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Author: Yogacharya Dhakaram

Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.

द्विपाद वृत्ताकार क्रिया: पेट-कमर की चर्बी पिघलाने का रामबाण उपाय

आप सभी का स्वागत है!

एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में हमारे साथ जुड़ने के लिए धन्यवाद। आज हम द्विपाद वृत्ताकार क्रिया के बारे में चर्चा करेंगे—एक ऐसी क्रिया जो पेट और कमर पर जमी अवांछित चर्बी को प्रभावी ढंग से कम करती है।

क्रिया करने की विधि

  1. प्रारंभिक स्थिति:
  • पीठ के बल लेट जाएँ।
  • कोहनियों को ज़मीन पर टिकाकर शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाएँ।
  • छाती को तानकर रखें।
  • कंधे और कोहनी 90° अंश पर हों तथा एक सीध में रहें।
  1. दक्षिणावृत्त (घड़ी की दिशा में):
  • दोनों पैरों को धीरे-धीरे दाईं ओर से उठाएँ।
  • बड़ा गोलाकार घुमाव बनाते हुए पैरों को clockwise घुमाएँ।
  • एक चक्र पूरा करने में 15-20 सेकंड लगाएँ।
  • थकान होने पर शवासन में विश्राम करें।
  1. वामावृत्त (घड़ी की विपरीत दिशा में):
  • अब पैरों को बाईं ओर से उठाएँ।
  • anti-clockwise दिशा में बड़ा गोला बनाएँ।
  • दक्षिणावृत्त के बराबर समय तक घुमाएँ।
  • दोनों दिशाओं में बराबर चक्र पूरे करने के बाद शवासन में आराम करें।

अवधि

  • सामान्य व्यक्ति:
    दक्षिणावृत्त + वामावृत्त के 4-6 चक्र (कुल 3 मिनट)।
  • वजन घटाने हेतु:
    प्रत्येक दिशा में 2 मिनट (कुल 4 मिनट)।

विशेष सावधानियाँ

  • कंधे और कोहनी हमेशा 90° अंश व एक सीध में रखें।
  • हथेलियाँ ज़मीन पर स्थिर टिकी हों, कोहनियाँ पास-पास रखें।
  • गर्दन पर दबाव न डालें। छाती फुलाकर रखें।
  • घुटने सीधे रहें।
  • न करें यदि:
  • गर्भावस्था या माहवारी चल रही हो।
  • सावधानी से करें:
  • गर्दन दर्द/सूजन हो तो पीठ के बल लेटकर करें।
  • पेट के अल्सर या कमर दर्द में एक पैर से अभ्यास करें।
  • क्रिया करने में जल्दबाज़ी न करें—शांत व सहज भाव से करें।

लाभ

  • पेट-कमर की चर्बी कम होती है।
  • पाचन तंत्र मजबूत होता है।
  • पेट की मांसपेशियों की प्राकृतिक मालिश।
  • नितंबों की चर्बी घटाने में सहायक।

“इस क्रिया का पूरा लाभ पाने के लिए कोहनियों के बल उठकर करें। लेटकर करने पर कमर पर तनाव पड़ता है, जिससे प्रभाव घट जाता है।”

आप सभी का हृदय से आभार। स्वस्थ रहें, मस्त रहें!
योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

जांघों और नितंबों की चर्बी कम करें

एक पाद वृत्ताकार क्रिया

आप सभी का हमारे विशेष कार्यक्रम “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” में हार्दिक स्वागत है। आशा है कि आप सभी मस्त और आनंदित होंगे। आज हम “एक पाद वृत्ताकार क्रिया” के बारे में जानेंगे। यह अभ्यास शरीर को लचीला बनाने और स्वास्थ्य लाभ देने में मदद करता है।

एक पाद वृत्ताकार क्रिया करने की विधि

  1. सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं
  2. अपने कोहनियों के ऊपर शरीर का भार रखें और छाती को ऊपर उठाएं
  3. पैर जमीन पर सीधे रखें और गर्दन विश्राम की अवस्था में रहे
  4. दोनों कोहनियों को एक-दूसरे के पास रखें ताकि छाती अच्छी तरह खुल जाए।
  5. दाएं पैर को ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे दक्षिणावृत (घड़ी की दिशा में) बड़ा गोला बनाएं। इसे 4 से 6 बार दोहराएं।
  6. दाएं पैर को नीचे रखकर, बाएं पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं
  7. अब दाएं पैर को ऊपर उठाएं और वामावृत्त (घड़ी की विपरीत दिशा में) बड़ा गोला बनाएं। इसे 4 से 6 बार दोहराएं।
  8. इसी प्रकार बाएं पैर से भी वामावृत्त क्रिया करें
  9. सभी क्रियाएं पूरी करने के बाद विश्राम करें। फिर बगल की तरफ करवट लेकर धीरे-धीरे बैठ जाएं
  10. एक गोला बनाने में कम से कम 15-20 सेकंड का समय लें

विशेष ध्यान दें:

  • जिन्हें कंधों या कमर में अधिक दर्द हो, वे यह क्रिया लेटकर भी कर सकते हैं
  • लेटकर करने पर हाथों को कमर के पास रखना चाहिए

एक पाद वृत्ताकार क्रिया के लाभ

  • जांघों और नितंबों की चर्बी कम करता है।
  • पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है।
  • मांसपेशियों को लचीला बनाता है।
  • कंधों और गर्दन की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद है।

सावधानियां

  • इस क्रिया को लेटकर न करें, बल्कि कोहनियों के बल करें
  • दक्षिणावृत और वामावृत्त घुमाव बराबर संख्या में करें
  • पैर गोलाकार घुमाते समय घुटनों को सीधा और खींचकर रखें
  • दोनों पैरों से समान संख्या में दक्षिणावृत और वामावृत्त घुमाव करना आवश्यक है।

आप सभी का बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद! स्वस्थ रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें। अपने जीवन को खूबसूरत बनाने के लिए रोज़ कम से कम 1 से 1.5 घंटे योग का अभ्यास अवश्य करें

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

पेट की चर्बी को पिघलाने और कमर को मजबूत बनाने के लिए द्विपाद वृत्ताकार क्रिया

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार! “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आपका स्वागत है। आज हम द्विपाद वृत्ताकार क्रिया के बारे में जानेंगे, जो हमारे पेट और कमर पर जमी चर्बी को पिघलाने में मदद करती है।

द्विपाद वृत्ताकार क्रिया कैसे करें

  1. सबसे पहले, पीठ के बल लेट जाएं।
  2. दोनों कोहनियों के बल अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाएं।
  3. छाती को तानकर रखें।
  4. आपका कंधा और कोहनी दोनों 90 डिग्री के कोण पर होने चाहिए।
  5. गर्दन में किसी प्रकार का तनाव न हो।
  6. अब दोनों पैरों को धीरे-धीरे उठाते हुए दाहिनी तरफ से बड़ा गोला बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।
  7. जब आप थक जाएं, तो शवासन में विश्राम करें। पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें।
  8. अब धीरे से कोहनियों के बल आएं और दोनों पैरों को धीरे-धीरे उठाते हुए बाईं तरफ से बड़ा गोला बनाते हुए वामावर्त (Anti-clockwise) घुमाएं।
  9. जितना आपने दक्षिणावर्त किया था, उतना ही वामावर्त करें।
  10. एक बार गोला बनाने में कम से कम 15 से 20 सेकंड लगना चाहिए
  11. जब आप थक जाएं और दोनों तरफ बराबर गोले बना लें, तो विश्राम करें। शवासन में लेट जाएं।
  12. पहले और बाद की अवस्थाओं के अंतर का अवलोकन करें। शवासन में पेट और कमर की मांसपेशियों को ढीला छोड़ दें।

महत्वपूर्ण बातें

  • कोहनियों के बल क्रिया करने से इसका प्रभाव पेट पर पड़ता है, न कि कमर पर।
  • एक सामान्य व्यक्ति को यह क्रिया कम से कम 4-6 बार दक्षिणावर्त और 4-6 बार वामावर्त करनी चाहिए, यानी लगभग 3 मिनट तक।
  • वजन कम करने वाले लोगों को 2 मिनट दक्षिणावर्त और 2 मिनट वामावर्त करना चाहिए।

सावधानियां

  • कंधा और कोहनी 90 डिग्री के कोण पर होने चाहिए।
  • कोहनियों को पास-पास रखने का प्रयास करें।
  • हथेलियों को जमीन पर टिका कर रखें।
  • गर्दन पर खिंचाव न हो।
  • छाती को हमेशा फुलाकर रखें।
  • घुटने सीधे रहने चाहिए।
  • गर्दन में दर्द, सूजन या अकड़न होने पर लेटकर करें।
  • जल्दबाजी न करें, शांत और सहज भाव से करें।
  • गर्भावस्था या मासिक धर्म के दौरान न करें।
  • पेट में अल्सर या कमर में दर्द होने पर एक पैर से करें।

लाभ

  • पेट और कमर की चर्बी पिघलती है।
  • पाचन तंत्र मजबूत होता है।
  • पेट की मांसपेशियों की मालिश होती है।
  • नितंब की चर्बी कम होती है।
  • जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

आप सभी का बहुत-बहुत आभार। आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें।

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

घृत नेति क्रिया: लाभ और विधि

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। ‘एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर’ कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। पिछली बार हमने रबर नेति के बारे में सीखा था। आज हम घृत नेति क्रिया के लाभ और विधि पर चर्चा करेंगे।

जब हमने जल नेति क्रिया और सूत्र नेति क्रिया की थी, तब हमने जाना कि इससे नासिका में शुष्कता उत्पन्न होती है। इसलिए जल नेति और सूत्र नेति के बाद घृत नेति करना आवश्यक होता है। घृत नेति से हमारी नासिका में चिकनाहट बनी रहती है और इससे श्वसन तंत्र को कई लाभ होते हैं।

घृत नेति क्या है?

घृत का अर्थ होता है घी। इस क्रिया में हम गाय का घी या बादाम का तेल नासिका छिद्रों में डालते हैं।

  • घी हमेशा देसी गाय का ही होना चाहिए।
  • जिन्हें सिर दर्द या माइग्रेन रहता है, वे रात्रि में बादाम का तेल या घी नासिका छिद्रों में डालकर सो सकते हैं।
  • इससे नासिका छिद्र खुलते हैं और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक जाती है।

घृत नेति करने की विधि

  1. शवासन में लेट जाएं।
  2. गर्दन के नीचे तकिया या चादर को गोल करके रखें, जिससे नासिका छिद्र ऊपर की ओर हो जाए।
  3. नासिका छिद्र में 2 से 3 बूंद घी डालें।
  4. 2 बूंद घी नासिका के बाहर डालें, जिससे साइनस बिंदुओं की मालिश कर सकें।
  5. श्वास को थोड़ा तेजी से लें, ताकि घी का प्रवाह नासिका द्वार से गले तक हो सके।
  1. हल्के हाथों से नासिका के आसपास के साइनस क्षेत्र में मालिश करें:
    • नासिका छिद्र के बाहरी साइनस बिंदु पर 10-15 बार मालिश करें।
    • नासिका की हड्डी के दोनों ओर मालिश करें।
    • आंखों के अंदरूनी किनारों पर मालिश करें।
  1. गालों की हड्डी पर स्थित साइनस क्षेत्र पर मालिश करें।
  2. भौहों के ऊपर हल्की मालिश करें।
  3. मालिश के बाद 2-3 मिनट विश्राम करें।

घृत नेति के लाभ

✅ नासिका छिद्रों को खोलने में सहायक

ENT (कान, नाक, गला) के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक।

साइनस की समस्या में राहत देता है।

आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक।

आप सभी का धन्यवाद एवं आभार। आपका दिन मंगलमय हो!

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

आंखों की शक्ति बढ़ाने के लिए नेत्र शक्ति विकासक क्रिया: स्वास्थ्य और आनंद की ओर एक कदम

सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार! प्यारे दोस्तों, एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। पिछली बार हमने जल नेति क्रिया पर चर्चा की थी। आज हम बात करेंगे नेत्र शक्ति विकासक क्रिया के बारे में, जो आंखों की शक्ति बढ़ाने के लिए अत्यंत लाभकारी है।

क्रिया कैसे करें:

  • शुरुआती स्थिति: सीधे बैठें। दाहिना हाथ ऊपर की ओर और बायां हाथ नीचे की ओर रखें।
  • दृष्टि केंद्रित करें: जब “एक” बोलें तो दाहिनी हाथ की अंगूठी को देखें।
  • नीचे देखें: जब “दो” बोलें तो नीचे की ओर देखें।
  • दोहराएं: इस क्रिया को 15 सेकंड तक दोहराएं।
  • विराम: 15 सेकंड के बाद आधा मिनट तक आंखें बंद करके आराम करें।
  • पोजीशन बदलें: अब बायां हाथ ऊपर की ओर और दाहिना हाथ नीचे की ओर रखें।
  • दोहराएं: इस क्रिया को भी 15 सेकंड तक दोहराएं।
  • विराम: फिर से आधा मिनट तक आंखें बंद करके आराम करें।
  • पूरा चक्र: इस पूरे चक्र को छह बार दोहराएं।

लाभ:

  • आंखों की रोशनी बढ़ाता है।
  • आंखों में ताकत बढ़ाता है।
  • आंखों की थकान दूर करता है।

नोट:

  • इस क्रिया को रोजाना करने से अधिक लाभ मिलता है।
  • इस क्रिया को कहीं भी किया जा सकता है।
  • आरामदायक स्थिति में बैठकर इस क्रिया को करें।

इस क्रिया को नियमित रूप से करने से आपकी आंखें स्वस्थ रहेंगी और आप इस खूबसूरत दुनिया को खूबसूरत आंखों से देख सकेंगे।

इसी के साथ आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी का दिन शुभ रहे, मंगल में रहें और आनंदित रहे।

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगा पीस संस्थान

पाँच प्रमुख योग आसनों से अपने जीवन को बदलें

हरि ओम आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमन। आप सब कैसे हैं? बहुत अच्छे होंगे, एकदम स्वस्थ और आनंद से भरे हुए होंगे। इस कार्यक्रम में आपका मुस्कुराता हुआ स्वागत है, प्यारे मित्रों।

आज हम बात करेंगे उन पांच आसनों पर जो हमें नियमित करना ही चाहिए। हमें ऐसा लगता है कि ये पांच आसन हमारे पूरे शरीर को, सिर से पैर तक, स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त हैं।

आपको समझना होगा कि ये आसन क्यों महत्वपूर्ण हैं। जब तक हम उस विधि को नहीं समझेंगे, तब तक हम उसको दिल से नहीं करेंगे। मैं कहता हूं कि इन आसनों के साथ हम सिर्फ योग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने जीवन को बदल रहे हैं।

आपको मालूम है कि जब हम योगासन करते हैं तो हमारे लिए क्या मायना रखता है? दो आसन हमारे पैरों के लिए हैं, और दो आसन हमारे स्पाइन के लिए हैं।

हमने पहले एक वीडियो बनाया था कि पैदल चलना अपने आप में पूर्ण व्यायाम नहीं है। उस समय हमने आपसे चर्चा की थी कि पांच आसनों का क्या सीक्वेंस होना चाहिए। उसी चीजों को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको बता रहे हैं कि पांच आसन क्या हैं।

  • ताड़ासन: इससे हमारा स्पाइन में स्ट्रेच आता है। ताड़ासन के फायदे आप बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। हमारे YouTube चैनल पर ताड़ासन के बारे में एक पूरा वीडियो है।
  • कोणासन: इससे हमारा स्पाइन दाई और बाई तरफ मोड़ जाता है। इस आसन के फायदे बहुत हैं।
  • कटि चक्रासन: यह एक ट्विस्टिंग पोज है।
  • अर्ध चक्रासन: यह एक बैक बेंडिंग पोज है।
  • उत्तानासन: यह एक फ्रंट बेंडिंग पोज है।

इन आसनों को एक बार हम साथ में करके देखेंगे। उसके बाद आपको इन आसनों के बारे में बहुत गहराई से जानना है। हम आपको बताएंगे कि इन आसनों को कैसे करना चाहिए और इनको करने के लिए कितना समय चाहिए।

इन पांच आसनों के माध्यम से आप अपने शरीर को शुद्धिकरण कर सकते हैं और अपने स्पाइन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

अब, हम ताड़ासन करेंगे।

  • हम समस्थिति में खड़े हो जाएंगे अपने अपने स्थान पर।
  • ताड़ासन के लिए पैरों को मिलाएंगे, थोड़ा सा पीछे से खुला हुआ रखेंगे, हथेलियां जांघों के ऊपर रखेंगे।
  • धीरे-धीरे अपने हाथों को बगल से उठाएंगे और रोल ओवर शोल्डर करेंगे। दाहिना हाथ दाहिनी तरफ खींचेंगे, बाया हाथ बाई तरफ खींचेंगे। अपनी क्षमता के अनुसार अधिकतम स्ट्रेच करें।
  • फिर धीरे-धीरे अपने हाथों को ऊपर ले जाएंगे, हथेलियां आपस में मिलाएंगे, और छत की तरफ हाथों को पूरा ऊपर तानेंगे।
  • वहीं स्ट्रेचिंग करते हुए अपने बटक्स को टाइट करेंगे, घुटने की मांसपेशियों को टाइट करेंगे, जांघों को टाइट करेंगे, पेट की मांसपेशियों को भी टाइट करेंगे।
  • छाती को फुला दें और स्पाइन को स्ट्रेच करें।

यह आसन हमारे रीढ़ की हड्डी, हाथों, पैरों, फेफड़ों और हृदय के लिए बहुत फायदेमंद है। आप इस आसन को नियमित रूप से अभ्यास कर सकते हैं।

अब, हम कोणासन करेंगे।

  • खड़े हो जाएं और अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई के बराबर रखें।
  • अपने हाथों को ऊपर उठाएं और उन्हें अपने सिर के ऊपर से जोड़ें।
  • अपने शरीर को दाईं ओर झुकाएं, अपने दाहिने हाथ को अपने दाहिने पैर के ऊपर रखें और बाएं हाथ को ऊपर उठाएं।
  • अपनी दाहिनी तरफ स्ट्रेच करें और फिर बाएं तरफ भी यही प्रक्रिया दोहराएं।

अब, हम कटि चक्रासन करेंगे।

  • कटि चक्रासन के लिए पैरों में कंधे जितना फासला रखेंगे, हाथों को बगल से उठाएंगे, और फिर अपने शरीर को दाहिनी तरफ ले जाएंगे। दाहिने हाथ को पीछे से लाकर अपने नाभी को छूने की कोशिश करेंगे।
  • बाया हाथ को राइट शोल्डर पर रखेंगे और ज्यादा से ज्यादा ट्विस्ट करेंगे।
  • फिर रिलैक्स करेंगे और इसी तरह से बाएं तरफ भी ट्विस्ट करेंगे।

अब, हम अर्ध चक्रासन करेंगे।

  • अर्ध चक्रासन के लिए अपने हाथों को कमर पर रखें
  • अब अपनी छाती को फुलाइए तथा धीरे-धीरे पीछे की ओर जाइए
  • अपनी क्षमता के अनुसार अपने शरीर को अधिक से अधिक पीछे की ओर मोड़िए
  • अंत में धीरे-धीरे वापस आइए तथा शरीर को सीधा कर लीजिए

अब, हम उत्तानासन करेंगे।

  • खड़े हो जाएं और अपने पैरों को एक साथ रखें।
  • अपने हाथों को ऊपर उठाएं और फिर धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते जाएं।
  • अपने हाथों से अपने टखनों को पकड़ने की कोशिश करें।

ये पांच आसन आपके जीवन में बहुत उपयोगी हैं। ये आसन आपके मस्तिष्क के लिए भी बहुत अच्छे हैं।

अब आप इन आसनों को नियमित रूप से अभ्यास करें और अपने जीवन को बदलें।

पीछे झुकने का वैज्ञानिक तरीका

हरि ओम प्यारे मित्रों!

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। आज हम चर्चा करेंगे पीछे कैसे झुके।

गलत तरीके से पीछे झुकने से क्या होता है?

  • कमर में दर्द हो सकता है
  • शरीर की संरचना बिगड़ सकती है

सही तरीके से पीछे झुकने के फायदे:

  • मेरुदंड के लिए बहुत अच्छा
  • फेफड़ों और हृदय के लिए फायदेमंद

पीछे झुकने का तरीका:

  • अर्द्ध चक्रासन:
    1. अपने हाथों को नितंबों पर रखते हुए नितंबों को नीचे दबाएं और छाती को बाहर निकालें।
    2. आंखें बंद करके सांस लेते हुए छाती को ज्यादा से ज्यादा फुलाएं।
    3. गर्दन को तनाव मुक्त रखें।
    4. ध्यान कंधों और छाती की मांसपेशियों पर केंद्रित करें।
    5. आंखों को बिना खोले धीरे-धीरे हाथों को नीचे लाएं।
    6. आंखें बंद करके शरीर में होने वाले परिवर्तन को महसूस करें।
    7. ध्यान कंधों और छाती की मांसपेशियों पर केंद्रित करें।
    8. पीछे झुकने के लिए जल्दबाजी न करें।
    9. रोजाना अभ्यास से अच्छा परिणाम मिलेगा।
  • दूसरा तरीका:
    1. हाथों को कमर के पीछे ले जाकर उंगलियों को आपस में फंसाकर कैंची बना लें।
    2. छाती को आगे की ओर ज्यादा से ज्यादा फुलाएं और गर्दन को पीछे रखें।
    3. इस स्थिति में कम से कम एक से दो मिनट रुकने का प्रयास करें।
    4. जब रुकना मुश्किल हो जाए तो धीरे-धीरे आसन से वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।
    5. आंखें बंद करके शरीर में होने वाले परिवर्तन को महसूस करें।
    6. आंखें बंद करके आसन करने से मन में शांति और आनंद की अनुभूति होगी।
    7. कंधे और गर्दन में जकड़न या दर्द होने पर यह बहुत महत्वपूर्ण है।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • आगे झुकते समय कूल्हों के जोड़ से झुकें, पीठ सीधी रखें।
  • अर्ध चक्रासन करते समय छाती को फुलाते हुए ऊपरी भाग से पीछे झुकें।
  • मेरुदंड की कशेरुकाओं को धीरे-धीरे मोड़ें।

लाभ:

  • छाती, फेफड़ों और हृदय के लिए फायदेमंद
  • मेरुदंड को लचीला बनाता है
  • कंधों और गर्दन की मांसपेशियों के लिए लाभदायक

अन्य जानकारी के लिए:

www.dhakaram.com

योगाचार्य ढाका राम

संस्थापक

योगापीस संस्थान

Universal Prayer – Shiva Shiva

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आ.ओ..
शिव ..
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शिव शिव
शिव शंभू….ooo
जय जय शंभू..ooo
हर हर महादेव..
शिव शिव
शिव शिव शंभू..oo
शिव शिव
शिव शिव शंभू..oo
शिव शिव
जय जय शिव
शिव शिव
जय जय शिव
शिव शिव
जय जय शिव
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जय जय शिव
शिव शिव
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जय जय शिव


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नारायण नारायण नारायण
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नारायण नारायण नारायण
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जीसस जीसस जय जय जीसस
जीसस जीसस जय जय जीसस
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नारायण नारायण नारायण
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जीसस जीसस जय जय जीसस
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नारायण नारायण नारायण
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अल्लाह हू अल्लाह जय जय जय अल्लाह,अल्लाह हू अल्लाह जय जय जय अल्लाह
and we pray अल्लाह
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नारायण नारायण नारायण
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नारायण नारायण नारायण
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बुद्धा नारायण, महावीर नारायण, साई नारायण, नानक नारायण, देवी नारायण
नारायण नारायण नारायण
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बुद्धा नारायण, महावीर नारायण, साई नारायण, नानक नारायण, देवी नारायण
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एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर: ध्यान कैसे करें?

प्यारे मित्रों आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

आज हम एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में ध्यान के बारे में बात करेंगे।

कई लोग सोचते हैं कि ध्यान करना बहुत मुश्किल है। मैं कहता हूं कि यह मुश्किल नहीं, बस थोड़ा अभ्यास की बात है।

ध्यान का मतलब है वर्तमान में रहना। भूतकाल या भविष्य के बारे में नहीं सोचना। यह आसान लगता है, लेकिन हमारा मन हमेशा इधर-उधर भटकता रहता है।

आज मैं आपको एक ऐसी तकनीक बताऊंगा जिससे ध्यान करना आसान हो जाएगा।

1. विचारों को आने जाने दें:

जब आप ध्यान करते हैं, तो आपके मन में तरह-तरह के विचार आते रहेंगे। अच्छे विचार भी, बुरे विचार भी।

इन विचारों पर ध्यान न दें। उन्हें आने दें और जाने दें। उन्हें केवल एक दृष्टा भाव से देखें।

2. एकाग्रता:

अपनी एकाग्रता को अपनी सांसों पर केंद्रित करें। अपनी सांसों को अंदर और बाहर आते हुए महसूस करें।

3. शांत रहें:

ध्यान करते समय शांत रहना बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपका मन भटकता है, तो उसे धीरे से वापस अपनी सांसों पर लाएं।

4. अभ्यास:

ध्यान एक अभ्यास है। शुरुआत में आपको मुश्किल हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे आपका मन शांत होने लगेगा।

कैसे बैठें:

  • किसी भी आसान में बैठें, जैसे पद्मासन, सुखासन, सिद्धासन या वज्रासन।
  • कमर और गर्दन सीधी रखें।
  • छाती फूली हुई हो।
  • पेट की मांसपेशियां शिथिल हों।
  • आंखें बंद करें।

कहां ध्यान करें:

  • आप कहीं भी ध्यान कर सकते हैं, जैसे घर, ऑफिस, यात्रा में।
  • शांत जगह चुनें।

कितने समय तक ध्यान करें:

  • शुरुआत में 5-10 मिनट तक ध्यान करें।
  • धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

ध्यान के लाभ:

  • तनाव कम करता है।
  • एकाग्रता बढ़ाता है।
  • मन को शांत करता है।
  • स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।

इसी के साथ आप सभी का बहुत-बहुत आभार आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहे। आप सभी को नमन।

अधिक जानकारी के लिए:

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान