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Author: Yogacharya Dhakaram

Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.

आनंदम योग शिविर में योगाचार्य ढाकाराम ने दिया प्रशिक्षण

आनंदम योग शिविर में योगाचार्य ढाकाराम ने दिया प्रशिक्षण


पर योग हर व्यक्ति निरोग मुहिम के तहत उत्तर भारत की प्रमुख श्री वैष्णव पोठ उत्तर तोदाद्रि श्री गलता जी द्वारा श्री गलता पीठ में गलतापीठाधीश्वर स्वामी सम्पतकुमार अवधेशाचार्य महाराज के सानिध्य एवं श्री गलता पीठ के युवराज स्वामी राघवेन्द्र के मार्गदर्शन में आयोजित आनंदम शिविर में प्रसिद्ध योग गुरु योगाचार्य ढाकाराम ने सैकड़ो
भक्तों एवं योग प्रेमियों को योगाभ्यास, प्राणायाम एवं ध्यान के साथ मुस्कुराते हुए जीवन जीने की कला के सूत्र भी दिए। अवधेशाचार्य महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आनंदमय जीवन के लिए नियमित साधना अनिवार्य है।

युक्ताहार युक्त विहार कार्य मनोयोग युक्त, जागरण और शयन भी युक्ति युक्त हो, स्वस्थ शरीर से ही सभी धर्मों
का पालन हो सकता है अत: जो बीमार है उसके लिए योग आवश्यक है और जो नहीं कता वह बीमार ना हो इसलिए अत्यावश्यक है।

शिविर के मुख्य समन्वय एवं आनंदम प्रकल्प के राष्ट्रीय प्रभारी योगी मनीष भाई विजयवर्गीय ने कहा की योगपीस संस्थान एवं अंजू देवी मेमोसिल ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित शिविर एक निश्चित कार्य योजना के साथ मंदिर प्रबंधन समितियों,विकास समितियों एवं सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से जयपुर के विभिन्न मंदिरों, स्कूलों,सार्वजनिक पार्कों एवं सामुदायिक केंद्रों में आयोजित किए जाएंगे जिनका उद्देश्य हर घर हर घर योग हर व्यक्ति निरोग रहे हैं इसके लिए संस्थान द्वारा निशुल्क प्रशिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे इच्छुक संस्थाएं योग हेल्पलाइन नम्बर पर संपर्क कर सकती हैं। शिविर में योग श्रीपास संस्थान आनंदम् योग शिविर की सेवा में सहयोग के लिए गौ भक्त जन सेवक रवि नैय्यर, राजस्थान स्वास्थ्य योग परिषद के मुख्य प्रशिक्षक आनंद कृष्ण कोठारी, समाज सेवी राकेश गर्ग, योगाचार्य विशाल, योग विभूति पूर्वी विजयवर्गीय को अवधेशाचार्य महाराज एवं योगाचार्य ढाकाराम ने सम्मानित किया।

आनंदम योग शिविर आज

गलता पीठाधीश्वर स्वामी सम्पत कुमार अवधेशाचार्य महाराज के सानिध्य,विख्यात योग गुरु योगाचार्य ढाकाराम
की प्रेरणा एवं श्रीगलता पीठ के युवराज स्वामी राघवेन्द्र के मार्गदर्शन में जयपुर के तीर्थ श्री गलताजी मंदिर प्रांगण में
रविवार को आनंदम योग शिवर आयोजित होगा।

इस शिविर में आमंत्रण एवं योग के प्रति जागरूकता फैलाने के क्रम में आनंदम प्रकल्प के राष्ट्रीय प्रभारी योगी मनीष भाई विजयवर्गीय, शिविर की संयोजिका सीए अंजलि जैन, राजस्थान स्वास्थ्य योग परिषद के मुख्य प्रशिक्षक आनंद कृष्ण कोठारी, समाज सेवी राकेश गर्ग जनसेवीका नीता खेतान एवं समाज सेविका सन्तोष फतेहपुरिया (अध्यक्ष, महिल मण्डल श्री अग्रवाल समाज समिति जयपुर ) ने शहर के विभिन्न स्थानों पर जनसंपर्क किया।

इस दौरान मालवीय नगर विधानसभा के विधायक कालीचरण सराफ, सिविल लाइन विधायक गोपाल शर्मा एवं गौ सेवक समाजसेवी रवि नैय्यर से भी आयोजन समिति ने मुलाकात कर उन्हें सहयोग के लिए आमंत्रित किया है। सभी जनसेवकों ने ने योगपीस संस्थान की तरफ से योग की प्रति जन-जन में जागृति के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए जयपुर के नागरिकों स्वास्थ्य लाभार्थ ऐसे शिविरों की नितांत अनिवार्य आवश्यकता बताई।

आनंदम प्रकल्प के राष्ट्रीय प्रभारी एवं शिविर के मुख्य समन्वयक योगी मनीष भाई विजयवर्गीय ने कहा कि जयपुर की पहचान छोटी आनंदम् शिविर काशी के रूप में है। शहर के मंदिरों में प्रतिदिन लाखों भक्तगण आते हैं।

इन भक्तों का तन पूर्ण स्वस्थ हो, शांत मन हो तो आत्म कल्याण सहज होता है। इसी उद्देश्य से जयपुर के मंदिरों में योग शिविर लगाने प्रारंभ किए हैं। इसके साथ ही शहर के लाखों विद्यार्थियों की बेहतरीन स्वास्थ्य के लिए भी कार्य योजना के तहत विभिन्न स्कूलों में भी आयोजित किए जाएंगे। इसी श्रृंखला में श्रीगलता पीठ द्वारा योगापीस संस्थान एवं अंजू देवी मेमोरियल ट्रस्ट
के सहयोग से रविवार 10 दिसंबर शाम 4 से 6 बजे तक मंदिर प्रांगण में आनंदम योग शिविर आयोजित किया जाएगा। इसमें योगाचार्य ढाकाराम योग प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

पाद प्रसार कटि चक्र क्रिया

नमस्कार दोस्तों,

आज हम सीखेंगे पाद प्रसार कटि चक्र क्रिया। यह क्रिया हमारे मेरुदंड, पाचन तंत्र और पार्श्व भाग में जमे हुए वसा को कम करने के लिए बहुत ही फायदेमंद है।

क्रिया

  • दोनों पैरों को फैला लें। दाहिने पैर को दाहिनी तरफ और बाएं पैर को बाएं तरफ फैलाएं। अपनी क्षमता के अनुसार फैलाएं।
  • हाथों को बगल से धीरे-धीरे अपने कंधे के बराबर उठाएं। हाथों को अच्छी तरह तानें। दाहिने हाथ को दाहिनी तरफ और बाएं हाथ को बाएं तरफ खींचें।
  • धीरे-धीरे अपने शरीर को दाहिनी तरफ मोड़ते हुए और बाएं हाथ से दाहिने पैर को बाहर की तरफ से पकड़े। अपनी कमर को सीधा रखते हुए अपने दाहिने हाथ को पीछे ले जाएं। आपकी कमर सीधी रहेगी और दोनों हाथ एक सीध में रहेंगे।
  • स्वास छोड़ते हुए जितना अपने शरीर को मरोड़ सकते हैं, दाहिने तरफ मरोड़ें। लगभग 20 सेकंड रुकें।
  • धीरे-धीरे वापस बीच में आ जाएं।
  • अब दूसरी तरफ अपने शरीर को मोड़ते हुए अपने दाहिने हाथ से बाएं पैर को पकड़ें। अपने मेरुदंड को सीधा रखते हुए बाएं हाथ को कंधे के बराबर ले जाते हुए धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए शरीर को बाई तरफ मरोड़ने का प्रयास करें। लगभग बीस सेकंड बाई तरफ रहने के बाद धीरे-धीरे वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  • इसी तरह दाहिनी और बाएं तरफ इस क्रिया को छह बार करें।
  • हाथों को फैलाते हुए सामान्य अवस्था में वापस आएं।
  • दंडासन में विश्राम करें।
  • आंखें बंद करें और लंबी गहरी सांस लें।
  • इस क्रिया करने के पहले और करने के बाद अपने शरीर में क्या परिवर्तन हुआ है, उसे महसूस करें।
  • धीरे से आंखें खोलें।

विशेष

  • यह क्रिया एक तरफ कम से कम तीन बार, यानी छह बार करनी है।
  • एक तरफ जब हम करते हैं तो हमें कम से कम 20 सेकंड तक रहना है।
  • इस क्रिया को करने में हमें लगभग 3 मिनट लगते हैं।

लाभ

  • कमर और मेरुदंड में मरोड़ से हमारा मेरुदंड लचीला बन जाता है।
  • कमर दर्द ठीक होता है।
  • यकृत, अग्नाशय और किडनी का मसाज होता है।

सावधानियां

  • गर्भावस्था, हर्निया, अल्सर और माहवारी के दौरान यह क्रिया नहीं करनी चाहिए।

निष्कर्ष

पाद प्रसार कटि चक्र क्रिया एक बहुत ही फायदेमंद क्रिया है। यह क्रिया करने से हमारा मेरुदंड लचीला होता है, कमर दर्द ठीक होता है, और पाचन तंत्र दुरुस्त होता है। इस क्रिया को करते समय ध्यान रखें कि आपकी कमर सीधी रहे और आप अपने शरीर पर ध्यान केंद्रित करें।

कंधों के लिए योग – स्कन्ध चक्र क्रिया

सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

आज हम सीखेंगे स्कन्ध चक्र क्रिया। यह बहुत ही आसान क्रिया है जो आपके कंधे में जकड़न, कंधे में दर्द और गर्दन के दर्द में बहुत राहत देने वाला है। मैं पक्का बोलता हूँ कि अगर आप इसे नियमित करेंगे तो इस प्रकार के दर्द होंगे भी नहीं। अगर आपकी इस प्रकार का दर्द है तो यह दर्द चल जाएगा।

इस क्रिया को करने के लिए आप किसी भी आसान में बैठ जाए। अगर आप नीचे ना बैठ पाए तो आप कुर्सी पर, सोफे पर और बेड पर बैठ जाएं। यह क्रिया आप कभी भी और कहीं भी कर सकते हैं। खाना खाने के बाद भी कर सकते हैं और खाना खाने से पहले भी कर सकते हैं।

स्कन्ध चक्र क्रियाविधि

दोनों हाथों को धीरे-धीरे उठाते हुए कंधे के बराबर फैला देंगे। अब हाथों को कंधों से घुमाते हुए हथेलियां को आकाश की ओर करेंगे। दोनों कोहनियों को मोड दें और उंगलियों को अपने कंधों के ऊपर प्यार से रखें। अपने दोनों कोहनियों को अपनी छाती के सामने मिला ले। एकदम धीरे-धीरे अपनी कोहनियों को ऊपर की तरफ़ ले जाते हुए धीरे धीरे पीछे फिर नीचे उसके बाद सामने दोनों कोहनी को आपस में मिलाने का कोशिश करते हुए गोलाकार घुमाएंगे। धीरे-धीरे गोला बनाते हुए यह क्रिया तीन से चार बार करेंगे। एक चक्र घूमने में कम से कम 20 सेकंड का समय लेंगे। अब हम इस क्रिया को विपरीत दिशा में दोहराएंगे। कोहनियों को सामने मिलाते हुए नीचे की ओर फिर पीछे उसके बाद ऊपर से ले जाते हुए सामने कोहनी को मिलाकर एक चक्र बनाएंगे। ऐसे इस क्रिया को भी हम जितनी बार सीधा गोलाकर घुमाया था उतने ही बार उल्टा घुमाएगे। अब आप करने से पहले और इस क्रिया को करने के बाद के आंखें बंद करके अंतर को महसूस करने करे।

अब आप देखेंगे कि आपको आपके कंधे में हल्कापन महसूस हो रहा है। एक व्यायाम की तरह हो गई है क्योंकि इसमें आपने आंखें खुली रखी है। जब आप यह क्रिया करें तो हमेशा अपनी आंखें बंद करके इसे महसूस करते हुए करें तभी यह आपको पूरा फायदा देगा।

मैंने अक्सर देखा है कि यह क्रिया गति के साथ करते हैं। प्यारे मित्रों गति के साथ ज्यादा बार घुमाने से है यह उतना फायदा नहीं देगा जितना फायदा यह आपको धीरे-धीरे घुमाने से देगा। जब आप कोहनियों को घुमाते हैं तो कोशिश करे की कोहनियों को आपस में पीछे एक दूसरे से मिलाने का। ऐसा करने से आपकी आंतरिक मांसपेशियां तक खीचाव आने से वहा की मांसपेशियां लचीली बनती है और ताकतवर भी बनती है। इससे कंधे में बहुत आराम होता है।

यह क्रिया बहुत आसान है। इसे आप कहीं भी कर सकते हैं आप ऑफिस में हैं या आप घर पर हैं। इस क्रिया को करने में आपको सिर्फ 2:00 से 3:00 मिनट तक का समय लगता है। एक से सवा मिनट का समय आपको घड़ी की दिशा में करने में और एक से सवा मिनट का समय आपको घड़ी की विपरीत दिशा में करने में लगता है। 1 मिनट का समय आपको यह अवलोकन करने में लगता है कि इस क्रिया को करने से पहले और करने के बाद में क्या फर्क है। आप दिन में सिर्फ 3 मिनट निकाल कर अपने कंधों को स्वस्थ बना सकते हैं।

स्कन्ध चक्र क्रिया के लाभ

कंधों की जकड़न में आराम, कंधों के दर्द में आराम, गर्दन दर्द में आराम और कंधे की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

आप सभी प्यारे मित्रों का धन्यवाद आप सभी का दिन मंगलमय रहे। सभी स्वस्थ, मस्त और आनंदित रहे

जुकाम, खांसी और अस्थमा के लिए प्राणायाम

एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

प्यारे मित्रों आज हम बात करेंगे सूर्य भेदी प्राणायाम पर। अभी सर्दी का मौसम शुरू होने वाला है उसको देखते हुए हम आज आपके लिए लेकर आए हैं सूर्य भेदी प्राणायाम। देखिए कुछ प्राणायाम ऐसे होते हैं जो सदाबहार करने के होते हैं, कुछ प्राणायाम ऐसे होते हैं जिनको हम ग्रीष्म काल में करते हैं और कुछ प्राणायाम ऐसे होते हैं जिन्हें हम शीत ऋतु में करते हैं। सूर्य भेदी प्राणायाम बहुत अच्छा है सर्दियों में करने के लिए जो शरीर में गर्मी को बढ़ाता है। जैसा हमने आपको पहले भी बताया कि हमारे पास है चंद्र नाड़ी यानी कि हमारी बाएं नासिक और सूर्य नाड़ी यानी कि हमारी दाहिनी नासिका। हमारे शरीर में तीन नाड़ी होती हैं सूर्य नाड़ी, चंद्र नाड़ी और सुषुम्ना नाड़ी।

सूर्य भेदी प्राणायाम करने का तरीका

सूर्य भेदी प्राणायाम में सूर्य नाड़ी से सांस लेते हैं और चंद्र नाड़ी से सांस निकलते हैं। हम दाहिनी नासिक से स्वास को अंदर लेंगे और बाएं नासिक से श्वास को बाहर निकलेंगे परंतु हकीकत में पहले हम दाहिनी नासिका से पूरा श्वास निकाल कर अपने फेफड़ों को खाली कर देंगे, फिर धीरे-धीरे दाहिनी नासिका से सांस लेंगे पूरा श्वास लेने के बाद दाहिनी नासिक को बंद करके बाएं नासिक से श्वास को निकाल देंगे। यह प्रक्रिया लगातार चलता रहेगा। जब भी आपको समाप्त करना हो या अपने हाथ दर्द हो जाए व अपने राउंड को समाप्त करना हो दाहिनी नासिका से श्वास पूरा भरकर आराम करेंगे इसका मतलब यह है कि यह प्राणायाम श्वास को पूरा बाहर निकाल शुरुआत करेंगे और श्वास पूरा अन्दर लेकर समाप्त करेंगे इस बात का विशेष ध्यान रखें इससे पूर्ण फायदा हमें मिलता है यह प्राणायाम करने के लिए हम नासिका मुद्रा या प्राणायाम मुद्रा का उपयोग करेंगे। नासिक मुद्रा के लिए तर्जनी और मध्यमा उंगलियां को मोड कर रखेंगे तथा अंगूठे से दाहिनी नासिका और कनिष्ठ व अनामिका से बाएं नासिक को पकड़े। नथुनों को बहुत ही हल्के हाथों से दबाव देंगे। बाएं नथुने को बंद करते हुए दाहिने नथुने से श्वास निकाल कर धीरे-धीरे श्वास को अंदर भरेंगे उसके बाद धीरे-धीरे बाएं नथुने से श्वास को बाहर निकाल देंगे। इसी प्रकार लगातार 5 से 7 राउंड या 4 से 5 मिनट करेंगे जब भी आपको आराम करना है या समाप्त करना हो तब जैसे कि पहले ही बता चुके हैं दाहिनी नासिका से पूरा श्वास लेकर समाप्त करेंगे उसके बाद आंखों को बंद रखते हुए अवलोकन करना, इस प्राणायाम को करने से पहले और करने के बाद क्या प्रभाव हमारे तन और मन में पड़ा उसे साक्षी भाव से देखेंगे।

सूर्य भेदी प्राणायाम करने के लाभ

इसे हमारे उम्र बढ़ाने की क्रिया लम्बी हो जाती है।
इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास करने से शरीर ऊर्जावान बना रहता है। सूर्य भेदी प्राणायाम से हमारे कफ दोष दूर होते हैं। हमारे शरीर में सर्दी से होने वाले रोग जैसे सर्दी, खांसी,जुकाम और अस्थमा आदि रोगों में फायदेमंद है। जिनको बार-बार छींक आती है, एलर्जी है उन लोगों के लिए भी है बहुत फायदेमंद है

सूर्य भेदी प्राणायाम में सावधानियां

  • यह प्राणायाम जिनको अधिक पसीना आता है, जिनको मुंह में छाले हैं, जिनको अल्सर है, जिनको पित्त बनता है, जिनकी नकसीर बहती है नहीं करना चाहिए।
  • जितने समय में हम सांस को अंदर लेते हैं उससे अधिक समय में हमें श्वास को बाहर निकलना चाहिए।
  • श्वास को अंदर लेने और बाहर निकलने में आवाज नहीं आनी चाहिए।
  • प्राणायाम करते समय दाहिने हाथ की कोहनी कंधे के बराबर होनी चाहिए ना ज्यादा ऊपर ना ज्यादा नीचे।
  • हमारी गर्दन एकदम सीधी होनी चाहिए। यह देखने के लिए की हमारी नाक सीधी है या नहीं मैं हमेशा बोलता हूं कि हमारी नाक हमारे नाभि के सीध में होनी चाहिए।
  • नाक को बड़े ही आराम से पकड़ना चाहिए।
  • हमेशा श्वास को बाहर निकलते हुए ही इस प्राणायाम की शुरूआत करना चाहिए और प्राणायाम को समाप्त करते हैं तो श्वास को अंदर लेते हुए ही प्राणायाम का समापन करना चाहिए इस पर हम पहले चर्चा कर चुके हैं इसका विशेष ध्यान रखें।
  • अगर आपकी नासिका बंद है तो सोने से पहले उसमें बादाम का तेल या गाय का घी अवश्य डालें। बादाम का तेल या गाय का घी नासिका में डालने से सर दर्द और माइग्रेन से राहत मिलती है।

इसी के साथ आप सभी मित्रों का बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार। आप सभी का जीवन यूं ही आनंदमय रहे।

एसके वर्ल्ड हेल्थ एंड वेलनेस फेस्ट की शुरुआत

एसके वर्ल्ड हेल्थ एंड वेलनेस फेस्ट की शुरुआत: पहले दिन लाइफ मैनेजमेंट से लेकर अन्य कई विषयों पर हुए सेशन
हमारा समाचार
जयपुर। आप जो कुछ कर रहे हो वो खास है। आपको कुछ खास करना है तो भीड़ चाल में नहीं चल कर अपनी लाइफ खराब नहीं करनी। वो करो जिससे आपको खुशी मिलती है। यह बात बॉलीवुड एक्टर आशीष विद्यार्थी ने कही। शनिवार को एस के फाइनेंस और संस्कृति युवा संस्था की ओर से शुरू हुए एसके वर्ल्ड हेल्थ एंड वेलनेस फेस्ट में पहले दिन आशीष के अलावा एक्टर अनूप सोनी, मैनेजमेंट गुरु एन रघुरामन, होलिस्टिक हेल्थ गुरु एंड स्प्रिचुअल लाइफ कोच डॉ. मिकी मेहता के सेशंस ने हर किसी का ध्यान खींचा। एसके डबल्यूएचडब्ल्यूएफ के सह- संस्थापक मुकेश मिश्रा और नरिशंत शर्मा ने बताया कि सुबह उद्घाटन सत्र आयोजित हुआ जिसमें राजेंद्र सेतिया, मिकी मेहता, पं. सुरेश मिश्रा, डॉ. सुधीर भंडारी, अमित अग्रवाल, जयश्री पेरीवाल, डॉ. संजीव शर्मा और डॉ. संदीप जैन ने दीप प्रज्जवलन कर फेस्ट की शुरुआत की। आयोजन समिति के चेयरमेन अमित अग्रवाल और संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने बताया कि पहले दिन बॉलीवुड एक्टर आशीष विद्यार्थी, अनूप सोनी, आरयूएचएस के वाइस चांसलर डॉ. सुधीर भंडारी के अलावा पुरुषोत्तम दिवाकर की फोटोग्राफी पर इंटर्नल हॉस्पिटल की सीपीआर देने की ट्रेनिंग पर और मेंस्ट्रुअल हाइजिन मैनेजमेंट पर भारती सिंह चौहान की वर्कशॉप भी हुई। शाम को फ्यूजन डांस ग्रुप का डांस कॉम्पीटिशन युद्ध हुआ।
जब आप गिरेंगे तो लोग जरूर हंसेंगे, लेकिन रुकना नहीं आशीष विद्यार्थी
MODERATO
बॉलीवुड एक्टर आशीष विद्यार्थी ने जीवन का फंडा शेयर किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो ये क्लियर कर लीजिए कि जो जिंदगी आप जी रहे हैं, वो अपने लिए जी रहे हैं। आगे बढ़ने के लिए खुद में भूख होना बहुत जरूरी है। आपको हमेशा आगे बढ़ते रहना है। इस दौरान आप गिरेंगे भी। इसके लिए मेंटल हेल्थ को बनाएं रखें। क्योंकि जब आप गिरेंगे तो लोग जरूर हंसेंगे, लेकिन रुकना नहीं है। मेंटल हेल्थ ही आपको आगे बढ़ते रहने के लिए मोटिवेट रखेगा। उन्होंने कहा कि कुछ भी खास करने के लिए थकना बहुत जरूरी है। क्योंकि जब थकोगे, तभी अपना 100 प्रतिशत दे पाओगे। अपने फिल्मी करियर के बारे में आशीष ने कहा कि मैंने अपने करियर में 200 से ज्यादा मूवीज की। मेरे लिए हर रोल बस एक किरदार ही रहा। उसमें मैंने पॉजिटिव या नेगेटिव नहीं देखा।

उद्योग से जन्मा दूध नुकसानदायक : डॉ. मिकी मेहता
होलिस्टिक हेल्थ गुरु एंड स्प्रिचुअल लाइफ कोच डॉ. मिकी मेहता अपने सेशन लगिविटी इम्युनिटी बायटेलिटी में अपनी संस्कृति और रीति रिवाज की
ओर वापस लौटने पर जोर दिया। मॉडरेटर जयश्री पेरीवाल द्वारा दूध के इस्तेमाल पर किए सवाल पर उन्होंने कहा कि आज हम जो दूध उपयोग में ले
रहे वो उद्योग से जन्मा है और नुकसानदायक है। इस दूध में फर्टिलाइजर और कई दवाओं का इस्तेमाल होता है जिससे इसके सारे न्यूट्रिशन खत्म हो जाते हैं। इसे अच्छा गाय का दूध लें जो आपके लिए प्रसाद है। गाय के सिर्फ बगल में बैठने भर से आपकी नकारात्मकता खत्म हो जाती है। इस दौरान डॉ. मिकी ने वेलनेस के 10 कमांडमेंट्स भी बताए ।
हमेशा तैयार रहें, जब मौका मिलेगा तो अच्छा परफॉर्म करेंगे : अनूप सोनी
एक्टर अनूप सोनी ने अपने सेशन वक्त सब बदल देगा में मॉडरेटर राजस्थान पत्रिका के स्टेट हेड अमित वाजपेई के साथ लाइफ में सक्सेज मंत्र पर बात की। उन्होंने कहा कि संघर्ष कभी खत्म नहीं होता, चाहे आप
शाहरुख खान बन जाएं। आपको हमेशा अपने काम, टैलेंट, तैयारी पर मेहनत करनी चाहिए। फिर जब आपको मौका मिलेगा तो अच्छा परफॉर्म कर पाएंगे। इस दौरान उन्होंने वक्त सब बदल लेता है कविता भी पढ़कर सुनाई। इस दौरान अमित वाजपेई ने कहा कि सोशल मीडिया पर ओवर एक्सपोजर के चक्कर में सेलिब्रिटीज ने अपना क्रेज कम कर लिया है। इसीलिए सोशल मीडिया सिर्फ आमजन ही नहीं, सभी को जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करना चाहिए। अनूप के कहा कि अगर आपको एक्टिंग में करियर बनाना है तो आपको अपना दिल दिमाग स्टील का बनाना पड़ेगा। यहां सक्सेज मीटर किसी भी दिशा में जा सकता है, इसीलिए मेंटली तैयार रहना जरूरी है। उन्होंने अपने शो क्राइम पेट्रोल के बारे में कहा कि ये शो 45 मिनट का था जिसमें मेरी स्क्रीन प्रेजेंस सिर्फ छह मिनट की थी। फिर भी लोगों का इतना प्यार मिला जो बहुत खुशी देता है।
15 प्रतिशत महिलाओं को प्रेगनेंसी के सटे महीने में यबिटीज
आरयूएचएस के वाइस चांसलर डॉ. सुधीर भंडारी के कहा कि डायबिटीज किसी भी उम्र में हो सकती है। खासतौर पर प्रेगनेंसी के दौरान इसका काफी ख्याल रखना चाहिए। 15 प्रतिशत महिलाओं में शुगर लेवल बढ़ जाता
है और वे प्रेगनेंसी डायबिटीज से ग्रसित हो जाती हैं। हालांकि इनमें से 90 प्रतिशत डिलीवरी के बाद ठीक भी हो जाती हैं। उन्होंने रिवर्स डायबिटीज के बारे में भी जानकारी दी कि वजन कम करके और लाइफ स्टाइल मॉडिफिकेशन से डायबिटीज रिवर्स की जा सकती है।

What is Hastapadasana?

What is Hastapadasana?

With our daily schedules running out of hand there is an utter need to find balance within us. The misbalance between our physical, emotional, and mental activities cause us to go through a lot of problems. And the way the world is progressing and people are becoming sick and ill of unknown ailments and diseases it becomes an important part of our life to look after ourselves and take care of our body and soul correctly. Yoga is the answer to balancing our chaotic lives, even when we’re running late for work.As far as doctors are concerned they have been coming up with natural treatments too and are guiding people to adopt a yogic lifestyle.

To guide you through the yoga exercises there are a lot of poses to learn. One such important pose is the Hastapadasana or the Forward Bend Pose.

What is Hastapadasana or ‘The Forward Bend Pose’?

“Hasta”: Hand, “Pada”: Foot, “Asana”: Pose; Hence the name Hastapadasana or the Forward Bend Pose. It is one of the twelve basic Yoga poses and is highly recommended to all the people who practice yoga to do it daily. It helps cure a lot of health problems, gives you flexibility and strength and also brings your concentration level. 

What are the benefits of Hastapadasana or the Forward Bend Pose?

The benefits of doing Yoga is numerous but with different poses focusing on different aspects of your body it becomes necessary to know about its possible effects and which areas they work on. With a little knowledge into the working of poses, one can customize their workout according to their body type and healing they need. Here are some of the benefits of Hastapadasana.

  • Gives body a nice shape
  • Helps in stretching the body muscles
  • Makes you hands, legs and chest stronger
  • Makes your blood circulate through streams and brings glow
  • Fights belly diseases
  • Burns those extra fat around your belly
  • Stimulates the blood circulation in hands and feet
  • Prevents from loss of hair
  • Makes the backbone flexible
  • Helps you balance your body
  • Makes you handle your own body weight

What you should know before doing the pose or Asana?

Yoga is an art that purifies the mind and soul and also works on making you fitter. It is no magic trick that will make changes in a day or two. Yoga requires constant dedication and concentration to achieve results. Yoga is a lifestyle you need to adopt where you choose a healthy life which is accompanied by healthy eating and living habits. Hastapadasana will make you stretch your body muscles and if you have never done this kind of pose, it may as well make you feel tired or breathe heavily. It is advised to complete the asana with concentration and calmness.

Who should do Hastapadasana or Forward Bend Pose?

Hastapadasana is recommended for all the yoga practicing people. It is one of the basic twelve yoga poses so no matter if you are a beginner or advanced yoga practitioner, this pose is for you. People who are over-weight, suffer from constipation, diarrhea, acidity, gastric problems, or have menstrual problems are recommended to practice hastapadasana. 

How to do the Hastapadasana or The Forward Bend Pose?

Hastapadasana is a standing pose and is best done when you are out in open. Follow the steps!

  1. Stand straight with your both legs touching each other.
  2. Take a deep breath and raise your hands overhead while inhaling.
  3. Now slowly start exhaling and bending your body forward so that your back stretches and your head descends forward.
  4. Hold your ankle with your hand and do not bend your knees.
  5. Hold on to this position for as long as you can
  6. Slowly start inhaling again and lifting back your body to the straight position
  7. Keep your hands down.

Do the repetitions and do it slowly.

How you should breathe while doing the Hastapadasana?

Breathing should be calm and content. You should take deep breaths and while performing the asana or the pose, you should inhale or exhale very slowly. The inhaling and exhaling gives strength to lungs and makes you calmer. At your holding position, you should hold your breaths too for a better result.

Precautions

Yoga needs care, concentration and calmness. It needs to be followed with dedication to achieve results. Hastapadasana is not advised for people suffering from:

  1. Cardiac problems
  2. Spinal problems
  3. Hernia
  4. Vertigo
  5. Hypertension
  6. Serious back pain
  7. Breathing problems

There are some basic precautions you should take and they are:

  1. Wear proper clothes that let you breathe and allow you to stretch and practice poses.
  2. Do it on ground, park or on a yoga mat
  3. Do not over do the poses
  4. Learn yoga before practicing
  5. Schedule your yoga time

The health benefits of Adho Mukha Svanasana or the downward facing dog pose

Yoga has been influencing lives of many people. A lot of us have found a way of life in yoga practices and postures. It guides us into healthy living, thinking and adoption of good things that help us in balancing our lives. Having been practices for ages now, Yoga had lost its way into history until it became famous again due to unavailability of alternate benefits or measures to improve our living. More and more people are devoting themselves into Yoga and transforming their lives into much simpler and peaceful way. If you have been wondering where to start doing the Yoga practices from, then you don’t have to worry anymore, there are series of exercises you have to start doing to achieve the perfect balance of mind and soul. To start with, we have this Adho Mukha Svanasana or the downward facing dog pose to help you get into yoga!

What is Adho Mukha Svanasana or the downward facing dog pose?

Adho Mukha Svanasana or the downward facing dog pose is a yoga pose that almost reflects a posture as that of a dog when bending downwards and hence the name. It is a great pose for any beginner to get started with yoga and has numerous benefits. It is easy, does not require much of strength and learning to perform and hence you can start doing it now!

What are the health benefits of Adho Mukha Svanasana or the downward facing dog pose?

Yoga in itself is very healthy and full of benefits and so it is very unlikely for any yoga pose to not have health benefits. When we are talking about the Adho Mukha Svanasana or the downward facing dog pose; it becomes essential to know how this simple and easy pose can help you in numerous ways to improve your health.

  • The stretching in this asana makes your body stretch and pick up the body weight through spine, and it also pulls the abdominal muscles to help build strength.
  • As this is an inversion pose making the hips and the lower back pull upwards and the head to face downwards, the reversal in the pull of gravity makes the blood circulation move through the brain. It helps fresh blood flow in the body.
  • The compression and relaxation of the digestive organs including the liver, kidneys and spleen make it easier to digest food and makes the organs healthier.
  • As the pose requires you to pull the weight of your body on hands and legs, it builds a pressure on the hands and leg’s muscles burning more calories and providing strength.
  • The inverse blood flow and the relaxation caused when holding on this position makes your mind calmer and peaceful and decreases anxiety.

What you should know before doing the asana?

The Adho Mukha Svanasana is known to relax the muscles, the release of endorphins caused when stretching the muscles, relaxes the body. If your joints or muscles feel tension anywhere while doing the pose, you might be doing it wrong. You have to be empty stomach before starting off with this pose. Make sure you balance your body right and don’t tilt left and right. This pose is a beginner friendly pose but if you feel that it is becoming tough for you than cater some guidance from a yoga teacher. There are some factors to be kept in mind before doing yoga:

Who should do Adho Mukha Svanasana or the downward facing dog pose?

Anyone who has back pain, or shoulders pain or has been on a weight loss journey is advised to practice this pose. It gives strength, flexibility and calms the muscles around the shoulders and spine. People facing issues with a straight spine are also proven to have beneficial results with this asana.

How to do the Adho Mukha Svanasana or the downward facing dog pose?

Practicing yoga is an easy task once you know how to do it. Learn the yoga from an expert or perform sometime in the guidance of an expert to master the art. Always have a relaxed and calm outlook towards yoga, as it is a very peaceful journey into a balanced life. You can perform this Adho Mukha Svanasana by following these steps:

Breathing methods while performing the asana

For any asana to be fruitful, you need to get your breathing correct before starting with the asana, during the asana and even after the asana is over. You should take deep long breathes and calm down your senses. While starting the pose slowly inhale and raise the lower body and hold on to your breath when you are holding the pose. While coming back to normal you need to exhale slowly until you end the asana. 

7 Easy Steps to Do Vriksasana and the Benefits Provided by this Asana

7 Easy Steps to Do Vriksasana and the Benefits Provided by this Asana

In the recent times, yoga has become one of the best modes of workout for people throughout the world.While yoga can help burn fat, it is not primarily used for losing weight, since the fat burning properties of yoga are quite limited and slow. So, why is yoga such a big deal then? One of the biggest silent killers in the recent times is stress. Stress can lead to some of the worst types of diseases and can, in fact, affect all the organs in your body. From ulcers to kidney damage, stress is one of the deadliest types of silent killers that we end up ignoring on a daily basis.

Effects of stress

To help you get an idea about the true effects of stress on modern society, it was found in a recent research that average high school students in today’s day and age have more anxiety than mental patients in the 1970’s. From studies to social media criticism and body image related issues, stress can stem from multiple sources and we don’t really do that much about it. With most students getting lesser and lesser sleep, stress can take years off your lives. Yoga is one of the best ways to get rid of stress from your mind and heal your body from the effects of stress.

How can yoga help? 

The inhalation and exhalation practices that are very common in yoga poses allows a huge influx of oxygen into your lungs, thus making your blood oxygen content higher, which allows the body to relax. Moreover, yoga is always combined with meditation that can help you to calm your mind and can improve your sleep levels and even possibly cure milder forms of insomnia. Moreover, the stretches that are a part of yoga poses can help you to get rid of a lot of the pains and aches that come from stress and can help to keep your body vitalized and rejuvenated. When combined with a good diet and adequate sleep, yoga can help you to live a better quality of life by making you more capable of dealing with the stress of modern life. 

With over hundreds of yoga poses to choose from, the Tree pose, or Vriksasana can be one of the best poses that can help you to improve balance, aids in stretching of some of the major muscle groups in the body as well as can help you to correct some common problems like flat feet and sciatica.

Here are the steps that you need to follow to do the Vrksasana.

  1. Stand with your feet slightly apart, your back straight and your arms on your sides with fingers pointed, or the Tadasana. From this neutral pose, gently shift your weight on the left foot, while keeping it firmly placed on the floor and bend the right knee. Now slowly reach down using your right hand and take a hold of your right ankle.
  2. Bring your right foot up and place the sole of your right foot against the side of your inner left thigh and if possible, you can press the right heel to reach the inner sides of your left groin with your toes pointing downwards to the floor. The centre of gravity of your pelvis should be straight over the left foot.
  3. Now rest your hand on the top rim of your pelvis, making sure that your pelvis is in the neutral position and the top rim is parallel to the floor.
  4. Now, try to lengthen your tailbone towards the floor and firmly press the sole of your right foot against your left thigh and counter it with resistance from the outer part of the left leg. Now, on to the hands.
  5. Press your hands together in the Anjali Mudra, or in a Namaste, with your palms touching each other, and stretch them to be centred directly above your head. The body should be balanced by aligning your centre of gravity in a straight line.
  6. Now fix your gaze onto any point roughly 4-5 feet away from you.
  7. Hold this position for anywhere between 30 seconds to a full minute, then step back into Tadasana while exhaling deeply and then repeat with the legs reversed. 

This is a level 1 yoga pose, which means that it is not really that difficult to do and doesn’t really take too much effort to perfect. While the regime is quite easy to do and does not really take a lot of twists and turns that can lead to you getting a sprained muscle or any type of an injury, there are a few cautionary measures you should take before attempting it. Avoid this pose if you have headache or low blood pressure. If you have high blood pressure, do not raise your arms overhead.

If you feel imbalanced during this pose, there are a couple of steps that you can use. The first step is to do a number of deep inhalation and exhalations to improve your concentration. If you are trying it for the first time, you can use a wall to support your back to prevent any type of unsteadiness. If you find your leg slipping from your thigh, just place a piece of folded sticky mat can be a quick fix. If you wish to take it to the next level, you can try doing it with your eyes closed for added improvement in concentration.

Benefits

  1. Vriksasana can help you to strengthen the spine and in the process, improve your balance and aids in improving your poise. 
  2. It helps in improving nerve and muscle co-ordination.
  3. It can help to tone your leg muscles and can strengthen the tendons and the ligaments in your leg.
  4. It can make your knees stronger and loosen up your hip joints.
  5. This pose can also help to strengthen your shoulder, eyes and inner ears.
  6. It is extremely effective in providing relief from sciatica and flat feet.
  7. This can help to build patience, making you flexible and sturdy at the same time.
  8. It can help you to deepen the thorax
  9. It can help to boost your concentration and sharpen your mental faculties and therefore, is recommended for students.

With a huge array of benefits, the Vriksasana is one of the easier yoga poses that you can try as a beginner. So, if your stress levels are high and you want to lead a longer and happier life, this yoga pose is a must for you, as it can help to significantly improve your posture, your concentration levels, as well as treat any pain in your legs.


Yog Guru Dhakaram

Ustrasana or ‘The Camel Pose’

Yogasana: Ustrasana or ‘The Camel Pose’

Yoga is the fitness mantra that the world is getting obsessed with today. Yoga combines the strength in body and mind and helps heal the body from within. It transforms the mind and body into a healthier, lighter and calmed-down state. People, who practice yoga regularly, preach yoga and its benefits, and have been influencing people to adopt more of it for a healthy and peaceful living. Yoga does not involve any excessive outside weight or training. It is the simplest of practice that makes natural changes in the body to make you more happy, peaceful, fit and calm. There are a lot of poses that work for different aspects of your body in Yoga. Today we are going to know about Ustrasana or The Camel Pose.

What is Ustrasana or ‘The Camel Pose’?

“Ustra” means camel and “asana’ means pose and hence the English name ‘The Camel Pose’. Ustrasana is a intermediate level Yogic pose known to open the heart chakra or the Anahata. It is counted in the intermediate pose because it is sometimes unachievable by beginner level practitioners of Yoga. So even if you have been doing Yoga since a month now, you can try doing Ustrasana. Ustrasana is known to be strengthening the body, adding flexibility to the body and improves digestion.

What are the benefits of Ustrasana or the camel pose?

The benefit of Yoga in itself is unlimited and vast. When we talk about a Yoga pose it should be understood that it has got dual benefits- One for the physical fitness and the other for the inner peace and healing. Ustrasana is beneficial for a lot of reasons:

  • Stretches the body
  • Improves digestion
  • Helps heal the lower back pain
  • Strengthens the body
  • Improves body posture
  • Helps to heal and balance the chakras
  • Helps fight the tension during menstrual periods
  • Cures constipation

What you should know before doing the asana

Yoga is one of the self-healing arts and Ustrasana is a highly practiced pose. Ustrasana works subtly towards healing and releasing body tensions. It helps loosen up the tight muscles and cures ailments like bad respiration, constipation, body ache, body fat etc. It has to be remembered that Ustrasana does not do a one day wonder and has to be practiced regularly for good results seen overtime.

Who should do Ustrasana?

Although Yoga is highly recommended for all age groups and kinds of people, but there are certain poses which are specifically beneficial to heal some diseases or fight against some specific pain. Ustrasana is recommended for people having asthma, spondylitis, diabetes, and digestive problems, overweight etc. It is also proven beneficial for constipation, menstrual problems, reducing fat in thighs and arms, peace and restoration of mind. 

How to do the Ustrasana or The Camel Pose?

Doing Yoga poses needs quiet and peaceful place. It also requires a Yoga mat to protect you from the hard scratch from the floor and give a comfortable resting. Just relax your senses and start with the method below:

  1. Kneel on the Yoga mat and put your hands on your hips
  2. Make sure your shoulder and knees are in line and the soul of the foot is facing upwards.
  3. Inhale and pull your tailbone towards your pubis. And along with it raise your body up with your hands holding the soul of your feet. Raise the body till the arc is formed making you feel like the heart has been raise very high.
  4. Do not strain on your body, try to keep it neutral and feel a stretch.
  5. Stay in the posture for 20 seconds.
  6. Breathe out and slowly come down to the starting position.

Make sure the whole process is done really slowly, relaxed and does not harm you in any way.

Breathing methods while performing the Asana

While performing yogic asanas it is very essential to breathe right to achieve maximum benefits. In Ustrasana you need to Inhale deeply and then start with the pose. You can hold your breathing while holding the pose for twenty seconds or you can breathe once or twice while on hold. When you are returning to the relaxation mode, you need to exhale slowly until you end the pose. Keep your breath deep and slow.

Precautions

Yogic asanas require certain comfortable and calm environment to practice them. They are:

  • Wear comfortable clothes! Yogic asanas should be done in proper comfortable clothes that help your body breathe and stretch and are not attracting glances.
  • On a soft surface. Use that yoga mat or buy one or if you are comfortable use a bed-sheet. Never do yoga asanas on bed or sofa.
  • Quiet and calm place: Yoga needs concentration, peace and relaxed mind and so try to stay at bay with noise and repercussions.

On a proper time. Morning is the best time to practice yoga but if you are not a morning person you can choose to do it in evenings during sunset.

Under a trainer. If you are a beginner, it is highly advised that you take guidance of a trainer and learn Yoga before practicing daily.

Yog Guru Dhakaram