द्विपाद वृत्ताकार क्रिया: पेट-कमर की चर्बी पिघलाने का रामबाण उपाय
आप सभी का स्वागत है!
एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में हमारे साथ जुड़ने के लिए धन्यवाद। आज हम द्विपाद वृत्ताकार क्रिया के बारे में चर्चा करेंगे—एक ऐसी क्रिया जो पेट और कमर पर जमी अवांछित चर्बी को प्रभावी ढंग से कम करती है।





क्रिया करने की विधि
- प्रारंभिक स्थिति:
- पीठ के बल लेट जाएँ।
- कोहनियों को ज़मीन पर टिकाकर शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाएँ।
- छाती को तानकर रखें।
- कंधे और कोहनी 90° अंश पर हों तथा एक सीध में रहें।
- दक्षिणावृत्त (घड़ी की दिशा में):
- दोनों पैरों को धीरे-धीरे दाईं ओर से उठाएँ।
- बड़ा गोलाकार घुमाव बनाते हुए पैरों को clockwise घुमाएँ।
- एक चक्र पूरा करने में 15-20 सेकंड लगाएँ।
- थकान होने पर शवासन में विश्राम करें।




- वामावृत्त (घड़ी की विपरीत दिशा में):
- अब पैरों को बाईं ओर से उठाएँ।
- anti-clockwise दिशा में बड़ा गोला बनाएँ।
- दक्षिणावृत्त के बराबर समय तक घुमाएँ।
- दोनों दिशाओं में बराबर चक्र पूरे करने के बाद शवासन में आराम करें।



अवधि
- सामान्य व्यक्ति:
दक्षिणावृत्त + वामावृत्त के 4-6 चक्र (कुल 3 मिनट)। - वजन घटाने हेतु:
प्रत्येक दिशा में 2 मिनट (कुल 4 मिनट)।
विशेष सावधानियाँ
- कंधे और कोहनी हमेशा 90° अंश व एक सीध में रखें।
- हथेलियाँ ज़मीन पर स्थिर टिकी हों, कोहनियाँ पास-पास रखें।
- गर्दन पर दबाव न डालें। छाती फुलाकर रखें।
- घुटने सीधे रहें।
- न करें यदि:
- गर्भावस्था या माहवारी चल रही हो।
- सावधानी से करें:
- गर्दन दर्द/सूजन हो तो पीठ के बल लेटकर करें।
- पेट के अल्सर या कमर दर्द में एक पैर से अभ्यास करें।
- क्रिया करने में जल्दबाज़ी न करें—शांत व सहज भाव से करें।
लाभ
- पेट-कमर की चर्बी कम होती है।
- पाचन तंत्र मजबूत होता है।
- पेट की मांसपेशियों की प्राकृतिक मालिश।
- नितंबों की चर्बी घटाने में सहायक।
“इस क्रिया का पूरा लाभ पाने के लिए कोहनियों के बल उठकर करें। लेटकर करने पर कमर पर तनाव पड़ता है, जिससे प्रभाव घट जाता है।”
आप सभी का हृदय से आभार। स्वस्थ रहें, मस्त रहें!
योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान































































