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19-Jan-2026

चंद्रभेदी प्राणायाम — शरीर को शीतलता देने वाला अद्भुत प्राणायाम

योगाचार्य ढाकाराम

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार।
“एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

आज का हमारा शीर्षक है — चंद्रभेदी प्राणायाम।

चंद्रभेदी प्राणायाम से हमें गर्मी अधिक लगना, पसीना आना, मुंह में छाले, पेट में जलन, पेट के छाले आदि समस्याओं में बहुत लाभ मिलता है।

चंद्रभेदी प्राणायाम क्या है?

“चंद्रभेदी” का अर्थ है — चंद्रमा की तरह शीतलता प्रदान करने वाला।
शरीर में दो नथुने होते हैं —

  • दाहिना नथुना कहलाता है सूर्य नाड़ी
  • बायां नथुना कहलाता है चंद्र नाड़ी

जब हम बाएं नथुने से श्वास अंदर लेते हैं और दाहिने नथुने से श्वास बाहर छोड़ते हैं,
तो इसे चंद्रभेदी प्राणायाम कहा जाता है।

यह प्राणायाम गर्मी के मौसम में विशेष रूप से उपयोगी है।
जब वातावरण ठंडा हो या पंखा–कूलर बंद हो, तब इसे नहीं करना चाहिए।

यह शरीर को गर्मी से होने वाले सभी रोगों से बचाता है
इसे दिन में तीन बार — सुबह, दोपहर और शाम — किया जा सकता है।

चंद्रभेदी प्राणायाम करने की विधि

  1. किसी भी आसन में सुखपूर्वक बैठें।
  2. आपकी कमर, गर्दन और सिर एक सीध में हों।
  3. चेहरे और पेट की मांसपेशियों में खिंचाव नहीं होना चाहिए।
  4. अब प्राणायाम मुद्रा बनाएं —
    • तर्जनी और मध्यमा अंगुली को अंगूठे के पास रखें।
    • दाहिने हाथ का अंगूठा दाहिनी नासिका पर,
      और अनामिका व कनिष्ठा अंगुली बाईं नासिका पर रखें।
    • इस मुद्रा को नासिका मुद्रा भी कहते हैं।
  5. अब दाहिनी नासिका बंद रखकर बाईं नासिका से श्वास अंदर लें।
  6. फिर धीरे-धीरे दाहिनी नासिका से श्वास बाहर छोड़ें।
  7. इसी प्रकार अभ्यास को दोहराते रहें।
  8. अंत में आंखें बंद करके अवलोकन करें
    श्वास के प्रवाह को महसूस करें।

महत्वपूर्ण:
प्रत्येक प्राणायाम का वास्तविक लाभ तब मिलता है जब हम उसका अवलोकन (Observation) करते हैं।
जिस प्रकार बोतल का पुराना पानी निकालकर नया भरा जाता है,
उसी प्रकार श्वास को बाहर निकालकर नई ऊर्जा को अंदर लेना चाहिए।

सावधानियां

  • श्वास लेते समय नाक से आवाज नहीं आनी चाहिए।
  • हमेशा एक ही नासिका से श्वास अंदर और दूसरी से बाहर करें।
  • कमर व गर्दन सीधी रखें।
  • दाहिना हाथ कंधे के समानांतर उठा होना चाहिए।
  • नाक, नाभि की सीध में रहे।
  • प्राणायाम का समापन बाईं नासिका से श्वास अंदर लेते हुए करें।
  • यह प्राणायाम केवल गर्मी के मौसम में करें, सर्दियों में नहीं।

लाभ

  • उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी।
  • शरीर के नाड़ी तंत्र में शीतलता आती है।
  • मुंह के छाले, पेट के छाले, अधिक पसीना, अधिक गर्मी,
    नकसीर, पेट में जलन आदि समस्याओं में राहत देता है।

प्यारे मित्रों,
हमारे इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद।

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

Yogacharya Dhakaram
Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.