कोणासन: मेरुदंड को लचीला और शरीर को स्वस्थ रखने वाला आसन
प्रिय मित्रों, आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार।
“एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
आप सब कैसे हैं? मुझे विश्वास है कि आप सभी अच्छे हैं — विशेषकर यदि आप रोज योगाभ्यास करते हैं।
नियमित योगाभ्यास से हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
आज हम बात करेंगे — कोणासन के बारे में।
यह आसन हमारी मेरुदंड (spine) को लचीला बनाने के लिए अत्यंत लाभकारी है।




कोणासन करने की विधि
- सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं समस्थिति में।
- दोनों पैरों के बीच दो से ढाई फीट की दूरी रखें।
- दोनों हाथ जांघों को स्पर्श करते रहें।
- दायां हाथ धीरे-धीरे बगल से ऊपर उठाएं, हथेली को आकाश की ओर करें।
- हाथ को सिर के ऊपर सीधा तान लें।
- अब कमर को बाईं ओर झुकाएं, और बाएं हाथ की उंगलियों से बाएं पैर के पंजे को छूने का प्रयास करें।
- दायां हाथ सीधा रहे, कान के पास कनपटी से लगा हुआ।
- इस स्थिति में कम से कम 1 मिनट तक रहें।
- धीरे-धीरे आसन से बाहर आकर समस्थिति में लौटें।
- आंखें बंद कर के आसन से पहले और बाद के परिवर्तन को महसूस करें।
अब यही प्रक्रिया दूसरी ओर (दाईं ओर) करें —
- पैरों के बीच दो से ढाई फीट का अंतर बनाए रखें।
- बायां हाथ उठाएं, हथेली आकाश की ओर करें।
- हाथ को सिर के ऊपर सीधा तानें।
- कमर को दाईं ओर झुकाएं और दाएं पैर के पंजे को छूने का प्रयास करें।
- बायां हाथ सीधा रहे और कान के पास लगा हो।
- 1 मिनट तक इसी स्थिति में रहें।
- धीरे-धीरे वापस समस्थिति में आएं।
- आंखें बंद करके शरीर में आए परिवर्तन का अवलोकन करें।





कोणासन के लाभ
- कंधे मजबूत बनते हैं।
- पसलियों को लचीलापन मिलता है।
- फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
- हृदय स्वस्थ रहता है।
- मेरुदंड लचीला और सक्रिय रहता है।
- कमर के पार्श्व भाग में जमा वसा कम होता है।
सावधानियां
- शरीर का केवल ऊपरी भाग ही झुकाएं।
- कोहनियों व घुटनों को सीधा रखें।
- दोनों पैरों के पंजे सीधे रहें।
- दाएं या बाएं झुकते समय आगे या पीछे न झुकें, केवल पार्श्व दिशा में झुकें।
- झुकते समय कमर से नहीं, बगल (armpit) से झुकें।
- गर्दन को तनाव न दें — उसे सामान्य स्थिति में रखें।
- दोनों पैरों में समान भार रखें।
- नितंबों को हल्का संकुचित रखें।
आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें।
– योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान





























