सही तरीके से आलथी-पालथी लगाकर कैसे बैठें

प्यारे मित्रों,
हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार स्वीकार करें।
“एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” श्रृंखला में आपका हार्दिक स्वागत है।
आज का विषय है —
“आपको कैसे बैठना चाहिए? आलथी-पालथी लगाकर सही ढंग से बैठने की विधि।”
क्यों ज़रूरी है सही तरीके से बैठना
यदि हम गलत तरीके से बैठते हैं, तो हमारे कमर, घुटनों, पिंडलियों और टखनों में दर्द हो सकता है।
शरीर का असंतुलित भार कई शारीरिक समस्याओं का कारण बनता है।
यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कोई गाड़ी एक ओर झुक जाए —
उसे मरम्मत की आवश्यकता होती है।
ठीक वैसे ही जब हमारा शरीर झुकता है, तो हमें असुविधा का अनुभव होता है।



शरीर का निरीक्षण करें
अब आप आलथी-पालथी लगाकर बैठें और आंखें बंद करें।
महसूस करें कि आपके शरीर का भार कहाँ पड़ रहा है —
क्या यह दाहिने कूल्हे पर है या बाएँ कूल्हे पर?
यदि भार किसी एक ओर अधिक महसूस हो रहा है,
तो समझिए कि आपकी बैठने की मुद्रा सही नहीं है।
गलत मुद्रा में बैठने पर
- पेट आगे की ओर निकल आता है
- छाती दब जाती है
- कमर झुक जाती है
सही मुद्रा अपनाने की विधि
जब हम सही बैठते हैं, तो
- पेट अंदर खिंचा हुआ होता है
- कमर सीधी रहती है
- छाती स्वाभाविक रूप से उभरी होती है
अब इस सरल अभ्यास को करें –
- दाहिने नितंब को हथेली से सहारा देकर थोड़ा दाहिनी ओर खींचें।
- बाएँ नितंब को हथेली से सहारा देकर थोड़ा बाईं ओर खींचें।
- अब आंखें बंद करें और देखें — शरीर का भार अब दोनों नितंबों पर समान रूप से वितरित है।
- पेट को हल्का खींचें और छाती को ऊपर उठने दें।




आप पाएंगे कि अब शरीर संतुलित और स्थिर महसूस कर रहा है।
बैठने की चरणबद्ध प्रक्रिया
- दोनों पैरों को सामने फैलाएं।
- दाहिना पैर मोड़कर बाईं जांघ के नीचे रखें।
- बायां पैर मोड़कर दाहिनी जांघ के नीचे रखें।
- दोनों नितंबों को फिर से व्यवस्थित करें (जैसा ऊपर बताया गया)।
- सुनिश्चित करें कि —
- पैर सही स्थिति में हों
- पेट अंदर की ओर खिंचा हुआ हो
- छाती खुली हुई हो
- कमर सीधी हो
थकान होने पर मुद्रा परिवर्तन
यदि कुछ समय बाद थकान महसूस हो,
तो पैरों को सामने फैलाएं और अब विपरीत क्रम में बैठें —
पहले बायां पैर दाहिनी जांघ के नीचे,
फिर दाहिना पैर बाईं जांघ के नीचे।
यह अभ्यास शरीर में संतुलन और लचीलापन बनाए रखता है।
अब आंखें बंद करें, गहरी सांस लें, और परिवर्तन को महसूस करें।
जमीन से जुड़ने का महत्व
प्यारे मित्रों, जब हम आलथी-पालथी मारकर बैठते हैं,
तो हम धरती से जुड़े रहते हैं।
यह जुड़ाव हमें स्थिरता, शांति और गहराई का अनुभव कराता है।
आप सही तरीके से बैठिए,
अपने शरीर के संकेतों को समझिए,
और स्वास्थ्य व आनंद का लाभ लीजिए।
आपका दिन मंगलमय हो।
– योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान









