Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.
एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में हमारे साथ जुड़ने के लिए धन्यवाद। आज हम द्विपाद वृत्ताकार क्रिया के बारे में चर्चा करेंगे—एक ऐसी क्रिया जो पेट और कमर पर जमी अवांछित चर्बी को प्रभावी ढंग से कम करती है।
क्रिया करने की विधि
प्रारंभिक स्थिति:
पीठ के बल लेट जाएँ।
कोहनियों को ज़मीन पर टिकाकर शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाएँ।
छाती को तानकर रखें।
कंधे और कोहनी 90° अंश पर हों तथा एक सीध में रहें।
दक्षिणावृत्त (घड़ी की दिशा में):
दोनों पैरों को धीरे-धीरे दाईं ओर से उठाएँ।
बड़ा गोलाकार घुमाव बनाते हुए पैरों को clockwise घुमाएँ।
एक चक्र पूरा करने में 15-20 सेकंड लगाएँ।
थकान होने पर शवासन में विश्राम करें।
वामावृत्त (घड़ी की विपरीत दिशा में):
अब पैरों को बाईं ओर से उठाएँ।
anti-clockwise दिशा में बड़ा गोला बनाएँ।
दक्षिणावृत्त के बराबर समय तक घुमाएँ।
दोनों दिशाओं में बराबर चक्र पूरे करने के बाद शवासन में आराम करें।
अवधि
सामान्य व्यक्ति: दक्षिणावृत्त + वामावृत्त के 4-6 चक्र (कुल 3 मिनट)।
वजन घटाने हेतु: प्रत्येक दिशा में 2 मिनट (कुल 4 मिनट)।
विशेष सावधानियाँ
कंधे और कोहनी हमेशा 90° अंश व एक सीध में रखें।
हथेलियाँ ज़मीन पर स्थिर टिकी हों, कोहनियाँ पास-पास रखें।
गर्दन पर दबाव न डालें। छाती फुलाकर रखें।
घुटने सीधे रहें।
न करें यदि:
गर्भावस्था या माहवारी चल रही हो।
सावधानी से करें:
गर्दन दर्द/सूजन हो तो पीठ के बल लेटकर करें।
पेट के अल्सर या कमर दर्द में एक पैर से अभ्यास करें।
क्रिया करने में जल्दबाज़ी न करें—शांत व सहज भाव से करें।
लाभ
पेट-कमर की चर्बी कम होती है।
पाचन तंत्र मजबूत होता है।
पेट की मांसपेशियों की प्राकृतिक मालिश।
नितंबों की चर्बी घटाने में सहायक।
“इस क्रिया का पूरा लाभ पाने के लिए कोहनियों के बल उठकर करें। लेटकर करने पर कमर पर तनाव पड़ता है, जिससे प्रभाव घट जाता है।”
आप सभी का हृदय से आभार। स्वस्थ रहें, मस्त रहें! योगाचार्य ढाका राम संस्थापक, योगापीस संस्थान
आप सभी का हमारे विशेष कार्यक्रम “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” में हार्दिक स्वागत है। आशा है कि आप सभी मस्त और आनंदित होंगे। आज हम “एक पाद वृत्ताकार क्रिया” के बारे में जानेंगे। यह अभ्यास शरीर को लचीला बनाने और स्वास्थ्य लाभ देने में मदद करता है।
एक पाद वृत्ताकार क्रिया करने की विधि
सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं।
अपने कोहनियों के ऊपर शरीर का भार रखें और छाती को ऊपर उठाएं।
पैर जमीन पर सीधे रखें और गर्दन विश्राम की अवस्था में रहे।
दोनों कोहनियों को एक-दूसरे के पास रखें ताकि छाती अच्छी तरह खुल जाए।
दाएं पैर को ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे दक्षिणावृत (घड़ी की दिशा में) बड़ा गोला बनाएं। इसे 4 से 6 बार दोहराएं।
दाएं पैर को नीचे रखकर, बाएं पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं।
अब दाएं पैर को ऊपर उठाएं और वामावृत्त (घड़ी की विपरीत दिशा में) बड़ा गोला बनाएं। इसे 4 से 6 बार दोहराएं।
इसी प्रकार बाएं पैर से भी वामावृत्त क्रिया करें।
सभी क्रियाएं पूरी करने के बाद विश्राम करें। फिर बगल की तरफ करवट लेकर धीरे-धीरे बैठ जाएं।
एक गोला बनाने में कम से कम 15-20 सेकंड का समय लें।
विशेष ध्यान दें:
जिन्हें कंधों या कमर में अधिक दर्द हो, वे यह क्रिया लेटकर भी कर सकते हैं।
लेटकर करने पर हाथों को कमर के पास रखना चाहिए।
एक पाद वृत्ताकार क्रिया के लाभ
जांघों और नितंबों की चर्बी कम करता है।
पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है।
मांसपेशियों को लचीला बनाता है।
कंधों और गर्दन की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद है।
सावधानियां
इस क्रिया को लेटकर न करें, बल्कि कोहनियों के बल करें।
दक्षिणावृत और वामावृत्त घुमाव बराबर संख्या में करें।
पैर गोलाकार घुमाते समय घुटनों को सीधा और खींचकर रखें।
दोनों पैरों से समान संख्या में दक्षिणावृत और वामावृत्त घुमाव करना आवश्यक है।
आप सभी का बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद! स्वस्थ रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें। अपने जीवन को खूबसूरत बनाने के लिए रोज़ कम से कम 1 से 1.5 घंटे योग का अभ्यास अवश्य करें।
आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार! “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आपका स्वागत है। आज हम द्विपाद वृत्ताकार क्रिया के बारे में जानेंगे, जो हमारे पेट और कमर पर जमी चर्बी को पिघलाने में मदद करती है।
द्विपाद वृत्ताकार क्रिया कैसे करें
सबसे पहले, पीठ के बल लेट जाएं।
दोनों कोहनियों के बल अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाएं।
छाती को तानकर रखें।
आपका कंधा और कोहनी दोनों 90 डिग्री के कोण पर होने चाहिए।
गर्दन में किसी प्रकार का तनाव न हो।
अब दोनों पैरों को धीरे-धीरे उठाते हुए दाहिनी तरफ से बड़ा गोला बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।
जब आप थक जाएं, तो शवासन में विश्राम करें। पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें।
अब धीरे से कोहनियों के बल आएं और दोनों पैरों को धीरे-धीरे उठाते हुए बाईं तरफ से बड़ा गोला बनाते हुए वामावर्त (Anti-clockwise) घुमाएं।
जितना आपने दक्षिणावर्त किया था, उतना ही वामावर्त करें।
एक बार गोला बनाने में कम से कम 15 से 20 सेकंड लगना चाहिए
जब आप थक जाएं और दोनों तरफ बराबर गोले बना लें, तो विश्राम करें। शवासन में लेट जाएं।
पहले और बाद की अवस्थाओं के अंतर का अवलोकन करें। शवासन में पेट और कमर की मांसपेशियों को ढीला छोड़ दें।
महत्वपूर्ण बातें
कोहनियों के बल क्रिया करने से इसका प्रभाव पेट पर पड़ता है, न कि कमर पर।
एक सामान्य व्यक्ति को यह क्रिया कम से कम 4-6 बार दक्षिणावर्त और 4-6 बार वामावर्त करनी चाहिए, यानी लगभग 3 मिनट तक।
वजन कम करने वाले लोगों को 2 मिनट दक्षिणावर्त और 2 मिनट वामावर्त करना चाहिए।
सावधानियां
कंधा और कोहनी 90 डिग्री के कोण पर होने चाहिए।
कोहनियों को पास-पास रखने का प्रयास करें।
हथेलियों को जमीन पर टिका कर रखें।
गर्दन पर खिंचाव न हो।
छाती को हमेशा फुलाकर रखें।
घुटने सीधे रहने चाहिए।
गर्दन में दर्द, सूजन या अकड़न होने पर लेटकर करें।
जल्दबाजी न करें, शांत और सहज भाव से करें।
गर्भावस्था या मासिक धर्म के दौरान न करें।
पेट में अल्सर या कमर में दर्द होने पर एक पैर से करें।
लाभ
पेट और कमर की चर्बी पिघलती है।
पाचन तंत्र मजबूत होता है।
पेट की मांसपेशियों की मालिश होती है।
नितंब की चर्बी कम होती है।
जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
आप सभी का बहुत-बहुत आभार। आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें।
आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। ‘एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर’ कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। पिछली बार हमने रबर नेति के बारे में सीखा था। आज हम घृत नेति क्रिया के लाभ और विधि पर चर्चा करेंगे।
जब हमने जल नेति क्रिया और सूत्र नेति क्रिया की थी, तब हमने जाना कि इससे नासिका में शुष्कता उत्पन्न होती है। इसलिए जल नेति और सूत्र नेति के बाद घृत नेति करना आवश्यक होता है। घृत नेति से हमारी नासिका में चिकनाहट बनी रहती है और इससे श्वसन तंत्र को कई लाभ होते हैं।
घृत नेति क्या है?
घृत का अर्थ होता है घी। इस क्रिया में हम गाय का घी या बादाम का तेल नासिका छिद्रों में डालते हैं।
घी हमेशा देसीगाय का ही होना चाहिए।
जिन्हें सिर दर्द या माइग्रेन रहता है, वे रात्रि में बादाम का तेल या घी नासिका छिद्रों में डालकर सो सकते हैं।
इससे नासिका छिद्र खुलते हैं और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक जाती है।
घृत नेति करने की विधि
शवासन में लेट जाएं।
गर्दन के नीचे तकिया या चादर को गोल करके रखें, जिससे नासिका छिद्र ऊपर की ओर हो जाए।
नासिका छिद्र में 2 से 3 बूंद घी डालें।
2 बूंद घी नासिका के बाहर डालें, जिससे साइनस बिंदुओं की मालिश कर सकें।
श्वास को थोड़ा तेजी से लें, ताकि घी का प्रवाह नासिका द्वार से गले तक हो सके।
हल्के हाथों से नासिका के आसपास के साइनस क्षेत्र में मालिश करें:
नासिका छिद्र के बाहरी साइनस बिंदु पर 10-15 बार मालिश करें।
नासिका की हड्डी के दोनों ओर मालिश करें।
आंखों के अंदरूनी किनारों पर मालिश करें।
गालों की हड्डी पर स्थित साइनस क्षेत्र पर मालिश करें।
भौहों के ऊपर हल्की मालिश करें।
मालिश के बाद 2-3 मिनट विश्राम करें।
घृत नेति के लाभ
✅ नासिका छिद्रों को खोलने में सहायक।
✅ ENT (कान, नाक, गला) के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक।
सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार! प्यारे दोस्तों, एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। पिछली बार हमने जल नेति क्रिया पर चर्चा की थी। आज हम बात करेंगे नेत्र शक्ति विकासक क्रिया के बारे में, जो आंखों की शक्ति बढ़ाने के लिए अत्यंत लाभकारी है।
क्रिया कैसे करें:
शुरुआती स्थिति: सीधे बैठें। दाहिना हाथ ऊपर की ओर और बायां हाथ नीचे की ओर रखें।
दृष्टि केंद्रित करें: जब “एक” बोलें तो दाहिनी हाथ की अंगूठी को देखें।
नीचे देखें: जब “दो” बोलें तो नीचे की ओर देखें।
दोहराएं: इस क्रिया को 15 सेकंड तक दोहराएं।
विराम: 15 सेकंड के बाद आधा मिनट तक आंखें बंद करके आराम करें।
पोजीशन बदलें: अब बायां हाथ ऊपर की ओर और दाहिना हाथ नीचे की ओर रखें।
दोहराएं: इस क्रिया को भी 15 सेकंड तक दोहराएं।
विराम: फिर से आधा मिनट तक आंखें बंद करके आराम करें।
पूरा चक्र: इस पूरे चक्र को छह बार दोहराएं।
लाभ:
आंखों की रोशनी बढ़ाता है।
आंखों में ताकत बढ़ाता है।
आंखों की थकान दूर करता है।
नोट:
इस क्रिया को रोजाना करने से अधिक लाभ मिलता है।
इस क्रिया को कहीं भी किया जा सकता है।
आरामदायक स्थिति में बैठकर इस क्रिया को करें।
इस क्रिया को नियमित रूप से करने से आपकी आंखें स्वस्थ रहेंगी और आप इस खूबसूरत दुनिया को खूबसूरत आंखों से देख सकेंगे।
इसी के साथ आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी का दिन शुभ रहे, मंगल में रहें और आनंदित रहे।
हरि ओम आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमन। आप सब कैसे हैं? बहुत अच्छे होंगे, एकदम स्वस्थ और आनंद से भरे हुए होंगे। इस कार्यक्रम में आपका मुस्कुराता हुआ स्वागत है, प्यारे मित्रों।
आज हम बात करेंगे उन पांच आसनोंपर जो हमें नियमित करना ही चाहिए। हमें ऐसा लगता है कि ये पांच आसन हमारे पूरे शरीर को, सिर से पैर तक, स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त हैं।
आपको समझना होगा कि ये आसन क्यों महत्वपूर्ण हैं। जब तक हम उस विधि को नहीं समझेंगे, तब तक हम उसको दिल से नहीं करेंगे। मैं कहता हूं कि इन आसनों के साथ हम सिर्फ योग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने जीवन को बदल रहे हैं।
आपको मालूम है कि जब हम योगासन करते हैं तो हमारे लिए क्या मायना रखता है? दो आसन हमारे पैरों के लिए हैं, और दो आसन हमारे स्पाइन के लिए हैं।
हमने पहले एक वीडियो बनाया था कि पैदल चलना अपने आप में पूर्ण व्यायाम नहीं है। उस समय हमने आपसे चर्चा की थी कि पांच आसनों का क्या सीक्वेंस होना चाहिए। उसी चीजों को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको बता रहे हैं कि पांच आसन क्या हैं।
ताड़ासन: इससे हमारा स्पाइन में स्ट्रेच आता है। ताड़ासन के फायदे आप बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। हमारे YouTube चैनल पर ताड़ासन के बारे में एक पूरा वीडियो है।
कोणासन: इससे हमारा स्पाइन दाई और बाई तरफ मोड़ जाता है। इस आसन के फायदे बहुत हैं।
कटि चक्रासन: यह एक ट्विस्टिंग पोज है।
अर्ध चक्रासन: यह एक बैक बेंडिंग पोज है।
उत्तानासन: यह एक फ्रंट बेंडिंग पोज है।
इन आसनों को एक बार हम साथ में करके देखेंगे। उसके बाद आपको इन आसनों के बारे में बहुत गहराई से जानना है। हम आपको बताएंगे कि इन आसनों को कैसे करना चाहिए और इनको करने के लिए कितना समय चाहिए।
इन पांच आसनों के माध्यम से आप अपने शरीर को शुद्धिकरण कर सकते हैं और अपने स्पाइन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
अब, हम ताड़ासन करेंगे।
हम समस्थिति में खड़े हो जाएंगे अपने अपने स्थान पर।
ताड़ासन के लिए पैरों को मिलाएंगे, थोड़ा सा पीछे से खुला हुआ रखेंगे, हथेलियां जांघों के ऊपर रखेंगे।
धीरे-धीरे अपने हाथों को बगल से उठाएंगे और रोल ओवर शोल्डर करेंगे। दाहिना हाथ दाहिनी तरफ खींचेंगे, बाया हाथ बाई तरफ खींचेंगे। अपनी क्षमता के अनुसार अधिकतम स्ट्रेच करें।
फिर धीरे-धीरे अपने हाथों को ऊपर ले जाएंगे, हथेलियां आपस में मिलाएंगे, और छत की तरफ हाथों को पूरा ऊपर तानेंगे।
वहीं स्ट्रेचिंग करते हुए अपने बटक्स को टाइट करेंगे, घुटने की मांसपेशियों को टाइट करेंगे, जांघों को टाइट करेंगे, पेट की मांसपेशियों को भी टाइट करेंगे।
छाती को फुला दें और स्पाइन को स्ट्रेच करें।
यह आसन हमारे रीढ़ की हड्डी, हाथों, पैरों, फेफड़ों और हृदय के लिए बहुत फायदेमंद है। आप इस आसन को नियमित रूप से अभ्यास कर सकते हैं।
अब, हम कोणासन करेंगे।
खड़े हो जाएं और अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई के बराबर रखें।
अपने हाथों को ऊपर उठाएं और उन्हें अपने सिर के ऊपर से जोड़ें।
अपने शरीर को दाईं ओर झुकाएं, अपने दाहिने हाथ को अपने दाहिने पैर के ऊपर रखें और बाएं हाथ को ऊपर उठाएं।
अपनी दाहिनी तरफ स्ट्रेच करें और फिर बाएं तरफ भी यही प्रक्रिया दोहराएं।
अब, हम कटि चक्रासन करेंगे।
कटि चक्रासन के लिए पैरों में कंधे जितना फासला रखेंगे, हाथों को बगल से उठाएंगे, और फिर अपने शरीर को दाहिनी तरफ ले जाएंगे। दाहिने हाथ को पीछे से लाकर अपने नाभी को छूने की कोशिश करेंगे।
बाया हाथ को राइट शोल्डर पर रखेंगे और ज्यादा से ज्यादा ट्विस्ट करेंगे।
फिर रिलैक्स करेंगे और इसी तरह से बाएं तरफ भी ट्विस्ट करेंगे।
अब, हम अर्ध चक्रासन करेंगे।
अर्ध चक्रासन के लिए अपने हाथों को कमर पर रखें
अब अपनी छाती को फुलाइए तथा धीरे-धीरे पीछे की ओर जाइए
अपनी क्षमता के अनुसार अपने शरीर को अधिक से अधिक पीछे की ओर मोड़िए
अंत में धीरे-धीरे वापस आइए तथा शरीर को सीधा कर लीजिए
अब, हम उत्तानासन करेंगे।
खड़े हो जाएं और अपने पैरों को एक साथ रखें।
अपने हाथों को ऊपर उठाएं और फिर धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते जाएं।
अपने हाथों से अपने टखनों को पकड़ने की कोशिश करें।
ये पांच आसन आपके जीवन में बहुत उपयोगी हैं। ये आसन आपके मस्तिष्क के लिए भी बहुत अच्छे हैं।
अब आप इन आसनों को नियमित रूप से अभ्यास करें और अपने जीवन को बदलें।
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