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27-Apr-2026

चक्रासन: विधि, लाभ, सावधानियाँ और सही अभ्यास

योगाचार्य ढाकाराम

चक्रासन क्या है?

चक्रासन योग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आसन है, जिसमें शरीर को पीछे की ओर मोड़कर पहिए जैसा आकार बनाया जाता है। इसलिए इसे चक्रासन कहा जाता है। अंग्रेज़ी में इसे Wheel Pose भी कहते हैं। यह आसन शरीर को लचीलापन, शक्ति और ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।

परंपरागत योग ग्रंथों में चक्रासन का विशेष महत्व बताया गया है। इसे ऊर्ध्व धनुरासन के नाम से भी जाना जाता है, और गुरुजी बी.के.एस. अयंगर की योग परंपरा में भी यही नाम प्रचलित है। हठयोग के प्रमुख ग्रंथ हठ रत्नावली (Hatha Ratnavali), जिसकी रचना श्रीनिवास योगी ने की मानी जाती है, उसमें भी चक्रासन का उल्लेख मिलता है। इस ग्रंथ में इसे भगवान शिव द्वारा बताए गए 84 प्रमुख आसनों में से एक महत्वपूर्ण आसन माना गया है, जो शरीर की लचीलापन और शक्ति को बढ़ाने में सहायक है।

चक्रासन का महत्व

चक्रासन केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि संपूर्ण शरीर को सक्रिय करने वाला आसन है। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, छाती को खोलता है, और शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति अधिक चुस्त, स्फूर्तिवान और आत्मविश्वासी महसूस करता है।

चक्रासन करने की विधि

चक्रासन करने के लिए योगा मैट, दरी या कंबल पर सावधानीपूर्वक अभ्यास करें।

  1. सबसे पहले शवासन की स्थिति में पीठ के बल लेट जाएँ।
  2. दोनों घुटनों को मोड़ें और एड़ियों को नितंबों के पास रखें।
  3. दोनों पैरों के बीच लगभग कंधों जितना फासला रखें।
  4. अब धीरे-धीरे दोनों हाथों को उठाकर सिर के ऊपर ले जाएँ।
  5. कोहनियों को मोड़कर दोनों हथेलियों को कंधों के पास, जमीन पर रखें।
  6. श्वास भरते हुए हथेलियों और पैरों पर दबाव दें और धीरे-धीरे कंधों, छाती और फिर कमर को ऊपर उठाएँ।
  7. अपनी क्षमता के अनुसार शरीर को ऊपर की ओर ले जाएँ।
  8. धीरे-धीरे घुटनों को सीधा करने का प्रयास करें और छाती को पूरी तरह खोलें।
  9. इस अवस्था में 15 से 20 सेकंड तक रहें। श्वास सामान्य रखें।
  10. जब शरीर अभ्यस्त हो जाए, तो समय बढ़ाकर 1 से 2 मिनट तक स्थिर रहने का अभ्यास कर सकते हैं।
  11. आसन से बाहर आते समय उसी क्रम के विपरीत धीरे-धीरे वापस आएँ।
  12. पहले सिर और कंधों को जमीन पर रखें, फिर कमर और नितंबों को नीचे लाएँ।
  13. हाथों को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर बगल में ले आएँ और पैरों को सीधा करें।
  14. अंत में शवासन में विश्राम करें और कम से कम 1 मिनट तक शरीर और श्वास का अवलोकन करें।

चक्रासन के लाभ

चक्रासन के नियमित अभ्यास से अनेक लाभ मिलते हैं:

  • मेरुदंड लचीला और मजबूत बनता है
  • पूरे शरीर में चुस्ती और स्फूर्ति आती है
  • कंधे और कलाइयाँ मजबूत होती हैं
  • शोल्डर ब्लेड और पीठ की मांसपेशियाँ सुदृढ़ होती हैं
  • हृदय और फेफड़ों के लिए यह बहुत लाभकारी माना जाता है
  • छाती का विस्तार होता है और श्वास-प्रश्वास बेहतर होता है
  • शरीर में ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता बढ़ती है

सावधानियाँ

चक्रासन करते समय विशेष सावधानी रखना बहुत ज़रूरी है। निम्न स्थितियों में यह आसन नहीं करना चाहिए:

  • जिनकी कमर में दर्द हो
  • प्रेगनेंसी के दौरान
  • मासिक धर्म के समय
  • Frozen Shoulder की समस्या हो
  • जिनको कंधे, गर्दन या पीठ में गंभीर चोट/समस्या हो

यदि शरीर में किसी प्रकार की असुविधा हो, तो अभ्यास तुरंत रोक देना चाहिए।

एक महत्वपूर्ण बात

जब भी आप चक्रासन या किसी भी पीछे झुकने वाले आसन का अभ्यास करें, तो ध्यान रखें कि झुकाव कमर से नहीं, बल्कि छाती के विस्तार से होना चाहिए। पीछे झुकने का अर्थ केवल कमर पर दबाव डालना नहीं है। छाती को अधिक से अधिक खोलना चाहिए, ताकि कमर पर अनावश्यक दबाव न पड़े। गलत तरीके से करने पर नुकसान भी हो सकता है।

चक्रासन एक अत्यंत प्रभावशाली योगासन है, जो शरीर, श्वास और मन—तीनों को सक्रिय करता है। सही विधि, संयम और सावधानी के साथ इसका अभ्यास करने पर यह शरीर को लचीलापन, शक्ति और नई ऊर्जा प्रदान करता है। नियमित अभ्यास से जीवन में संतुलन, प्रसन्नता और स्वास्थ्य का अनुभव होता है।

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

Yogacharya Dhakaram
Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.