Skip to main content

Tag: #yogacharyadhakaram

सही आसन, सही जीवन: बैठने का योगिक महत्व

शरीर का वजन बैठते समय कहाँ होता है?

योग केवल आसनों या शारीरिक मुद्राओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के संतुलन की सम्पूर्ण विद्या है। जब हम साधना के लिए किसी आसन में बैठते हैं – विशेषकर सुखासन, पद्मासन या पला‍थी जैसी स्थितियों में – तब शरीर का भार किस प्रकार से वितरित होता है, इसका गहरा प्रभाव हमारी शारीरिक व मानसिक स्थिति पर पड़ता है।

बैठने पर शरीर का भार कहाँ जाता है?

जब हम पालथी मारकर बैठते हैं, तब शरीर का सम्पूर्ण भार कूल्हों (Hip joints), टांगों की हड्डियों (Femurs), तथा श्रोणि (Pelvis) की हड्डियों के माध्यम से ज़मीन पर जाता है। यह भार मुख्य रूप से दोनों कूल्हों (Ischial tuberosities) पर होना चाहिए।

यदि शरीर का वजन किसी एक ओर (दाएँ या बाएँ कूल्हे पर) अधिक हो जाए, तो शरीर का संरेखन (Alignment) बिगड़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा बैठने से रीढ़, पीठ, घुटनों और यहाँ तक कि गर्दन पर भी असंतुलन उत्पन्न होता है।

ठीक उसी तरह जैसे गाड़ी के टायरों में हवा असमान हो तो गाड़ी झुक जाती है और उसकी चेसिस खराब हो सकती है, वैसे ही शरीर का भार असमान हो तो कई शारीरिक समस्याएँ जन्म लेती हैं।

संभावित समस्याएँ

  • रीढ़ की हड्डी का झुकाव (Scoliosis/kyphosis)
  • घुटनों पर असमान दबाव → गठिया या कूल्हों की जकड़न
  • झुकी हुई पीठ और संकुचित छाती → फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी
  • असंतुलन से प्राण ऊर्जा का व्यर्थ व्यय → थकान और मानसिक तनाव

योगशास्त्र का मार्गदर्शन

स्थिरं सुखं आसनम्” – अर्थात वह आसन जिसमें स्थिरता और सुख हो।

इसीलिए बैठते समय ध्यान रखें:

  • दोनों कूल्हों को ज़मीन पर बराबरी से टिकाएँ, आवश्यकता हो तो कुशन/कंबल का सहारा लें।
  • पीठ सीधी रखें और छाती को ओपन चेस्ट स्थिति में रखें।
  • कंधों को पीछे घुमाकर ढीला छोड़ें।
  • गर्दन सीधी और ठोड़ी थोड़ी अंदर (जालंधर बंध की भाँति)

सही बैठक के लाभ

  1. मांसपेशीय तनाव में कमी – समान भार वितरण से अनावश्यक खिंचाव नहीं होता।
  2. स्नायु-तंत्र की सक्रियता – उचित मुद्रा से मानसिक एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन बढ़ता है।
  3. श्वसन प्रणाली में सुधार – खुली छाती व सीधी पीठ से फेफड़े पूरी तरह फैलते हैं।
  4. रक्त संचार और ऊर्जा प्रवाह – सही मुद्रा से रक्त प्रवाह व चक्र सक्रिय रहते हैं।

निष्कर्ष

योग में आसन केवल बाहरी मुद्रा नहीं, बल्कि आंतरिक चेतना का माध्यम हैं। जब हम अपने शरीर का भार सम रूप से वितरित करते हैं और रीढ़ की स्थिति सही रखते हैं, तो शारीरिक, मानसिक और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है।

जैसे मजबूत नींव वाली इमारत हर तूफान में अडिग रहती है, वैसे ही योग में सही संरेखन और भार संतुलन हमें जीवन की हर परिस्थिति में स्थिर और ऊर्जावान बनाए रखता है।

आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें।
धन्यवाद!

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

द्विपाद वृत्ताकार क्रिया: पेट-कमर की चर्बी पिघलाने का रामबाण उपाय

आप सभी का स्वागत है!

एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में हमारे साथ जुड़ने के लिए धन्यवाद। आज हम द्विपाद वृत्ताकार क्रिया के बारे में चर्चा करेंगे—एक ऐसी क्रिया जो पेट और कमर पर जमी अवांछित चर्बी को प्रभावी ढंग से कम करती है।

क्रिया करने की विधि

  1. प्रारंभिक स्थिति:
  • पीठ के बल लेट जाएँ।
  • कोहनियों को ज़मीन पर टिकाकर शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाएँ।
  • छाती को तानकर रखें।
  • कंधे और कोहनी 90° अंश पर हों तथा एक सीध में रहें।
  1. दक्षिणावृत्त (घड़ी की दिशा में):
  • दोनों पैरों को धीरे-धीरे दाईं ओर से उठाएँ।
  • बड़ा गोलाकार घुमाव बनाते हुए पैरों को clockwise घुमाएँ।
  • एक चक्र पूरा करने में 15-20 सेकंड लगाएँ।
  • थकान होने पर शवासन में विश्राम करें।
  1. वामावृत्त (घड़ी की विपरीत दिशा में):
  • अब पैरों को बाईं ओर से उठाएँ।
  • anti-clockwise दिशा में बड़ा गोला बनाएँ।
  • दक्षिणावृत्त के बराबर समय तक घुमाएँ।
  • दोनों दिशाओं में बराबर चक्र पूरे करने के बाद शवासन में आराम करें।

अवधि

  • सामान्य व्यक्ति:
    दक्षिणावृत्त + वामावृत्त के 4-6 चक्र (कुल 3 मिनट)।
  • वजन घटाने हेतु:
    प्रत्येक दिशा में 2 मिनट (कुल 4 मिनट)।

विशेष सावधानियाँ

  • कंधे और कोहनी हमेशा 90° अंश व एक सीध में रखें।
  • हथेलियाँ ज़मीन पर स्थिर टिकी हों, कोहनियाँ पास-पास रखें।
  • गर्दन पर दबाव न डालें। छाती फुलाकर रखें।
  • घुटने सीधे रहें।
  • न करें यदि:
  • गर्भावस्था या माहवारी चल रही हो।
  • सावधानी से करें:
  • गर्दन दर्द/सूजन हो तो पीठ के बल लेटकर करें।
  • पेट के अल्सर या कमर दर्द में एक पैर से अभ्यास करें।
  • क्रिया करने में जल्दबाज़ी न करें—शांत व सहज भाव से करें।

लाभ

  • पेट-कमर की चर्बी कम होती है।
  • पाचन तंत्र मजबूत होता है।
  • पेट की मांसपेशियों की प्राकृतिक मालिश।
  • नितंबों की चर्बी घटाने में सहायक।

“इस क्रिया का पूरा लाभ पाने के लिए कोहनियों के बल उठकर करें। लेटकर करने पर कमर पर तनाव पड़ता है, जिससे प्रभाव घट जाता है।”

आप सभी का हृदय से आभार। स्वस्थ रहें, मस्त रहें!
योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

हनुमान आसन: लचीलापन और शक्ति का संगम

हरि ओम!
आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार।
कहते हैं — “मुस्कुराहट के बिना जीवन अधूरा है,”
इसलिए हमेशा मुस्कुराइए और स्वस्थ रहिए।

“एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आपका हार्दिक स्वागत है।
आज हम बात करेंगे एक अद्भुत एवं शक्तिशाली योगासन — हनुमान आसन के बारे में।

हनुमान आसन का परिचय

  • यह एक उन्नत (एडवांस) योगासन है।
  • इससे पैरों में शक्ति, मांसपेशियों में लचीलापन और पेल्विक रीजन में मजबूती आती है।
  • यह आसन शरीर में ऊर्जा का संचार करता है और संतुलन की भावना को विकसित करता है।

हनुमान आसन की विधि

  1. सीधे खड़े होकर पैरों को जितना संभव हो खोलें।
  2. शरीर को दाहिनी ओर मोड़ें, दोनों हाथ जांघों के पास रखें।
  3. दाएं पैर का पंजा 90° पर मोड़ें, और बाएं पैर को पीछे की ओर सीधा करें।
  4. धीरे-धीरे पैरों को फैलाएं, जल्दबाजी न करें।
  5. पीछे का घुटना सीधा रखें और पैर को पीछे ले जाएं
  6. आगे वाले पैर को आगे ले जाकर पंजा सीधा रखें।
  7. धीरे-धीरे जांघ जमीन से सटा दें
  8. इस स्थिति में 1-2 मिनट तक रुकें।
  9. फिर धीरे-धीरे पूर्व स्थिति में लौटें।
  10. अब यही प्रक्रिया बाएं पैर से दोहराएं।

सावधानियाँ और अभ्यास के सुझाव

  • धैर्य रखें, जितना बन पाए उतना करें।
  • जहाँ तक पैर खुलें वहाँ पर रुकें और 1-2 मिनट स्थिर रहें।
  • दोनों ओर बराबर अभ्यास करना आवश्यक है।
  • नियमित अभ्यास से हर सप्ताह लचीलापन बढ़ेगा
  • रोज़ 10 मिनट अभ्यास से 3-4 महीनों में पूर्ण आसन संभव हो सकता है।

अभ्यास को और प्रभावी बनाने की तकनीक

  1. दंडासन में बैठें, पैरों को सामने खोलें।
  2. कमर सीधी रखकर आगे की ओर झुकें – 1 मिनट रुकें
  3. फिर दाईं ओर शरीर मोड़ते हुए हनुमान आसन में जाएँ – 1 मिनट रुकें
  4. फिर बाईं ओर भी यही प्रक्रिया दोहराएं।
  5. तीनों दिशाओं में यह अभ्यास 3 बार दोहराएं
  6. अंत में सामने की ओर झुककर 1 मिनट रुकें और फिर विश्राम करें।

हनुमान आसन के लाभ

  • पेल्विक क्षेत्र को मजबूती देता है।
  • पैरों की मांसपेशियों को लचीलापन प्रदान करता है।
  • रीढ़ की हड्डी और छाती को मजबूती देता है।
  • मानसिक स्थिरता और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

आत्मबोधन और समर्पण का अभ्यास

योग केवल शरीर का नहीं, आत्मा और मन का भी अभ्यास है।
धैर्य, समर्पण और नियमितता से आप हर योगासन को पूर्णता की ओर ले जा सकते हैं।
अपने शरीर की सीमाओं को पहचानिए और धीरे-धीरे उसे विस्तार दीजिए।

तो प्यारे मित्रों,
आप सभी को सत-सत नमन।
आप हमेशा स्वस्थ, मस्त और आनंदित रहें।
हमारे साथ बने रहें और योग के माध्यम से अपने जीवन को धन्य बनाते रहें।

आपका योगमित्र,
योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक – योगापीस संस्थान

भस्त्रिका प्राणायाम

भस्त्रिका नाम लुहार की धौंकनी जैसी वेगपूर्वक वायु भरने व निकालने की क्रिया की समानता से प्रेरित है। यह प्राणायाम शरीर को ऊर्जा से भरकर विषाक्त तत्वों का निष्कासन करता है।

विधि

  1. आसन: पद्मासन, अर्धपद्मासन या सुखासन (पालथी) में बैठें।
  2. शरीर स्थिति:
    • कमर, पीठ एवं गर्दन सीधी रखें
    • दोनों नितम्बों पर समान वजन
    • शरीर को तनावमुक्त रखें (विशेष ध्यान दें)
    • पेट की मांसपेशियाँ शिथिल, सीना फुला हुआ
  3. हस्त मुद्रा: दोनों हाथ घुटनों पर सामान्य स्थिति में।
  4. प्रारम्भ:
    • आँखें कोमलता से बंद कर अंतर्मुखी हो जाएँ
    • वेगपूर्वक श्वास लेते हुए दोनों बाँहों को सिर के ऊपर उठाएँ (फेफड़े पूर्णतया भरें)
    • हाथ नीचे लाते हुए वेगपूर्वक श्वास बाहर निकालें (फेफड़े पूर्णतः खाली हों)
  5. अवधि:
    • 4 मिनट तक लगातार दोहराएँ
    • अक्षमता होने पर 2 मिनट करें → 1 मिनट विश्राम → पुनः 2 मिनट (कुल 5 मिनट)
  6. समापन:
    • फेफड़ों को पूरी तरह खाली करें
    • श्वास को सहज भाव से आने-जाने दें
    • 1 मिनट तक आँखें बंद रखकर शरीर व श्वास का साक्षीभाव से निरीक्षण करें

विशेष निर्देश

  • बाँहों के ऊपर-नीचे होने पर शरीर में झटका/तनाव न आने दें
  • चेहरा सामान्य व तनावमुक्त रखें
  • श्वास लेने-छोड़ने का समय समान रखें (जैसे 2 सेकंड भरना, 2 सेकंड खाली करना)
  • श्वास “पूर्ण क्षमता” से भरें व “सम्पूर्णतया” खाली करें
  • अपना ध्यान श्वास क्रिया पर केन्द्रित रखें

लाभ

  • विषाक्त तत्वों का निष्कासन
  • वात-पित्त-कफ संतुलन
  • चयापचय (Metabolism) व रक्त-ऑक्सीजन में वृद्धि
  • फेफड़ों को पुष्ट करना (सर्दी-जुकाम, अस्थमा, निमोनिया, एलर्जी, कफ में विशेष लाभकारी)
  • ध्यान की तैयारी में सहायक

सावधानियाँ

नवसाधकों के लिए:

  • प्रारम्भ में सिरभारीपन/चक्कर आने पर विश्राम करें
  • पहले सामान्य गति से अभ्यास करें, फिर धीरे-धीरे गति बढ़ाएँ

निषेध (जिन्हें नहीं करना चाहिए)

  • उच्च/निम्न रक्तचाप
  • हृदय रोग
  • नकसीर (नाक से खून आना)
  • मिर्गी
  • चक्कर आने की समस्या

“भस्त्रिका प्राणायाम की वेगपूर्ण क्रिया शरीर में प्राण के प्रवाह को ठीक उसी प्रकार जागृत करती है जैसे लौहार की धौंकनी अंगारों में अग्नि। परिशुद्ध तकनीक व सजगता से ही यह रूपान्तरकारी परिणाम देती है।”
योगाचार्य ढाकाराम


वक्रासन (Whole Spinal Twist Pose)

अर्थ

इस आसन में शरीर की स्थिति वक्र (मुड़ी हुई) के समान होने के कारण इसे वक्रासन कहा जाता है। यह अर्धमत्स्येन्द्रासन का एक सरल रूप है।

विधि (करने का तरीका)

बाईं ओर से करने की विधि:

  1. प्रारंभिक स्थिति: कमर सीधी रखते हुए दण्डासन में बैठें।
  2. पैरों की स्थिति: बाएं पैर को मोड़कर, बाएं पैर का तलवा दाएं घुटने के बगल में रखें। बाएं घुटने की दिशा ऊपर (आसमान) की ओर होनी चाहिए।
  3. हाथों की स्थिति: दाएं हाथ को ऊपर उठाकर बाएं पैर के टखने या पंजे को पकड़ें।
  4. मरोड़ने की क्रिया: कमर से बाईं ओर मुड़ते हुए बाएं हाथ को पीछे जमीन पर रखें।
  5. गर्दन व दृष्टि: गर्दन को बाईं ओर घुमाकर पीछे की ओर देखें। शरीर को सीधा रखने का प्रयास करें।
  6. स्थिति में रुकें: इस अवस्था में 30 सेकंड से 1 मिनट तक बने रहें।
  7. वापस आना: धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आकर विश्राम करें।

दाईं ओर से करने की विधि:

  1. प्रारंभिक स्थिति: कमर सीधी रखते हुए दण्डासन में बैठें।
  2. पैरों की स्थिति: दाएं पैर को मोड़कर, दाएं पैर का तलवा बाएं घुटने के बगल में रखें। दाएं घुटने की दिशा ऊपर की ओर होनी चाहिए।
  3. हाथों की स्थिति: बाएं हाथ को ऊपर उठाकर दाएं पैर के टखने या पंजे को पकड़ें।
  4. मरोड़ने की क्रिया: कमर से दाईं ओर मुड़ते हुए दाएं हाथ को पीछे जमीन पर रखें।
  5. गर्दन व दृष्टि: गर्दन को दाईं ओर घुमाकर पीछे की ओर देखें। शरीर को सीधा रखें।
  6. स्थिति में रुकें: इस अवस्था में 30 सेकंड से 1 मिनट तक बने रहें।
  7. वापस आना: धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आकर विश्राम करें।

लाभ

  • रीढ़ की हड्डी को मजबूती: मेरुदंड की कशेरुकाएं व मांसपेशियाँ लचीली व मजबूत होती हैं।
  • पाचन तंत्र सुधारे: पेट की चर्बी घटाने व पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में सहायक।
  • रोगों में लाभ: कब्ज, गैस, लीवर की कमजोरी, नसों की दुर्बलता और कमर दर्द से राहत।
  • मधुमेह नियंत्रण: डायबिटीज को कंट्रोल करने में फायदेमंद।

सावधानियाँ एवं संशोधन

  • गर्दन दर्द: यदि गर्दन में दर्द हो, तो ज्यादा पीछे न देखें।
  • शरीर सीधा रखें: कमर, पीठ और गर्दन को सीधा रखने का प्रयास करें।
  • संशोधन: यदि पैर का टखना पकड़ने में कठिनाई हो, तो ज़ोर न लगाएं। केवल धड़ को मोड़ने पर ध्यान दें या योगा ब्लॉक का सहारा लें।

इन स्थितियों में न करें:

  • मासिक धर्म के दौरान
  • गर्भावस्था में

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

टखना और घुटने के दर्द के लिए गुल्फ नमन

नमस्कार दोस्तों!
“एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे गुल्फ नमन के बारे में।

‘गुल्फ’ का अर्थ होता है टखना और ‘नमन’ का अर्थ होता है झुकाव या आगे-पीछे की गति। यह एक सरल पर बहुत प्रभावी यौगिक क्रिया है जो टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों को मजबूत व लचीला बनाने में मदद करती है। खासतौर पर, यह टखना और घुटने के दर्द को दूर करने के लिए बेहद फायदेमंद है।

गुल्फ नमन करने की विधि:

  1. प्रारंभिक स्थिति: सबसे पहले जमीन पर बैठ जाएं। अपने दोनों पैरों को सामने की ओर दंडासन की तरह सीधा फैलाएं। पैरों के बीच लगभग 1 से 1.5 फुट का फासला रखें।
  2. हाथों की स्थिति: अपने हाथों को कमर के पीछे जमीन पर रखें। छाती को खुला और सीधा रखें।
  3. पंजों को खींचना (अपनी ओर): दोनों पैरों के पंजों को मिलाकर उन्हें अपनी तरफ (घुटनों की दिशा में) खींचें। इस खिंचाव को लगभग 15-20 सेकंड तक बनाए रखें।
  4. पंजों को दबाना (जमीन की ओर): अब दोनों पैरों के पंजों को जमीन की तरफ दबाएं, जैसे जमीन को छूने का प्रयास कर रहे हों। इस स्थिति को भी 15-20 सेकंड तक बनाए रखें।
  5. चक्र दोहराएं: इस तरह “पंजे खींचना” (अपनी ओर) और “पंजे दबाना” (जमीन की ओर) का एक चक्र पूरा होता है। ऐसे तीन चक्र करें (यानी प्रत्येक क्रिया को तीन बार दोहराएं)।
  6. ध्यान केंद्रित करें: पैरों को खींचते और दबाते समय एड़ियों, टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों में होने वाले खिंचाव पर ध्यान दें।
  7. विश्राम: क्रिया पूरी करने के बाद पैरों को पूरी तरह ढीला छोड़ दें, विश्राम की स्थिति में ले आएं।
  8. परिवर्तन महसूस करें: गुल्फ नमन करने से पहले और बाद में अपने पैरों और जोड़ों में आए परिवर्तन को गहराई से महसूस करें।

गुल्फ नमन के लाभ:

  • टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों की मांसपेशियों व जोड़ों को मजबूत और लचीला बनाता है।
  • टखना और घुटने के दर्द को दूर करने में विशेष रूप से सहायक है।
  • पैरों में रक्त संचार में सुधार करता है।
  • वैरिकोज़ वेंस (Varicose Veins / नसों में सूजन) की समस्या के लिए भी बहुत लाभदायक है।

गुल्फ नमन करते समय सावधानियाँ:

  • धीमी गति: क्रिया को हमेशा धीरे-धीरे और सहजता से करें। जल्दबाजी करने से इसका प्रभाव कम हो जाता है।
  • पैरों की स्थिति: दोनों पैरों के एड़ियों और पंजों को हमेशा आपस में मिलाकर रखें। इससे पैरों पर समान और पूरा खिंचाव आता है।
  • भाव-भंगिमा: क्रिया करते समय आँखें बंद रखें और चेहरे पर हल्की मुस्कान बनाए रखें। सहज और शांत भाव से करें।
  • विश्राम: प्रत्येक चक्र के बाद और अंत में शरीर, विशेषकर पैरों को पूरी तरह ढीला छोड़ दें

गुल्फ नमन कितनी बार करें?

  • जिन लोगों को टखनों, पिंडलियों, घुटनों या जांघों में दर्द या अकड़न है, उन्हें दिन में तीन बार (सुबह, दोपहर और शाम) गुल्फ नमन करना चाहिए। (प्रत्येक बार 3 चक्र)।
  • सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी इसे दिन में एक या दो बार किया जा सकता है।

गुल्फ नमन एक अत्यंत सरल, सुविधाजनक और प्रभावी योग क्रिया है। यह निचले अंगों के जोड़ों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए अद्भुत काम करती है। नियमित अभ्यास से आप इन क्षेत्रों में होने वाले दर्द और अकड़न से मुक्ति पा सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि आप इसे अपने बिस्तर पर भी आसानी से कर सकते हैं! बस ध्यान रखें कि बिस्तर न तो बहुत नरम (स्पंजी) होना चाहिए और न ही बहुत कठोर। मध्यम कठोरता वाला बिस्तर सबसे उपयुक्त है।

इसी के साथ, आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद! आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमन।
अधिक जानकारी के लिए: www.DhakaRam.com

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

एक पाद सुप्त पादांगुष्ठासन: स्वास्थ्य से आनंद की ओर एक कदम

प्यारे मित्रों,
आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार।
‘एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर’ कार्यक्रम में आपका हार्दिक स्वागत है।

आज हम जिस योगासन की बात करने जा रहे हैं, वह है एक पाद सुप्त पादांगुष्ठासन। यह आसन खासतौर पर पैरों से जुड़ी समस्याओं में अत्यंत लाभदायक है। जिन लोगों को एड़ियों, पिंडलियों, घुटनों या जांघों में दर्द रहता है, उन्हें यह आसन दिन में तीन बार अवश्य करना चाहिए। यह न केवल पैरों को मजबूती प्रदान करता है बल्कि रीढ़ की हड्डी में लचक भी बढ़ाता है।

आसन करने की विधि:

पहला चरण (दाहिने पैर से):

  1. सबसे पहले शवासन में लेट जाएं।
  2. दाहिने पैर को मोड़कर छाती की ओर लाएं।
  3. दाहिने हाथ से दाहिने पैर के अंगूठे को पकड़ें।
  4. धीरे-धीरे घुटने को सीधा करने का प्रयास करें।
  5. अपनी क्षमता अनुसार पैर को अपनी ओर खींचें।
  6. 1 मिनट तक इसी स्थिति में रहें।
  7. फिर धीरे-धीरे वापस शवासन में आ जाएं और शरीर का अवलोकन करें।

दूसरा चरण (बाएं पैर से):

  1. बाएं पैर को मोड़ें और छाती की ओर लाएं।
  2. बाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें।
  3. धीरे-धीरे घुटने को सीधा करें।
  4. पैर को अपनी ओर खींचें और 1 मिनट तक इसी अवस्था में रहें।
  5. इसके बाद शवासन में विश्राम करें और आसन से पहले और बाद के परिवर्तन को महसूस करें।

विकल्प:

यदि आप अपने पैर का अंगूठा या एड़ी नहीं पकड़ पा रहे हैं, तो योगा बेल्ट, चुन्नी, तौलिया या बेडशीट का उपयोग कर सकते हैं।

  1. शवासन में लेटकर दाहिने पैर के पंजे पर योगा बेल्ट लगाएं (छोटी उंगली के नीचे)।
  2. धीरे-धीरे पैर को सीधा करें।
  3. ध्यान रखें कि दोनों पैर सीधे हों और पंजे शरीर की ओर खिंचे हों।
  4. अपनी क्षमता अनुसार 90 डिग्री तक या उससे अधिक पैर को ऊपर उठाएं।
  5. 1 मिनट तक इसी स्थिति में रहें, फिर धीरे-धीरे वापस शवासन में आ जाएं।
  6. अब यही प्रक्रिया बाएं पैर से दोहराएं।

दोनों तरफ समान अभ्यास के बाद शवासन में विश्राम करें और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें। फिर धीरे से करवट लेते हुए बैठ जाएं।

सावधानियां:

  • दोनों पैर सीधे होने चाहिए।
  • दोनों पैरों के पंजे शरीर की ओर खिंचे हुए होने चाहिए।

लाभ:

  • वेरीकोज़ वेन्स (Varicose Veins) के लिए यह रामबाण है।
  • पैरों से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या में लाभदायक।
  • एड़ियों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों के दर्द में अत्यंत उपयोगी।
  • रीढ़ की लचक और पैरों की शक्ति में वृद्धि करता है।

आप सभी को हमारी ओर से फिर एक बार मुस्कुराता हुआ नमस्कार।
मुस्कुराते रहें, हँसते रहें, और आनंदित रहें।

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार।

– योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

सही सम स्थिति में खड़े होने का महत्व: स्वास्थ्य और संतुलन होने का रहस्य

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार! “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। आज हम बात करेंगे खड़े होने की सम स्थिति के बारे में।

सम स्थिति क्या है?

सम स्थिति का अर्थ है संतुलन बनाए रखने की अवस्था। इस स्थिति में, हमारे शरीर के दोनों हिस्से समान होते हैं। जब हम सम स्थिति में खड़े होते हैं, तो हमारे दोनों पैरों पर शरीर का समान भार होता है। सम स्थिति में खड़े होने पर घुटनों, पिंडलियों, जांघों, कमर आदि में दर्द नहीं होता। यदि हम शरीर के भार को एक तरफ ज्यादा रखते हैं, तो हमारे शरीर की संरचना विकृत हो जाती है।

सही तरीके से कैसे खड़े हों?

आप सोच रहे होंगे कि खड़े होने में नया क्या है? हम सभी रोज खड़े होते हैं। लेकिन, ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि हम अपने दोनों पैरों पर शरीर का समान भार नहीं रखते हैं।

यहाँ सही तरीका बताया गया है:

  1. कंधों जितना फासला रखकर खड़े हो जाएं।
  2. देखें कि आपके कौन से पैर पर ज्यादा भार है।
  3. एड़ी या पंजे पर कहां पर ज्यादा भार है?
  4. दाहिने पैर या बाएं पैर पर?
  5. ज्यादातर लोगों के पैर के पंजे बाहर की तरफ और एड़ी अंदर की तरफ होती है। इस स्थिति में खड़े होने पर हमारा पेट आगे की तरफ निकलता है और कमर में भारीपन लगता है।
  6. अब, अपने पंजों को अंदर की तरफ और एड़ियां बाहर की तरफ निकालें।
  7. खड़े होकर देखें, आपकी कमर अपने आप सीधी हो जाएगी।
  8. दोनों पंजों को अंदर करने पर पेट अंदर की ओर जाता है और छाती तन जाती है।
  9. दोनों पंजों को अंदर करने पर हमारे नितंब भी सिकुड़ जाते हैं।

आपने देखा होगा कि जब बच्चा चलना सीखता है, तो उसके पंजे अंदर की तरफ होते हैं। यह एक प्राकृतिक स्थिति है। मॉडल्स भी रैंप पर इसी स्थिति में चलती हैं।

महिलाओं के लिए विशेष सुझाव:

मेरी माता व बहनों से विशेष आग्रह है कि वे आजकल खाना खड़े होकर बनाती हैं, और खाना बनाते समय एक तरफ झुक कर खड़ी होती हैं। आप भी सम स्थिति में खड़े होकर खाना बनाएं।

अभ्यास:

आप इसका अभ्यास थोड़े-थोड़े समय के लिए कर सकते हैं। धीरे-धीरे यह आपकी आदत में शामिल हो जाएगा।

विशेष सुझाव:

  • सम स्थिति में पंजे अंदर की ओर और एड़ियां बाहर की तरफ रखकर खड़े होना चाहिए।
  • यदि आपको पंजे बाहर रखकर खड़े होने की आदत है, तो दिन भर के लिए इस स्थिति में न रहें। थोड़े-थोड़े समय के लिए पंजों को अंदर करके खड़े हों, और धीरे-धीरे इसे अपनी आदत में शामिल करें।

फायदे:

  • सम स्थिति में खड़े होने से हमारे शरीर की संरचना सही रहती है।
  • कमर दर्द, पैरों में दर्द, घुटनों में दर्द, एड़ियों में दर्द और जांघों में दर्द नहीं होता है।

आप सभी का बहुत-बहुत आभार, बहुत-बहुत धन्यवाद। आपका दिन मंगलमय हो!

योगाचार्य ढाकाराम

संस्थापक, योगापीस संस्थान

जांघों और नितंबों की चर्बी कम करें

एक पाद वृत्ताकार क्रिया

आप सभी का हमारे विशेष कार्यक्रम “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” में हार्दिक स्वागत है। आशा है कि आप सभी मस्त और आनंदित होंगे। आज हम “एक पाद वृत्ताकार क्रिया” के बारे में जानेंगे। यह अभ्यास शरीर को लचीला बनाने और स्वास्थ्य लाभ देने में मदद करता है।

एक पाद वृत्ताकार क्रिया करने की विधि

  1. सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं
  2. अपने कोहनियों के ऊपर शरीर का भार रखें और छाती को ऊपर उठाएं
  3. पैर जमीन पर सीधे रखें और गर्दन विश्राम की अवस्था में रहे
  4. दोनों कोहनियों को एक-दूसरे के पास रखें ताकि छाती अच्छी तरह खुल जाए।
  5. दाएं पैर को ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे दक्षिणावृत (घड़ी की दिशा में) बड़ा गोला बनाएं। इसे 4 से 6 बार दोहराएं।
  6. दाएं पैर को नीचे रखकर, बाएं पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं
  7. अब दाएं पैर को ऊपर उठाएं और वामावृत्त (घड़ी की विपरीत दिशा में) बड़ा गोला बनाएं। इसे 4 से 6 बार दोहराएं।
  8. इसी प्रकार बाएं पैर से भी वामावृत्त क्रिया करें
  9. सभी क्रियाएं पूरी करने के बाद विश्राम करें। फिर बगल की तरफ करवट लेकर धीरे-धीरे बैठ जाएं
  10. एक गोला बनाने में कम से कम 15-20 सेकंड का समय लें

विशेष ध्यान दें:

  • जिन्हें कंधों या कमर में अधिक दर्द हो, वे यह क्रिया लेटकर भी कर सकते हैं
  • लेटकर करने पर हाथों को कमर के पास रखना चाहिए

एक पाद वृत्ताकार क्रिया के लाभ

  • जांघों और नितंबों की चर्बी कम करता है।
  • पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है।
  • मांसपेशियों को लचीला बनाता है।
  • कंधों और गर्दन की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद है।

सावधानियां

  • इस क्रिया को लेटकर न करें, बल्कि कोहनियों के बल करें
  • दक्षिणावृत और वामावृत्त घुमाव बराबर संख्या में करें
  • पैर गोलाकार घुमाते समय घुटनों को सीधा और खींचकर रखें
  • दोनों पैरों से समान संख्या में दक्षिणावृत और वामावृत्त घुमाव करना आवश्यक है।

आप सभी का बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद! स्वस्थ रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें। अपने जीवन को खूबसूरत बनाने के लिए रोज़ कम से कम 1 से 1.5 घंटे योग का अभ्यास अवश्य करें

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

3 मिनट में पैरों का दर्द कम करें: गुल्फ नमन क्रिया

नमस्कार! एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आपका स्वागत है। आज हम आपके लिए गुल्फ नमन क्रिया लेकर आए हैं, जो पैरों के दर्द से राहत पाने का एक प्रभावी योग अभ्यास है। यदि आपकी एड़ियों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों में दर्द रहता है, तो यह क्रिया आपके लिए बहुत उपयोगी हो सकती है। आइए जानते हैं इसके लाभ और इसे करने की विधि।

गुल्फ नमन क्रिया क्या है?

गुल्फ का अर्थ है टखना, और नमन का अर्थ है नमस्कार, यानी टखनों को गति देना। यह क्रिया टखनों से लेकर जांघों तक की मांसपेशियों को सक्रिय करती है और रक्त संचार में सुधार लाती है।

गुल्फ नमन क्रिया करने की विधि

  1. दंडासन में बैठें – पैरों को सामने फैलाएं और उनके बीच 1 से 1.5 फुट का अंतर रखें।
  2. कमर व गर्दन सीधी रखें, कंधे तने हुए हों और दोनों हाथों को पीछे टिकाएं।
  3. एड़ियों और पंजों को मिलाएं, फिर पंजों को शरीर की ओर खींचें और 20 सेकंड तक रोकें।
  4. अब पंजों को विपरीत दिशा में खींचें और ज़मीन को छूने का प्रयास करें।
  5. इस क्रिया को 3-4 बार दोहराएं, फिर पैरों को विश्राम अवस्था में छोड़कर आंखें बंद करें और शरीर में हुए बदलावों को महसूस करें।

महत्वपूर्ण सुझाव

गति नियंत्रित रखें – तेज़ी से करने पर यह क्रिया केवल टखनों तक सीमित रहती है, जबकि धीमी गति से करने पर इसका प्रभाव मांसपेशियों के गहरे स्तर तक जाता है।
ध्यान केंद्रित करें – आंखें बंद करके टखनों, एड़ियों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों की मांसपेशियों पर ध्यान दें।
नियमित अभ्यास करें – जिन लोगों को पैरों में दर्द रहता है, उन्हें दिन में 3 बार यह क्रिया करनी चाहिए।
समय निर्धारित करेंकम से कम 2 मिनट तक क्रिया करें और 1 मिनट तक शरीर में हुए बदलावों का अवलोकन करें।

गुल्फ नमन क्रिया के लाभ

पैरों के दर्द में राहत
टखनों, एड़ियों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूती
रक्त संचार में सुधार
पैरों में हल्कापन और ऊर्जा का संचार

सावधानियां

❌ यदि पंजे खींचते समय एड़ियां ज़मीन से उठती हैं, तो इस पर ध्यान न दें।
❌ यदि 2-3 हफ्ते तक यह क्रिया करने के बाद भी आराम न मिले, तो विटामिन D की जांच करवाएं

स्वस्थ रहें, योग अपनाएं!

आप सभी स्वस्थ, मस्त और आनंदित रहें। अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए नियमित योग का अभ्यास करें

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान