चमकती त्वचा के लिए सबसे बेहतरीन योग: सिंहासन
हरि ओम, आप सभी को मुस्कुराता हुआ नमस्कार! “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में आप सभी का हृदय से स्वागत। खुशियों की इसी कड़ी में आज हम एक बहुत ही विशेष विषय पर बात करेंगे—’खूबसूरती के लिए योग‘।
मेरा मानना है कि योग और सुंदरता एक-दूसरे के पूरक हैं। जब आप योग के माध्यम से भीतर से आनंदित होते हैं, तो वह प्राकृतिक चमक आपके चेहरे पर अपने आप छलकने लगती है। आज हम एक ऐसे आसन की चर्चा करेंगे जो आपके चेहरे की आभा को कई गुना बढ़ा देगा, और वह है—सिंहासन।

प्राकृतिक सुंदरता बनाम कृत्रिम उपचार
अक्सर लोग चमकती त्वचा के लिए ब्यूटी पार्लर का सहारा लेते हैं, लेकिन यदि आप सिंहासन का नियमित अभ्यास करते हैं, तो आपको इनकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आइए समझते हैं कि क्यों सिंहासन कृत्रिम सौंदर्य उपचारों से कहीं बेहतर है:
- जहाँ ब्यूटी पार्लर के उपचार महंगे होते हैं, वहीं सिंहासन पूरी तरह से निःशुल्क है और जीवनभर लाभ देता है।
- कृत्रिम उपचार केवल त्वचा की बाहरी सतह पर काम करते हैं, जबकि सिंहासन मांसपेशियों को भीतर से सक्रिय कर रक्त संचार बढ़ाता है।
- पार्लर के उपचार केवल त्वचा तक सीमित हैं, जबकि सिंहासन से थायराइड, फेफड़ों और हृदय को भी मजबूती मिलती है।
- रासायनिक उपचारों का असर कुछ दिनों में खत्म हो जाता है, जबकि योग के परिणाम स्थायी और दीर्घकालिक होते हैं।
- ब्यूटी उत्पादों के रसायनों से एलर्जी का डर रहता है, लेकिन सिंहासन पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है।
- सिंहासन केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का भी खजाना है:
- ग्रंथि स्वास्थ्य: यह गले की ग्रंथियों, जैसे थायराइड और पैराथायराइड के लिए रामबाण है।
- फेफड़े और हृदय: दहाड़ते समय जब हम पूरी श्वास बाहर निकालते हैं, तो फेफड़े खाली हो जाते हैं और दोबारा ताजी ऑक्सीजन मिलने से हृदय को नई शक्ति मिलती है।
- चेहरे की चमक: यह चेहरे की सभी मांसपेशियों (गाल, आंखें, ठुड्डी) का व्यायाम कर उन्हें टोन करता है।
- वाणी शुद्धि: हकलाने या आवाज की समस्या वाले लोगों के लिए यह बहुत लाभकारी है।


सिंहासन करने की सरल विधि
आप इसे अपनी क्षमतानुसार जमीन पर, कुर्सी पर या बिस्तर पर बैठकर भी कर सकते हैं:
- सबसे पहले अपने दोनों हाथों और घुटनों के बल आएं, जैसे एक शेर खड़ा होता है।
- गहरा श्वास लेते हुए शरीर को थोड़ा पीछे की ओर ले जाएं।
- अपनी जीभ को पूरी तरह बाहर निकाल कर श्वास छोड़ते हुए शरीर को आगे की ओर लाएं, सीना तानें, मुंह पूरा खोलें और अपनी जीभ को ठुड्डी की तरफ पूरी बाहर निकालें।
- अपनी आंखों को दोनों भौहों के बीच (भ्रूमध्य) केंद्रित करें, जहाँ हम तिलक लगाते हैं।
- गले से एक शेर की तरह गरजने वाली आवाज निकालें जब तक कि पूरी श्वास खत्म न हो जाए। उसके बाद धीरे से जीभ को अंदर लेकर विश्राम करेंगे
- इसके बाद धीरे से बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें।
आसन के बाद सबसे महत्वपूर्ण है ‘अवलोकन’। शांत बैठकर महसूस करें कि आपके चेहरे और गले में क्या संवेदनाएं हो रही हैं। यही सूक्ष्म ध्यान (Meditation) है। इसे रोज 3 से 5 मिनट तक करें।
मेरा आप सभी से निवेदन है कि आप स्वयं इसका अनुभव करें और अपनी प्राकृतिक खूबसूरती को निखारें। यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगे, तो इसे सबके साथ साझा करें ताकि हर कोई योग का लाभ उठा सके।
आप सभी खुश रहें, स्वस्थ रहें और परमात्मा की कृपा आप पर बनी रहे।
हरि ओम!
योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान










