नमस्कार का योगिक महत्व
नमस्कार – केवल शिष्टाचार नहीं
भारतीय संस्कृति में नमस्कार केवल एक सामाजिक अभिवादन नहीं, बल्कि एक गहन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है।
जब हम नमस्कार को सही मुद्रा, सजगता और भाव से करते हैं, तो यह नम्रता, कृतज्ञता और आत्मिक जुड़ाव का प्रतीक बन जाता है।
नमस्कार का अर्थ
‘नमस्कार’ शब्द संस्कृत के “नम:” से बना है, जिसका अर्थ है – झुकना, विनम्र होना, स्वागत करना।
इसमें अहंकार का त्याग और सामने वाले के अस्तित्व का सम्मान छिपा होता है।

योगिक दृष्टि से नमस्कार की विधि
- दोनों हाथों की हथेलियाँ जोड़ें।
- अंगूठे छाती के मध्य (हृदय स्थल) को स्पर्श करें।
- हथेलियों की आकृति त्रिभुज (ऊपर की ओर शिखर जैसी) बनाएं।
- शरीर सीधा रखें, आँखें बंद हो सकती हैं, मन शांत रहे।
➡️ यह त्रिभुज आकृति हमें मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, पिरामिड आदि के शिखरों की याद दिलाती है — जो आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्रीकरण का प्रतीक हैं।



नमस्कार से मिलने वाले लाभ
- शरीर की सूर्य (दायाँ) और चंद्र (बायाँ) ऊर्जा संतुलित होती है।
- हृदय चक्र (अनाहत चक्र) सक्रिय होकर प्रेम, दया और करुणा उत्पन्न करता है।
- दोनों हथेलियों को जोड़ने से मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध सक्रिय होते हैं।
- मानसिक संतुलन, ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है।
- छाती के पास हथेलियाँ रखने से हृदय गति संतुलित होती है और तनाव कम होता है।
- यह parasympathetic nervous system को सक्रिय कर शांति और विश्रांति देता है।
आध्यात्मिक महत्त्व
जब हम नमस्कार को इस भाव से करते हैं कि —
“आपके भीतर जो दिव्यता है, उसे मैं प्रणाम करता हूँ”,
तब यह एक साधना बन जाता है।


शास्त्रों में:
- मनुस्मृति और योगसूत्र में नमस्कार को “नम्रता की अभिव्यक्ति” और “आत्म-शुद्धि की क्रिया” कहा गया है।
- भगवद्गीता (अध्याय 11) में अर्जुन श्रीकृष्ण को नमस्कार करते हुए कहते हैं:
“साक्षात्कृतं मे त्वमात्मानं… नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः”
— अर्जुन ने भगवान के विराट रूप को देखकर हजार बार नमस्कार किया, जो आत्मिक समर्पण का प्रतीक है।
निष्कर्ष
नमस्कार केवल अभिवादन की परंपरा नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक विज्ञान है।
यदि इसे सजगता, विनम्रता और कृतज्ञता के साथ किया जाए, तो यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का साधन बन जाता है।
आइए, नमस्कार को केवल औपचारिकता न मानकर अपने जीवन में इसे योगिक और आत्मिक अभ्यास बनाएं —
जो हमारे भीतर विनम्रता, प्रेम और एकता का संचार करे।
आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें।
धन्यवाद!
योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान








































