। इस दुनिया में हमारे जैसे हम इकलौते ही हैं। लेकिन आज हम आपको हँसने के लिए एक दूसरी चाबी देंगे मतलब वजह देंगे क्योंकि जब आप बेवजह हँसते हैं तो आपकी आजू-बाजू वाले बोल ही देते हैं क्यों हँस रहे हो भाई पागलों की तरह। इसीलिए पिछली बार हमने वजह दिया था हमारे जैसा कोई नहीं और इस बार दूसरी वजह दे रहे हैं आप लोगों के पास हँसने के लिए।

अब आपके पास 2 वजह हो जाएगी और इस तरह की वजह आने वाली एपिसोड में देते रहेंगे । आज आप दुनिया के सबसे अमीर आदमी बनने वाले हैं। हर कोई कहता है कि मेरे पास यह नहीं है मेरे पास वह नहीं है लेकिन आज आप अपने मुंह से ही कहेंगे कि मेरे जैसा अमीर इस दुनिया में कोई नहीं है। आप आज इसलिए हँसेंगे क्योंकि आपके जैसा अमीर आदमी और इस दुनिया में कोई नहीं है। अब आप जरा दिल और दिमाग से सोचिए अगर इस दुनिया का सबसे अमीर आदमी आकर आपके दोनों गुर्दे मांगे और बोले कि मैं अपनी सारी संपत्ति आपके नाम कर दूंगा तो क्या आप उन्हे अपने दोनों गुर्दे देंगे? नहीं देंगे। तो सोचिए भगवान ने आपको आपके शरीर की कितनी सारी बहुमूल्य चीज दे रखी हैं। भगवान ने आपको दो गुर्दे दे रखे हैं और दो-दो आंखें दे रखी हैं अगर कोई सारी संपत्ति तुम्हारा नाम कर दूंगा अपने दोनों आंखें हमें दे दो क्या हम अपने दोनों आंखें देंगे बिल्कुल भी नहीं देंगे। तो सोचिए आप कितने भाग्यशाली हैं कि आपको यह सारी चीज मिली हुई है। आज से हम यह सोच कर हँसेंगे कि भगवान ने हमें इतना भाग्यशाली बनाया है। तो जोर से हँसेंगे। तो इतना हँसो की आपके पड़ोसी को भी पता लग जाए कि आप हँस रहे हैं। अपनी आंखें बंद करें और हँसते रहे और शरीर का रोम रोम हँस रहा है ऐसा महसूस करेंगे। भगवान को धन्यवाद दें कि उन्होंने आपको दो बहुमूल्य आंखें दी हैं और आंखों और गुर्दे जैसे कितने ही बहुमूल्य चीज हमारे शरीर में है। इसलिए दिल खोलकर हँसो इतना हँसेंगे की आपका पेट दर्द होने लग जाए आपके गालों में दर्द होने लग जाए। अपने आप पर हँसना है और दिल से हँसना है। योग का मतलब ही है अपने स्वयं पर हँसना हैं। आज हम हँस रहे हैं क्योंकि हमारे पास दो आंखें हैं और इन आंखों के बिना दुनिया कुछ भी नहीं है। लोग दूसरों पर हँसते हैं लेकिन हमें अपने आप पर हँसना है। खो जाना है अपने आप में। धन्यवाद दे परमपिता परमेश्वर को की उन्होंने हमें गुर्दे और आंखें और बहुत सारी मूल्यवान चीज हमारे शरीर में प्रदान की है। हमारे शरीर में भगवान ने सैकड़ो ऐसी चीज दे रखी हैं जिनका कोई मुकाबला नहीं। इसलिए आत्म विश्लेषण बहुत जरूरी है। अपने आप में खो जाए। अपने आप का अवलोकन करे। जब भी आप उदास हो आप अपने आप को देखें। अपने बेशकीमती शरीर को देखें और खूब हँसे और हँसता हुआ ध्यान करें उनकी अनुकंपा हम पर बरस रही है उसे महसूस करें।

हँसता हुआ ध्यान कैसे करें?

  • हँसता हुआ ध्यान करने के लिए, सबसे पहले एक आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं जैसे आलती पालती मार कर बैठना मतलब सुखासन में अर्ध पद्मासन पद्मासन या कुर्सी या सोफे के ऊपर कुल मिलाकर आरामदायक स्थिति में और अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें। अपनी आँखें बंद करें और अपने शरीर को आराम दें।
  • अब, अपने होंठों को खोलें और हँसने की आवाज निकालें। शुरू में, यह नकली हँसी की तरह लग सकता है, लेकिन जैसे-जैसे आप अभ्यास करते हैं, यह अधिक स्वाभाविक हो जाएगा।
  • अपनी हँसी को अपने पूरे शरीर में फैलने दें। अपने चेहरे, गर्दन, छाती और पेट को हिलाएं। अपनी हँसी को दिल से आने दें।
  • 10-15 मिनट तक हँसते रहें। उसके बाद अपनी आँखें खोलें और सामान्य स्थिति में लौटें।

लाभ:

  • मनोवैज्ञानिक लाभ: हंसता हुआ ध्यान तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में मदद कर सकता है। यह आत्म-सम्मान और आत्म-प्रेम को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकता है।
  • शारीरिक लाभ: हंसता हुआ ध्यान रक्तचाप को कम करने, प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने और दर्द को कम करने में मदद कर सकता है।

हँसता हुआ ध्यान के लिए कुछ सुझाव:

  • अपने आप पर हँसें: हँसता हुआ ध्यान का सबसे अच्छा तरीका अपने आप पर हँसना है। अपने शरीर की विविधताओं और अपूर्णताओं को स्वीकार करें और उन पर हँसें।
  • अपनी हँसी को स्वाभाविक होने दें: शुरू में, आपकी हँसी नकली लग सकती है, लेकिन जैसे-जैसे आप अभ्यास करते हैं, यह अधिक स्वाभाविक हो जाएगी। अपनी हँसी को रोकने की कोशिश न करें, बस इसे बहने दें।
  • नियमित रूप से अभ्यास करें: हँसता हुआ ध्यान का अधिकतम लाभ उठाने के लिए, नियमित रूप से इसका अभ्यास करें।

तो प्यारे मित्रों हँसते मुस्कुराते रहो। दूसरों पर हँसने की बजाय हमेशा अपने ऊपर हँसिए। हँसने को अपनी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाये किसी भी हालत में अपनी खुशी के साथ कंप्रोमाइज नहीं करें क्योंकि अगले ही क्षण का हमें पता नहीं है। इसी के साथ आप सभी का जीवन हँसता खेलता आनंद में हो ।

हँसी के बिना जीवन नहीं

आप सभी को हमारा मुस्कुराता नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। मित्रों, आज हम बिंदास होकर हँसने की बात को समझेंगे। कहते हैं ना, हँसी के बिना जीवन नहीं(Laughter Yoga) । हँसने के बाद आँखें बंद करके ऐसा महसूस होगा कि हमारे शरीर का अंग-अंग हँस रहा है।

जब मैं हँसने की बात करता हूँ तो आप बोलेंगे कि बिना बात क्यों हँसें?

आप जरा ध्यान से सोचिए, हँसी के बिना कोई जीवन है क्या? हँसी के बिना जीवन में सब कुछ नीरस ही नीरस है। आप उदास आदमी के पास जाना पसंद करेंगे क्या? नहीं करेंगे ना? किस तरह के लोगों के पास जाना पसंद करेंगे? खुशनुमा हो, जो हँसता रहे, मुस्कुराता रहे। उससे हमारी बात करने की भी इच्छा होगी।

मैं किसी कारपोरेट जगत की बात करूं या किसी अन्य जगह की बात करूं, जब खुशनुमा और आनंदित लोग मिलते हैं तो उसके चारों तरफ का वातावरण बहुत ही आनंद में हो जाता है। जब मैं योग की बात करूं तो योग का मतलब ही आनंद होता है। जब हँसते रहेंगे, मुस्कुराते रहेंगे तो आपके चारों तरफ का वातावरण सकारात्मक होगा। आपके सारे काम अच्छे होंगे। अगर सारे काम अच्छे नहीं हो तो भी कोई बात नहीं, क्योंकि जीवन के सारे कार्य अच्छे हो ऐसा संभव नहीं है। कभी खुशी, कभी गम, सिर्फ हमारे देखने का नजरिया है। क्योंकि जैसे कि दिन और रात है, इस प्रकार हमारे जीवन में दुख और सुख भी है। मैं कहता हूं, मुस्कुराते हुए देखना चाहिए।

आप बोलेंगे, हम सारा दिन हँसेंगे तो लोग क्या बोलेंगे? लोग बोलते भी हैं, सारा दिन पागलों की तरह हँसते रहते हो। मैं तो बोलता हूं, बिना वजह हँसते रहना चाहिए। कहते हैं ना, हँसते-हँसते कट जाए रास्ते। मैं बोलता हूं, दिन भर कहां से हँसने का वजह लाएंगे, कहां से चुटकुले सुनेंगे या सुनायेंगे? मैं आपको हँसने की वजह देता हूं या यूं कहें हँसने की चाबी देता हूं। जब भी आप परेशान हो, उदास हो तो आप एक बात को याद रखें और बिंदास होकर हँसे और अपने जीवन में आनंद को लाएं।

तो मेरे प्यारे मित्रों, इस दुनिया में अनगिनत लोग आए हैं, अनगिनत लोग चले गए और अनगिनत लोग हमारे और आपके जैसे चले जाएंगे। यह निश्चित है, आए हैं तो जाना ही है। लेकिन क्या आपने कभी गौर से सोचा कि कोई हमारे जैसा है? बिल्कुल भी नहीं है। हम दूसरों को देखते हैं, लेकिन हमारे जैसा कोई नहीं है। इसलिए आप आज के बाद जब भी दुखी हों, परेशान हों, अकेले हों, तो यह सोचकर हँसें कि मेरे जैसा इस दुनिया में कोई भी नहीं है। परमपिता (सुप्रीम पावर) परमेश्वर ने मुझे अनोखा (यूनिक) बनाया है। आपके जैसा खूबसूरत इंसान इस दुनिया में कोई नहीं है। यही सोचकर हम लोगों को हँसना चाहिए। इस दुनिया में मेरा जैसा दूसरा कोई नहीं है। और सभी माताएं और बहनें सोचेंगी कि मेरे जैसी खूबसूरत महिला इस दुनिया में कोई नहीं है। यहां कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, यह बहुत बड़ी बात है और हम बहुत खुशकिस्मत हैं कि हम, हमारे जैसा इस पूरे सृष्टि में कोई भी नहीं है। इसलिए स्वयं को देखकर हँसना और परमपिता परमेश्वर को धन्यवाद व्यक्त करना चाहिए। हम लोग बाहर देखते हैं। मैं बोलता हूं, आप लोग अपने अंदर देखें। जैसे-जैसे हम अंदर देखने लगेंगे, वैसे-वैसे सचमुच की मुस्कुराहट और खुशी बाहर बिखरने लगेगी।

यहाँ सोचकर कि सुप्रीम पावर परमेश्वर की अनुकंपा बरस रही है और आपके शरीर के रोम-रोम आनंद और मस्ती से लबालब हो गया है। चेहरा एकदम खिला हुआ, शरीर के प्रत्येक अंग-प्रत्यंग जैसे आनंद से खिल रहे हों, ऐसे भाव। कुछ मत सोचिएगा, बस हँसिएगा। जब तक हँसते रहिएगा, जब तक आपके शरीर का अंग-अंग हँसने नहीं लगे। हँसता हुआ ध्यान कीजिए, खिलखिलाता हुआ ध्यान।