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09-Mar-2026

उत्कटासन – शरीर में शक्ति और संतुलन बढ़ाने वाला आसन

योगाचार्य ढाकाराम

प्यारे मित्रों,
आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।
आज हम बात करेंगे उत्कटासन के बारे में।

उत्कटासन का अर्थ

‘उत्कट’ का अर्थ है – दृढ़, शक्तिशाली या तीव्र
यह आसन ऐसे किया जाता है मानो आप एक काल्पनिक कुर्सी पर बैठे हों, इसलिए इसे चेयर पोज़ (Chair Pose) भी कहा जाता है।

विधि

  1. सबसे पहले समस्थिति (सीधे खड़े) में आ जाएं।
  2. दोनों हाथों को कंधों तक उठाएं और हथेलियों को आकाश की ओर करें।
  3. अब दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींचें और कंधों को कानों से सटा लें।
  4. धीरे-धीरे ऐसे बैठें जैसे आप काल्पनिक कुर्सी पर बैठ रहे हों
  5. छाती फूली हुई रखें, रीढ़ सीधी रखें।
  6. दोनों हथेलियां मिली हुई हों और एड़ी-पंजे-घुटने एक-दूसरे से सटे रहें।
  7. इस स्थिति में कम से कम 1 मिनट तक रुकने का प्रयास करें।
  8. फिर धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक स्थिति में आकर विश्राम करें
  9. आँखें बंद करके आसन से पहले और बाद में शरीर का अवलोकन करें

लाभ

  • पिंडलियों, घुटनों, कमर, जांघ और कंधों को मज़बूत बनाता है।
  • शरीर की संतुलन क्षमता और सहनशक्ति बढ़ाता है।
  • रीढ़ की हड्डी को सशक्त और लचीला बनाता है।
  • पाचन और रक्तसंचार में सुधार करता है।
  • मानसिक एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

सावधानियां

  • एड़ी और पंजे मिले रहने चाहिए
  • घुटने, पंजों की सीध से आगे नहीं जाने चाहिए
  • दोनों हाथ और शरीर सीधे ताने हुए हों।
  • बाजू कान से लगे रहें।
  • हथेलियां आपस में मिली हुई रहें, और अंगूठे फंसे न हों

आप सभी आनंदित रहें, मस्त रहें, खुश रहें।
बहुत-बहुत धन्यवाद।

– योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

Yogacharya Dhakaram
Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.