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26-May-2026

ध्यान – जहाँ चाह वहाँ राह

योगाचार्य ढाकाराम

प्यारे मित्रों, आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार।
एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। आज हम ध्यान के विषय में बात करेंगे।

ध्यान क्या है?

अक्सर लोग सोचते हैं कि ध्यान बहुत मुश्किल है। मैं इसे न तो बहुत आसान कहूँगा और न ही बहुत कठिन। यदि ध्यान करना आ जाए, तो यह वास्तव में सरल हो जाता है। ध्यान का मूल अर्थ है वर्तमान में रहना

वर्तमान में रहना क्यों कठिन लगता है?

हमारा मन घड़ी के पेंडुलम की तरह कभी भविष्य में तो कभी भूतकाल में झूलता रहता है। इसी कारण वर्तमान में टिकना चुनौतीपूर्ण लगता है। आज हम एक ऐसी सरल तकनीक जानेंगे जिससे ध्यान लगाना सहज हो जाएगा।

विचारों के साथ कैसा व्यवहार करें?

अक्सर कहा जाता है कि ध्यान “यहाँ नहीं लगना चाहिए” या “वहाँ नहीं लगना चाहिए”, पर यह धारणा सही नहीं है। जैसे छोटे बच्चों को जब किसी बात से मना किया जाता है, तो वे वही करते हैं—वैसे ही मन भी करता है।
ध्यान में हमें विचारों को आने देना है और जाने देना है। विचार अच्छे हों या बुरे—उन्हें रोकना नहीं, बस द्रष्टा भाव से देखना है।

द्रष्टा भाव को समझें

मान लीजिए आप सड़क किनारे खड़े हैं। आप आती-जाती गाड़ियों को रोकने की कोशिश नहीं करते, बस देखते हैं। उसी तरह, विचारों को केवल देखना है—न पकड़ना है, न भगाना है।

ध्यान की तैयारी कैसे करें?

ध्यान के लिए किसी भी सुखपूर्वक आसन में बैठें।

  • कमर और गर्दन बिल्कुल सीधी रखें।
  • छाती खुली रहे और पेट की मांसपेशियाँ शिथिल हों।
  • यदि कमर में दर्द हो, तो कूल्हों के नीचे तकिया या लकड़ी का पाटा रखें।
  • हाथों को ध्यान मुद्रा में जाँघों पर रखें।

ध्यान की प्रक्रिया

आँखों को कोमलता से बंद करें। चेहरे और गर्दन की मांसपेशियों को ढीला छोड़ दें। बाहरी विचारों पर ध्यान न देकर, भीतर की ओर देखने का प्रयास करें।
विचार आएँगे—अच्छे भी, बुरे भी। न तो बुरे विचारों को हटाने का प्रयास करें और न अच्छे विचारों में उलझें। बस चलचित्र की तरह देखते रहें।

विचार धीरे-धीरे कैसे शांत होते हैं?

जैसे कोई मेहमान आता है और हम उस पर ध्यान नहीं देते, तो वह बार-बार नहीं आता। वैसे ही, जब हम विचारों को तवज्जो नहीं देते, तो वे स्वयं शांत होने लगते हैं।

ध्यान का अभ्यास कब और कहाँ?

ध्यान के लिए कोई विशेष स्थान आवश्यक नहीं। भीड़-भाड़ में भी ध्यान किया जा सकता है। प्रतिदिन कम से कम 5–10 मिनट अवश्य निकालें। यदि आप रोज ध्यान करेंगे, तो 7 दिनों के भीतर अपने शरीर और मन में परिवर्तन अनुभव करेंगे।

ध्यान के लाभ

जब भी तनाव हो, ध्यान का अभ्यास अवश्य करें। ध्यान आपको शांत, संतुलित और आनंदित बनाता है।

इसी के साथ आप सभी का बहुत-बहुत आभार।
आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें।
आप सभी को नमन। 🙏

आप सभी का बहुत-बहुत आभार।

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

Yogacharya Dhakaram
Yogacharya Dhakaram, a beacon of yogic wisdom and well-being, invites you to explore the transformative power of yoga, nurturing body, mind, and spirit. His compassionate approach and holistic teachings guide you on a journey towards health and inner peace.

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