उषा पान – पेट की बीमारियों का समाधान (भाग 1)
प्यारे मित्रों,
आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
आप सभी कैसे हैं?
मुझे विश्वास है कि आप सभी अच्छे हैं — विशेषकर यदि आप नियमित रूप से योगासन का अभ्यास करते हैं। योग करने से हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आज हम चर्चा करेंगे “उषा पान” के विषय में।
उषा पान क्या है?
“उषा” का अर्थ है प्रातःकाल — अर्थात सूर्योदय की बेला।
प्रातःकाल उठने के बाद जल पीने को उषा पान कहा जाता है।
आयुर्वेद में उषा पान को “अमृत पान” की संज्ञा दी गई है, क्योंकि यह शरीर की कई बीमारियों से रक्षा करता है।
आयुर्वेद के अनुसार, अधिकांश बीमारियां हमारे पेट से संबंधित होती हैं।
यदि हम नियमित रूप से उषा पान करते हैं, तो इन पेट से जुड़ी बीमारियों से बचाव संभव है।

उषा पान करने की विधि
- सुबह खाली पेट उठते ही, बिना कुल्ला किए, लगभग 1 से 1¼ लीटर पानी पीने का प्रयास करें।
- पानी को गटागट पीना चाहिए, अर्थात एक बार में निरंतर पीएं।
- यदि प्रारंभ में यह मात्रा अधिक लगे, तो जितना संभव हो उतना पीना शुरू करें और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं।



बिना कुल्ला किए पानी क्यों पीना चाहिए?
रातभर सोते समय हमारे मुंह में लार (Saliva) बनती है, जो पाचन तंत्र के लिए अत्यंत लाभकारी होती है।
इसी कारण सुबह बिना कुल्ला किए पानी पीना सबसे उत्तम माना गया है।
आप सोच सकते हैं कि सुबह मुंह तो गंदा होता है?
इसके लिए, रात में भोजन करने के बाद ही ब्रश या दातून से मुंह साफ करके सोएं, ताकि सुबह मुंह स्वच्छ रहे।
उषा पान करते समय बैठने की मुद्रा
- उषा पान करते समय उकड़ू बैठें।
इससे पाचन तंत्र और आंतें मजबूत बनती हैं।
यह मुद्रा घुटनों के लिए भी लाभकारी है। - यदि उकड़ू बैठना संभव न हो, तो कुर्सी या सोफे पर बैठकर भी पानी पी सकते हैं।
उषा पान के लाभ
- पाचन तंत्र को मजबूत और सक्रिय बनाता है।
- कब्ज और अत्यधिक अम्लता (Acidity) जैसी समस्याओं में राहत देता है।
- अपच (Indigestion) की शिकायत को दूर करता है।
- पेट से संबंधित हर प्रकार के रोग में सहायक है।
सावधानियां
- यदि एक साथ अधिक पानी पीना कठिन लगे, तो थोड़ी मात्रा से शुरुआत करें।
- धीरे-धीरे पानी की मात्रा बढ़ाएं, ताकि शरीर को इसकी आदत हो जाए।
आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें।
– योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान





























