23-Feb-2026
घुटनों के दर्द के लिए जानू चक्र
योगाचार्य ढाकाराम
प्यारे मित्रों,
आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार।
“एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” आर्टिकल सीरीज़ में आप सभी का स्वागत है।
आज हम जानू चक्र के बारे में बात करेंगे।
घुटनों और पैरों को स्वस्थ रखने के लिए यह एक सर्वोत्तम क्रिया है।
इससे पहले हम गुल्फ नमन और गुल्फ चक्र के बारे में बात कर चुके हैं।
जानू चक्र क्रिया को आप कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं।
जानू चक्र का अर्थ
‘जानू’ का अर्थ होता है घुटना, और ‘चक्र’ का अर्थ होता है गोलाकार घूमना।
इस क्रिया में पैर के निचले हिस्से को घुटने से गोलाकार रूप में घुमाया जाता है।
जानू चक्र करने की विधि
- सबसे पहले दंडासन में बैठें। (दंडासन के बारे में हम पहले विस्तार से बता चुके हैं।)
- दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा रखें।
- अब अपने दाहिने पैर का घुटना मोड़ते हुए छाती से सटा लें।
- दोनों हाथों से घुटने के पीछे से पैर को मजबूती से पकड़ें।
- अब पैर को बाईं ओर से दाईं (दक्षिणावृत्त) दिशा में गोलाकार घुमाएँ।
- कमर को बिल्कुल सीधा रखें।
- तीन बार गोलाकार घुमाएँ।
- लगभग 1 मिनट का समय लगेगा।
- अब पैर को दाईं ओर से बाईं (वामावृत्त) दिशा में तीन बार घुमाएँ।
- प्रत्येक बार में 20 सेकंड का समय रखें।
- कुल 1 मिनट में यह भाग पूरा करें।
- अब यही प्रक्रिया बाएँ पैर से दोहराएँ —
- पहले वामावृत्त दिशा में, फिर दक्षिणावृत्त दिशा में।
- दोनों दिशाओं में बराबर बार करें।
- दोनों पैरों से क्रिया पूर्ण करने के बाद आंखें बंद करके शरीर का अवलोकन करें।
- क्रिया से पहले और बाद में पैरों में जो हल्कापन या परिवर्तन महसूस हो, उसे देखें।
समय:
- दायाँ पैर — 2 मिनट
- बायाँ पैर — 2 मिनट
- अवलोकन — 1 मिनट
👉 कुल समय: 5 मिनट
सावधानियाँ
- पैर घुमाते समय नितंब और जांघ स्थिर रहें।
- कमर सीधी रखें और घुटने को कसकर पकड़ें।
- क्रिया को धीरे-धीरे और नियंत्रित गति से करें।
- दक्षिणावृत्त और वामावृत्त दोनों समान संख्या में करें।
लाभ
- घुटनों के जोड़ मजबूत बनते हैं।
- टांगों की मांसपेशियाँ लचीली होती हैं।
- रक्त संचार में सुधार होता है।
- घुटनों के दर्द और अकड़न से प्राकृतिक राहत मिलती है।
तो प्यारे मित्रों,
आप सभी इस क्रिया को रोज अवश्य करें और अपने घुटनों को स्वस्थ बनाएँ।
सत-सत नमन।
योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक – योगापीस संस्थान
Yogacharya Dhakaram
Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.