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25-Aug-2025

सही आसन, सही जीवन: बैठने का योगिक महत्व

योगाचार्य ढाकाराम

शरीर का वजन बैठते समय कहाँ होता है?

योग केवल आसनों या शारीरिक मुद्राओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के संतुलन की सम्पूर्ण विद्या है। जब हम साधना के लिए किसी आसन में बैठते हैं – विशेषकर सुखासन, पद्मासन या पला‍थी जैसी स्थितियों में – तब शरीर का भार किस प्रकार से वितरित होता है, इसका गहरा प्रभाव हमारी शारीरिक व मानसिक स्थिति पर पड़ता है।

बैठने पर शरीर का भार कहाँ जाता है?

जब हम पालथी मारकर बैठते हैं, तब शरीर का सम्पूर्ण भार कूल्हों (Hip joints), टांगों की हड्डियों (Femurs), तथा श्रोणि (Pelvis) की हड्डियों के माध्यम से ज़मीन पर जाता है। यह भार मुख्य रूप से दोनों कूल्हों (Ischial tuberosities) पर होना चाहिए।

यदि शरीर का वजन किसी एक ओर (दाएँ या बाएँ कूल्हे पर) अधिक हो जाए, तो शरीर का संरेखन (Alignment) बिगड़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा बैठने से रीढ़, पीठ, घुटनों और यहाँ तक कि गर्दन पर भी असंतुलन उत्पन्न होता है।

ठीक उसी तरह जैसे गाड़ी के टायरों में हवा असमान हो तो गाड़ी झुक जाती है और उसकी चेसिस खराब हो सकती है, वैसे ही शरीर का भार असमान हो तो कई शारीरिक समस्याएँ जन्म लेती हैं।

संभावित समस्याएँ

  • रीढ़ की हड्डी का झुकाव (Scoliosis/kyphosis)
  • घुटनों पर असमान दबाव → गठिया या कूल्हों की जकड़न
  • झुकी हुई पीठ और संकुचित छाती → फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी
  • असंतुलन से प्राण ऊर्जा का व्यर्थ व्यय → थकान और मानसिक तनाव

योगशास्त्र का मार्गदर्शन

स्थिरं सुखं आसनम्” – अर्थात वह आसन जिसमें स्थिरता और सुख हो।

इसीलिए बैठते समय ध्यान रखें:

  • दोनों कूल्हों को ज़मीन पर बराबरी से टिकाएँ, आवश्यकता हो तो कुशन/कंबल का सहारा लें।
  • पीठ सीधी रखें और छाती को ओपन चेस्ट स्थिति में रखें।
  • कंधों को पीछे घुमाकर ढीला छोड़ें।
  • गर्दन सीधी और ठोड़ी थोड़ी अंदर (जालंधर बंध की भाँति)

सही बैठक के लाभ

  1. मांसपेशीय तनाव में कमी – समान भार वितरण से अनावश्यक खिंचाव नहीं होता।
  2. स्नायु-तंत्र की सक्रियता – उचित मुद्रा से मानसिक एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन बढ़ता है।
  3. श्वसन प्रणाली में सुधार – खुली छाती व सीधी पीठ से फेफड़े पूरी तरह फैलते हैं।
  4. रक्त संचार और ऊर्जा प्रवाह – सही मुद्रा से रक्त प्रवाह व चक्र सक्रिय रहते हैं।

निष्कर्ष

योग में आसन केवल बाहरी मुद्रा नहीं, बल्कि आंतरिक चेतना का माध्यम हैं। जब हम अपने शरीर का भार सम रूप से वितरित करते हैं और रीढ़ की स्थिति सही रखते हैं, तो शारीरिक, मानसिक और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है।

जैसे मजबूत नींव वाली इमारत हर तूफान में अडिग रहती है, वैसे ही योग में सही संरेखन और भार संतुलन हमें जीवन की हर परिस्थिति में स्थिर और ऊर्जावान बनाए रखता है।

आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें।
धन्यवाद!

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

Yogacharya Dhakaram
Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.