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18-Aug-2025

एंजायटी को कम करने का सरल उपाय: भस्त्रिका प्राणायाम

योगाचार्य ढाकाराम

हरि ओम, आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार! कहते हैं, मुस्कुराहट के बिना कुछ नहीं है, इसलिए हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए। “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

एंजायटी: आज की सबसे बड़ी समस्या

आज हम बात करेंगे एंजायटी के बारे में और जानेंगे कि इसे कैसे कम किया जाए। आजकल हर किसी को एंजायटी होने लगी है। समय के साथ आकांक्षाएं और महत्वाकांक्षाएं बढ़ गई हैं, जिससे हर समय तनाव बना रहता है।

आज हम एक बिल्कुल सरल अभ्यास बताएंगे, जिसे करके आप एंजायटी से मुक्त रह सकते हैं। हम पहले भी भस्त्रिका प्राणायाम के बारे में चर्चा कर चुके हैं, लेकिन आज हम इसे एंजायटी मैनेजमेंट के लिए समझेंगे।

भस्त्रिका प्राणायाम: एंजायटी से मुक्ति का मार्ग

भस्त्रिका प्राणायाम एक ऐसा अभ्यास है, जिसे आप रोज करके अपने आप को तनावमुक्त रख सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कभी भी, कहीं भी किया जा सकता है—चाहे आप सोफ़े पर बैठे हों, कुर्सी पर हों, या फिर जमीन पर। बस जरूरत है तो सांसों पर ध्यान केंद्रित करने की।

जब हम भस्त्रिका करते हैं, तो हमारा पूरा ध्यान सांसों पर होता है, जिससे मन शांत रहता है और एंजायटी दूर होती है।

भस्त्रिका प्राणायाम करने की विधि

  1. आसन: पद्मासन में बैठें। अगर पद्मासन में बैठने में कठिनाई हो, तो किसी भी आरामदायक मुद्रा में बैठ सकते हैं।
  2. हाथों की स्थिति:
  • श्वास भरते हुए हाथों को छाती के सामने से सिर के ऊपर ले जाएं (हथेलियाँ सामने की ओर)।
  • श्वास छोड़ते हुए हाथों को वापस छाती के सामने लाकर जांघों पर रख दें।
  1. अवधि: कम से कम 4 मिनट तक करें, फिर 1 मिनट का विश्राम लें।
  2. अनुभूति: अभ्यास से पहले और बाद में अपने शरीर में होने वाले परिवर्तनों को महसूस करें।
  3. नियमितता: प्रतिदिन कम से कम 5 मिनट भस्त्रिका प्राणायाम जरूर करें।

भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ

  • मन की शांति: जब हम आंखें बंद करके भस्त्रिका करते हैं और ध्यान सांसों पर केंद्रित होता है, तो मन इधर-उधर नहीं भटकता। इससे मन शांत रहता है और एंजायटी कम होती है।
  • गहरी सांस का महत्व: जितना हमारा श्वास लंबा और गहरा होगा, मन उतना ही शांत रहेगा। मन और सांस का गहरा संबंध है।
  • ऑक्सीजन की आपूर्ति: भस्त्रिका से फेफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है, जो रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में पहुँचती है। इससे ऊर्जा बढ़ती है और एंजायटी कम होती है।
  • हृदय व फेफड़ों के लिए फायदेमंद: यह प्राणायाम हृदय और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में सहायक है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: नियमित अभ्यास से इम्यूनिटी मजबूत होती है।

निष्कर्ष: योग को अपनाएं, स्वस्थ जीवन जिएं

अपने जीवन को योगमय बनाएं। नियमित रूप से आसन और प्राणायाम का अभ्यास करें। प्यारे मित्रों, हमारे साथ जुड़े रहें और अपने स्वास्थ्य का लाभ उठाते रहें।

आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें।
धन्यवाद!

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

Yogacharya Dhakaram
Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.