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सोफे और कुर्सी पर बैठने का सही तरीका: कमर दर्द से बचाव

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का फिर से स्वागत है। आज हम बात करेंगे आप सोफे पर कैसे बैठे और अपने आप को इससे होने वाली तकलीफों से बचाए। गलत तरीके से बैठने से कमर दर्द, स्लिप डिस्क और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

सोफे पर बैठते समय:

  • ठोस सोफा चुनें: नरम सोफे से कमर पर दबाव बढ़ता है।
  • कंबल या बेडशीट का उपयोग करें: यह कमर को सीधा रखने में मदद करता है।
  • घुटने कूल्हे से नीचे रखें: पैर लटकाकर न बैठें।
  • सीधे बैठें: छाती फूली रहेगी और ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होगा।

कुर्सी पर बैठते समय:

  • कमर सीधी रखें: आगे झुककर न बैठें।
  • टेबल ऊंची रखें: झुककर काम करने से बचें।
  • पैर जमीन पर टिकाएं: घुटने कूल्हे से नीचे रखें।

पैर लटकाकर बैठने के नुकसान:

  • पैरों में सूजन
  • कमर दर्द
  • स्लिप डिस्क

आप भी आज से ही सही तरीके से बैठने की आदत डालें।

अतिरिक्त टिप्स:

  • अपने बैठने की आदतों पर ध्यान दें।
  • हर 30 मिनट में उठकर थोड़ा टहलें।
  • नियमित रूप से योग और व्यायाम करें।
  • अच्छी मुद्रा बनाए रखें।

तो प्यारे मित्रों इसी के साथ आपका बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत आभार,

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक योगापीस संस्थान
अन्य जानकारी के लिए क्लिक करें www.dhakaram.com

पेट की समस्याओं का जड़ या कारण: नाभि का खिसकना

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। आप सभी हमारा नमस्कार स्वीकार करें। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। आप सभी आनंद में होंगे। आज हम बात करने वाले हैं नाभि खिसकने के बारे में। नाभि खिसकना यानी धरण यह आप सभी जानते होंगे। हमारे पेट में 70 से 80 प्रतिशत बीमारियों का कारण हमारे पेट में नाभि का खिसकना हो सकता है। जैसे एसिडिटी, गैस्ट्रिक, कब्ज, अपच, उल्टी का मन, दस्त, मन खराब होना और भूख का ना लगना ऐसे अनेक प्रकार की बीमारियां हैं जो हमारे नाभि खिसकने से होती हैं। मेडिकल साइंस में धरण को नहीं मानते हैं लेकिन कुछ डॉक्टर आजकल इसे मानने लग गए हैं।

आज हम बात करेंगे धरण क्या है वह क्यों होती है? धरण को हम कैसे सही कर सकते हैं? नाभि हमारे शरीर का बहुत महत्वपूर्ण भाग है। जब बच्चा मां के पेट में होता है तो गर्भ में शिशु अपना आहार नाभि के माध्यम से ही ग्रहण करता है। नाभि को शक्ति का केंद्र भी माना जाता है इसलिए हमारे मुख से नाभि ज्यादा महत्वपूर्ण है। जब हम नाभि पर हाथ रखते हैं तो हमें हृदय की जैसी धडकनें महसूस होती हैं यही हमारी धरण होती है। हमारी नाभि अधिक वजन उठाने से, झटका लगने से खिसक जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं यह क्यों खिसकती है? जब हमारी पेट की मांसपेशियां कमजोर होती है तो हमारी नाभि खिसकती है। हमारी नाभि नीचे की ओर खिसक जाने से दस्त हो सकते हैं। अगर हमारी नाभि ऊपर की ओर खिसकती है तो हमें उल्टी, पेट में जलन या गैस हो सकते हैं। नाभि का खिसकना हमारे अंगों को प्रभावित करता है। नाभि जिस भी तरफ खिसकती है उसी तरफ के अंग से संबंधित समस्या उत्पन्न हो सकती है।

धरण क्या है?

धरण नाभि का अपनी जगह से खिसक जाना है। यह अधिक वजन उठाने, झटका लगने, या पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण हो सकता है।

धरण के लक्षण:

  • पेट में दर्द
  • एसिडिटी
  • गैस्ट्रिक
  • कब्ज
  • अपच
  • उल्टी
  • दस्त
  • मन खराब होना
  • भूख न लगना

धरण का निदान:

धरण का निदान करने के लिए कई तरीके हैं:

  • हाथों से: अपनी हथेलियों की रेखाओं को मिलाएं। यदि रेखाएं एक सीध में हैं, तो धरण नहीं है। यदि रेखाएं ऊपर-नीचे हैं, तो धरण हो सकती है।
  • रस्सी से: नाभि से निप्पल और पैर के अंगूठे तक की दूरी को नापें। यदि दूरी में अंतर है, तो धरण हो सकती है।
  • धड़कन से: अपनी उंगलियों को नाभि पर रखकर धड़कन को महसूस करें। यदि कहीं दर्द के साथ धड़कन महसूस हो, तो धरण उसी दिशा में हो सकती है।

धरण का उपचार:

धरण का उपचार करने के लिए कई तरीके हैं:

  • योग: नौकासन, उत्तानपादासन, और जठर परिवर्तनआसान पेट की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं और धरण को ठीक करने में मदद करते हैं।
  • नाभि बिठाना: योगाचार्य या धरण बिठाने वाले व्यक्ति से नाभि को सही करवाया जा सकता है।
  • घरेलू उपचार: सरसों के तेल, जैतून के तेल, या नीलगिरी के तेल से नाभि की मालिश करना धरण को ठीक करने में मदद कर सकता है।

धरण से बचाव:

  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • स्वस्थ भोजन खाएं।
  • अधिक वजन न उठाएं।
  • झटके से बचें।

ध्यान दें:

  • धरण का उपचार करने के बाद कुछ ना कुछ जरूर खाएं।
  • धरण का उपचार करते समय उठते समय अपने शरीर को सीधा रखें।

आप सभी का बहुत-बहुत आभार, आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

पीछे झुकने का वैज्ञानिक तरीका

हरि ओम प्यारे मित्रों!

आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है। आज हम चर्चा करेंगे पीछे कैसे झुके।

गलत तरीके से पीछे झुकने से क्या होता है?

  • कमर में दर्द हो सकता है
  • शरीर की संरचना बिगड़ सकती है

सही तरीके से पीछे झुकने के फायदे:

  • मेरुदंड के लिए बहुत अच्छा
  • फेफड़ों और हृदय के लिए फायदेमंद

पीछे झुकने का तरीका:

  • अर्द्ध चक्रासन:
    1. अपने हाथों को नितंबों पर रखते हुए नितंबों को नीचे दबाएं और छाती को बाहर निकालें।
    2. आंखें बंद करके सांस लेते हुए छाती को ज्यादा से ज्यादा फुलाएं।
    3. गर्दन को तनाव मुक्त रखें।
    4. ध्यान कंधों और छाती की मांसपेशियों पर केंद्रित करें।
    5. आंखों को बिना खोले धीरे-धीरे हाथों को नीचे लाएं।
    6. आंखें बंद करके शरीर में होने वाले परिवर्तन को महसूस करें।
    7. ध्यान कंधों और छाती की मांसपेशियों पर केंद्रित करें।
    8. पीछे झुकने के लिए जल्दबाजी न करें।
    9. रोजाना अभ्यास से अच्छा परिणाम मिलेगा।
  • दूसरा तरीका:
    1. हाथों को कमर के पीछे ले जाकर उंगलियों को आपस में फंसाकर कैंची बना लें।
    2. छाती को आगे की ओर ज्यादा से ज्यादा फुलाएं और गर्दन को पीछे रखें।
    3. इस स्थिति में कम से कम एक से दो मिनट रुकने का प्रयास करें।
    4. जब रुकना मुश्किल हो जाए तो धीरे-धीरे आसन से वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।
    5. आंखें बंद करके शरीर में होने वाले परिवर्तन को महसूस करें।
    6. आंखें बंद करके आसन करने से मन में शांति और आनंद की अनुभूति होगी।
    7. कंधे और गर्दन में जकड़न या दर्द होने पर यह बहुत महत्वपूर्ण है।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • आगे झुकते समय कूल्हों के जोड़ से झुकें, पीठ सीधी रखें।
  • अर्ध चक्रासन करते समय छाती को फुलाते हुए ऊपरी भाग से पीछे झुकें।
  • मेरुदंड की कशेरुकाओं को धीरे-धीरे मोड़ें।

लाभ:

  • छाती, फेफड़ों और हृदय के लिए फायदेमंद
  • मेरुदंड को लचीला बनाता है
  • कंधों और गर्दन की मांसपेशियों के लिए लाभदायक

अन्य जानकारी के लिए:

www.dhakaram.com

योगाचार्य ढाका राम

संस्थापक

योगापीस संस्थान

Universal Prayer – Shiva Shiva

om…..
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ये…
शिव…
आ.ओ..
शिव ..
ये..
शिव शिव
शिव शंभू….ooo
जय जय शंभू..ooo
हर हर महादेव..
शिव शिव
शिव शिव शंभू..oo
शिव शिव
शिव शिव शंभू..oo
शिव शिव
जय जय शिव
शिव शिव
जय जय शिव
शिव शिव
जय जय शिव
शिव शिव ज
जय जय शिव
शिव शिव
जय जय शिव
शिव शिव
जय जय शिव


and we pray shiva
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नारायण नारायण नारायण
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शिव शिव
जय जय शिव
शिव शिव
जय जय शिव
and we pray shiva
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नारायण नारायण नारायण
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जीसस जीसस जय जय जीसस
जीसस जीसस जय जय जीसस
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नारायण नारायण नारायण
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जीसस जीसस जय जय जीसस
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नारायण नारायण नारायण
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अल्लाह हू अल्लाह जय जय जय अल्लाह,अल्लाह हू अल्लाह जय जय जय अल्लाह
and we pray अल्लाह
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नारायण नारायण नारायण
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नारायण नारायण नारायण
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बुद्धा नारायण, महावीर नारायण, साई नारायण, नानक नारायण, देवी नारायण
नारायण नारायण नारायण
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नारायण नारायण नारायण
हर हर महादेव
नारायण नारायण नारायण
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एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर: ध्यान कैसे करें?

प्यारे मित्रों आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

आज हम एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में ध्यान के बारे में बात करेंगे।

कई लोग सोचते हैं कि ध्यान करना बहुत मुश्किल है। मैं कहता हूं कि यह मुश्किल नहीं, बस थोड़ा अभ्यास की बात है।

ध्यान का मतलब है वर्तमान में रहना। भूतकाल या भविष्य के बारे में नहीं सोचना। यह आसान लगता है, लेकिन हमारा मन हमेशा इधर-उधर भटकता रहता है।

आज मैं आपको एक ऐसी तकनीक बताऊंगा जिससे ध्यान करना आसान हो जाएगा।

1. विचारों को आने जाने दें:

जब आप ध्यान करते हैं, तो आपके मन में तरह-तरह के विचार आते रहेंगे। अच्छे विचार भी, बुरे विचार भी।

इन विचारों पर ध्यान न दें। उन्हें आने दें और जाने दें। उन्हें केवल एक दृष्टा भाव से देखें।

2. एकाग्रता:

अपनी एकाग्रता को अपनी सांसों पर केंद्रित करें। अपनी सांसों को अंदर और बाहर आते हुए महसूस करें।

3. शांत रहें:

ध्यान करते समय शांत रहना बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपका मन भटकता है, तो उसे धीरे से वापस अपनी सांसों पर लाएं।

4. अभ्यास:

ध्यान एक अभ्यास है। शुरुआत में आपको मुश्किल हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे आपका मन शांत होने लगेगा।

कैसे बैठें:

  • किसी भी आसान में बैठें, जैसे पद्मासन, सुखासन, सिद्धासन या वज्रासन।
  • कमर और गर्दन सीधी रखें।
  • छाती फूली हुई हो।
  • पेट की मांसपेशियां शिथिल हों।
  • आंखें बंद करें।

कहां ध्यान करें:

  • आप कहीं भी ध्यान कर सकते हैं, जैसे घर, ऑफिस, यात्रा में।
  • शांत जगह चुनें।

कितने समय तक ध्यान करें:

  • शुरुआत में 5-10 मिनट तक ध्यान करें।
  • धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

ध्यान के लाभ:

  • तनाव कम करता है।
  • एकाग्रता बढ़ाता है।
  • मन को शांत करता है।
  • स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।

इसी के साथ आप सभी का बहुत-बहुत आभार आप सभी खुश रहें, मस्त रहें और आनंदित रहे। आप सभी को नमन।

अधिक जानकारी के लिए:

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

सूर्य नमस्कार: स्वास्थ्य और आनंद का द्वार

आप सभी मित्रों को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार। एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

आज हम सूर्य नमस्कार के बारे में बात करेंगे। सूर्य नमस्कार के बारे में लगभग हर कोई जानते हैं जब हम सूर्य नमस्कार की बात करते हैं तो हमारे मन में क्या भाव आते हैं जैसे कोई नदी के किनारे या कोई सूर्य भगवान को जल चढ़ा रहे हो आपने देखा भी होगा जब पूजा प्रार्थना होती है तो सूर्य भगवान को जल या अर्ह मतलब दही भी चढ़ाया जाता है है। सूर्य नमस्कार के बारे में सोचते हैं हमारे मन में सूर्य की लालिमा प्रकाश उनकी किरणें आती है। सूर्य नमस्कार पुराने समय से चला आ रहा है आप देखेंगे कि भगवान श्री राम के समय से भी सूर्य नमस्कार का प्रचलन है। रामायण में भी सूर्य नमस्कार के बारे में चर्चा की गई है। हम सूर्य नमस्कार से अपने शरीर और आत्मा का विकास कर सकते हैं। तो चलिए सूर्य नमस्कार साधना के लिए ।

  • नमस्कार आसन – सूर्य नमस्कार के लिए सबसे पहले हमें अपने एडी पंजों को मिलना है। हाथों को नमस्कार मुद्रा में लेकर आएंगे। हमारे अंगूठे हमारी छाती को छूने चाहिए मतलब हृदय कमल के पास और चेहरे पर मुस्कुराहट । अब हम आंखें बंद करके कल्पनाओं में किसी समुद्र के किनारे या पहाड़ की चोटी पर चलते हैं। वहां से हम महसूस करेगें कि हमारे सामने सूर्य प्रकाश की किरण है उनकी लालिमा हमारे शरीर पर पड़ रही है। हाथों को फैला कर हम उनसे प्रार्थना करेंगे हे सूर्य भगवान आपके अंदर जो तेज किरनें हैं जो तेज प्रकाश है उसमें से कुछ अंश हमें देकर हमें भी आपकी तरह तेजस्वी व प्रकाश वान बनाए। अब धीरे-धीरे अपने हाथों को नमस्कार मुद्रा में लाएंगे। दोनों हाथों की हथेलियां को आपस में मिलाकर नमस्कार मुद्रा में हृदय कमल की पास रखेंगे।
  • ऊर्ध्व नमस्कारासन – अब हाथों को धीरे-धीरे नासिक से स्पर्श करते हुए सिर के ऊपर की तरफ ले जाएंगे। हाथों को पूरा ऊपर की तरफ तान दे हमारे हाथ हमारे कानों को स्पर्श करते रहें। इस आसन को हम ऊर्ध्व नमस्कार आसन कहते हैं। अंगूठे को आपस में लॉक नहीं करना है।
  • उत्तानासन / पाद हस्तासन – उर्ध्व नमस्काआसन से हम उत्तानासन के लिए धीरे-धीरे हिप्स जॉइंट से आगे की ओर झुकेंगे। जब हम आगे झुके हमारे हाथ आगे की ओर खींचे हुए रहने चाहिए। अपने हाथों को हम पैरों के पास रखेंगे। हमारी कमर बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए। सांस को बाहर निकालते जाना है और ज्यादा से ज्यादा झुकाने की कोशिश करनी है। हमारी कमर बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए।
  • अश्व संचालन आसान – उत्तान आसान से हम अश्व संचालन में जाने के लिए पहले अपनी दाहिने पैर को पीछे की तरफ लेकर जाना है। हमारा पंजा और घुटना नीचे जमीन पर लगा हुआ रहेगा। हमारे कूल्हों को नीचे की तरफ दबाने की कोशिश करेंगे। इस आसन को हम अश्व संचालन आसन कहते हैं। इसमें हमारी दृष्टि ऊपर की तरफ रहेगी।
  • पर्वतासन – अश्व संचालन से पर्वत आसन में जाने के लिए हमारा हम अपनी बाएं पैर को पीछे दाहिने पैर के पास ले जाएंगे। हमारी एड़ियां नीचे जमीन पर लगी रहेगी। कमर से ऊपर वाले भाग का भार हाथों की तरफ और एड़ियां जमीन पर लगाने का प्रयास करेंगे। इस आसन में हम श्वास को बाहर निकलेंगे ज्यादा ध्यान देंगे।
  • भुजंगासन – पांचवा आसान है भुजंगासन। पर्वत आसान से बिना कुहनियो को मुड़े हम धीरे-धीरे कमर को नीचे की तरफ लाएँगे। हमारी छाती उठी हुई रहेगी। नितंबों को नीचे झुकाते हुए अपनी छाती को ज्यादा से ज्यादा फुलाएंगे। चेहरे पर किसी प्रकार का तनाव नहीं रखेंगे मुस्कुराते हुए करेंगे। इसमें हम स्वांस को अंदर लेने में ज्यादा फोकस करेंगे एडी पंजे मिले रहेंगे।
  • अष्टांग नमस्कार – भुजंगासन से अष्टांग नमस्कार में जाने के लिए सबसे पहले अपने पंजों को जमीन पर लगा दें उसके बाद दोनों घुटनों को फिर धीरे से अपनी छाती को जमीन पर लगाना है अंत में थुड़ी को गले पर लगाकर मस्तक को जमीन पर लगाएंगे लेकिन नाभि और नाक जमीन को स्पर्श न करें। हमारे शरीर के आठ अंग इसमें जमीन पर लगने चाहिए दो हमारे पैरों के पंजे, दो हमारे घुटने, दो हमारे हाथ, छाती और हमारा माथा। यह सूर्य नमस्कार का अंतिम चरण है इसके बाद हम आसनों का पुनरा वर्तन करेंगे जैसे हम गए थे उसी प्रकार वापस आएंगे
  • भुजंगासन – अष्टांग नमस्कार से धीरे-धीरे भुजंगासन आसन में आएंगे जैसे हम आसन में गए थे उसी प्रकार पहले का ललाट नाक थुड़ी गला और छाती को उठाते हुए भुजंगासन में आएंगे और हमारे छाती को फुलाएंगे। नितंबों को संकुचित करेंगे। कंधों को रोल करेंगे और गर्दन को रिलैक्स रखेंगे।
  • पर्वतासन – भुजंगासन से वापस पर्वतासन में आएंगे। पर्वतासन के लिए हम अपने नितंबों को ऊपर छत की तरफ तानेंगे। कमर से ऊपर वाले भाग का भार हाथों की तरफ और एड़ी को जमीन से लगाने का प्रयास करेंगे। छाती से ऊपर के हिस्से को हम नीचे खींचने का प्रयास करेंगे और कमर के निचले हिस्से को हम ऊपर की तरफ खींचने का प्रयास करेंगे।
  • अश्व संचालन – पर्वतासन के बाद हम अश्वसंचालन आसन में जाने के लिए बाय पैर को हाथों के बीच में लाकर रखेंगे। नितंब को नीचे की तरफ दबाने का प्रयास करें। छाती को फुलाने का प्रयास करेंगे और हमारी दृष्टि ऊपर की तरफ रहेगी।
  • उत्तानासन / पाद हस्तासन – अश्व संचालन से हम उत्तानासन लिए अपने दाहिने पैर को उठाकर हाथों के बीच में बाएं पैर के पास लाकर रख देंगे। अपनी क्षमता के अनुसार हम स्वांस को बाहर निकलते हुए आगे झुकने का प्रयास करेंगे।
  • ऊर्ध्व नमस्कार आसन – उत्तानासन से हम ऊर्ध्वनमस्कार आसन के लिए दोनों हाथों को नमस्कार मुद्रा में लाते हुए हाथों को खींचते हुए ऊपर की तरफ धीरे-धीरे श्वास भरते हुए उठाएंगे। ध्यान रखें हमारे हाथ हमारे कानों से लगे हुए होने चाहिए। हमारे चेहरे पर मुस्कुराहट के भाव होने चाहिए। जितना हम हाथों को ऊपर तान सकते हैं हमें तानना है।
  • नमस्कार आसन -उत्तानासन से हम धीरे-धीरे नमस्कार आसन के लिए हाथों को नीचे लाना है। हमारे हाथ छाती के सामने आ जाएंगे नमस्कार मुद्रा में।

इसी प्रकार जब हम दो बार दोहराते हैं तो हमारा एक सूर्य नमस्कार पूरा होता है। मतलब पहले दाहिने पैर पीछे जाएगा अश्व संचालन के लिए और दूसरी बार में बाया पैर पीछे जाएगा इस प्रकार से सूर्य नमस्कार का एक चक्र पूरा होगा नमस्कार का राउंड पूरा होने के बाद सूर्य की किरणों और लालिमा को अपने तन और मन में महसूस करते हुए हम शवासन में लेट जाएंगे।

शवासन में हमारे पैरों के बीच में एक से डेढ़ फीट का फैसला होना चाहिए। हमारे एड़िया अंदर की तरफ पंजे बाहर की तरफ होने चाहिए। हाथ हमारे बगल में हथेलियां ऊपर की तरफ आधी खुली हुई होनी चाहिए। हमारा पूरा शरीर विश्राम की अवस्था में होना चाहिए। डेढ़ से 2 मिनट तक इसी अवस्था में रहने पर अपने शरीर में विश्राम महसूस होता है। अब धीरे से बगल से करवट लेते हुए बैठ जाए।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • जब जब हम हाथों को नमस्कार मुद्रा से ऊर्ध्व नमस्कार की तरफ ले जाते हैं तो हाथों की उंगलियों को मोड़ना नहीं है और उंगलियां हमारी नासिक को स्पर्श करते हुए ऊपर की तरफ जाएं।
  • जब हम उत्तानासन में जाएं तो हमें नितंबों से मुड़ते हुए नीचे जाना चाहिए। हमारी कमर इसमें सीधी रहनी चाहिए। जब हम पर्वत आसन करते हैं तो हमारा घुटना कभी भी हमारे पंजे से आगे नहीं जाना चाहिए। जब हम पर्वत आसान करते हैं तो हमारा घुटना नहीं मुड़ना चाहिए। भुजंगासन में हमारा पंजा सीधा रहना चाहिए और छाती फूली हुई रहनी चाहिए। अष्टांग नमस्कार में हमारे नाभि और नाक जमीन को स्पर्श न करें।
  • जिनको चक्कर आते हैं, जिनका हाई ब्लड प्रेशर है, जिनकी कमर में दर्द है, जिनके घुटनों में दर्द है और गर्दन में दर्द है उनको सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार को ज्यादा करना आवश्यक नहीं है लेकिन सही ढंग से करना आवश्यक है। अगर हम सूर्य नमस्कार को सही ढंग से करते हैं तो हमें 10 से 12 मिनट लगते हैं। प्रत्येक आसन में कम से कम 15 से 20 सेकंड रुकना चाहिए तभी जाकर उसका बेहतर फायदा हमें मिलता है।
  • सूर्य नमस्कार के क्रम में एक, तीन, पाँच, सात, नौ, ग्यारह में श्वास लेने का प्रयास करना चाहिए और दो, चार, छः, आठ, दस, बारह में श्वास निकालने में ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

सूर्य नमस्कार के लाभ:

  1. सूर्य नमस्कार से सिर के चोटी से लेकर पैरों के पंजे तक सारे शरीर का व्यायाम हो जाता है जैसे हृदय, यकृत, आँत, पेट, छाती, गला, पैर इत्यादि
  2. शरीर के सभी अंगो के लिए बहुत ही लाभदायक हैं।
  3. सूर्य नमस्कार सिर से लेकर पैर तक शरीर के सभी अंगो को बहुत लाभान्वित करता है
  4. सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर, मन और आत्मा का विकास होता हैं।
  5. पृथ्वी पर सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं है इसीलिए यहां हमारे जीवन का बहुत ही विशेष अंग है इसलिए हम इन्हें भगवान कहते हैं।
  6. सूर्य नमस्कार के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कई लाभ है
  7. हमारे शरीर की मांसपेशियां मजबूत और लचीली होती हैं

अगर सही तरीके से करें तो सूर्य नमस्कार हमारे शरीर की रोम रोम को आनंद से भर देता है।

सावधानियां:

  • माहवारी (मेंस्ट्रुअल साइकिल) के दौरान नहीं करना चाहिए
  • घुटनों में और कमर में ज्यादा दर्द हो तो भी नहीं करना चाहिए
  • हृदय से संबंधित समस्या वाली लोगों को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए
  • गर्भावस्था के दौरान इसे नहीं करना चाहिए
  • जल्दी-जल्दी हड़बड़ी में नहीं करना चाहिए

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमस्कार।

अधिक जानकारी के लिए : www.dhakaram.com

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगा पीस संस्थान

ग्रीवा शक्ति विकासक: गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने का सरल तरीका

नमस्कार प्यारे मित्रों! आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमन आज हम “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में ग्रीवा शक्ति विकासक के बारे में बात करेंगे।

ग्रीवा शक्ति विकासक क्या है?

यह एक सरल योग क्रिया है जो गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और गर्दन दर्द को दूर करने में मदद करती है। इसे आप कहीं भी जैसे कुर्सी, सोफे या बिस्तर पर बैठकर कर सकते हैं।

ग्रीवा शक्ति विकासक के लाभ:

  • गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
  • गर्दन दर्द और सर्वाइकल को दूर करता है
  • रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है
  • एकाग्रता और स्मरण शक्ति को बढ़ाता है
  • तनाव और चिंता को कम करता है

ग्रीवा शक्ति विकासक कैसे करें:

  1. सीधे बैठें। यदि आपको सीधे बैठने में परेशानी हो रही है, तो अपने कूल्हों के नीचे तकिया, मसंद या लकड़ी का पाटा रखें मतलब ऊंचाई दें।
  2. अपनी गर्दन को धीरे-धीरे दाएं ओर घुमाएं। अपनी क्षमता के अनुसार गर्दन को घुमाएं, जैसे कि नाक को कंधे के समानांतर लाने का प्रयास करें। 30 सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें।
  3. अब धीरे-धीरे अपनी गर्दन को बाईं ओर घुमाएं। अपनी क्षमता के अनुसार गर्दन को घुमाएं और 30 सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें इस प्रकार दाहिनी तरफ दो बार और बाएं तरफ दो बार करें।
  4. धीरे-धीरे अपनी गर्दन को वापस बीच में लाएं और आंखें बंद करके मांसपेशियों को आराम करने दे ।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • गर्दन को घुमाते समय कंधों को न घुमाएं।
  • गर्दन को सीधा रखें, ऊपर या नीचे की ओर न झुकाएं।
  • प्रत्येक तरफ 30 सेकंड के लिए गर्दन को घुमाएं।
  • कम से कम 3 मिनट के लिए ग्रीवा शक्ति विकासक करें।

क्रिया के बाद परिवर्तन को महसूस करें:

  • आंखें बंद करके क्रिया के पहले और बाद में गर्दन में आए बदलाव को महसूस करें।
  • क्रिया करते समय ध्यान पूरी तरह से गर्दन पर होना चाहिए।

ग्रीवा शक्ति विकासक एक सरल और प्रभावी क्रिया है जो गर्दन को स्वस्थ रखने में मदद करती है। इसे नियमित रूप से करें और गर्दन दर्द से मुक्ति पाएं।

  • आप इस क्रिया को सुबह या शाम अथवा किसी भी समय कर सकते हैं।

आशा है यह जानकारी आपके लिए और आपकी शुभचिंतकों के लिए बहुत उपयोगी होगी।

धन्यवाद!

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

आंखों से संबंधित समस्याओं को कैसे दूर रखें: नेत्र शक्ति विकासक क्रिया

नमस्कार मित्रों आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमन! आज हम “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” कार्यक्रम में नेत्र शक्ति विकासक क्रिया के बारे में बात करेंगे।

आंखों की समस्याएं: एक बढ़ती चिंता

आजकल हम सभी मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टीवी का अत्यधिक उपयोग करते हैं। जिसके कारण आंखों में सूखापन, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। इन समस्याओं से बचने और आंखों को स्वस्थ रखने के लिए हमें नेत्र शक्ति विकासक क्रिया का अभ्यास करना चाहिए।

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया क्या है?

यह एक सरल योग क्रिया है जो आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करती है और आंखों से संबंधित समस्याओं को दूर रखती है।

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया कैसे करें:

  1. जमीन पर, कुर्सी पर, सोफे पर या बेड पर सीधे बैठ जाएं।
  2. अपने दोनों हाथों को बगल में फैलाकर कंधे के बराबर मुष्टि बना लें। आपका अंगूठा ऊपर की तरफ होना चाहिए।
  3. तिरछी नजर से 10 से 15 सेकंड के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे को देखें। अपनी गर्दन सीधी रखें।
  4. 10 से 15 सेकंड रुकने के बाद आंखों को बाईं ओर, बाएं हाथ के अंगूठे को देखें।
  5. धीरे-धीरे अपनी आंखों को दाईं ओर और बाईं ओर देखना शुरू करें।
  6. इस क्रिया को दोहराएं। नेत्र शक्ति विकासक क्रिया करते समय 15 सेकंड दाईं ओर और 15 सेकंड बाईं ओर देखना है। इस प्रकार आपको इसे 6 बार करना होगा (तीन बार दाहिनी ओर और तीन बार बाईं ओर)।
  7. नेत्र शक्ति विकासक क्रिया करने के बाद आंखें बंद करके आंखों की मांसपेशियों को आराम दें और उनमें आए बदलाव को महसूस करें।

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:

  • अपनी गर्दन को सीधा रखें और तिरछी नजर से अंगूठे की तरफ देखें।
  • अपने हाथों को पूरी तरह से तना हुआ रखें।
  • अपने चेहरे पर मुस्कुराहट रखें और तनाव मुक्त रहें।
  • अपने कंधों को सामान्य रूप से रखें, उठे हुए नहीं।

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया के लाभ:

  • आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
  • आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है
  • आंखों में सूखापन और कमजोरी को कम करता है
  • आंखों की थकान को दूर करता है
  • आंखों से संबंधित समस्याओं को दूर रखता है

अतिरिक्त सुझाव:

  • नहाते समय अपनी आंखों को पानी से धोएं।
  • अपनी आंखों को साफ रखने के लिए ठंडे पानी से धोएं।
  • आंखों को स्वस्थ रखने के लिए आंवला और पपीता का सेवन करें।
  • आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए त्रिफला के पानी से आंखों को धो सकते हैं।

निष्कर्ष:

नेत्र शक्ति विकासक क्रिया एक सरल और प्रभावी क्रिया है जो आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करती है। इसे नियमित रूप से करें और आंखों से संबंधित समस्याओं से मुक्ति पाएं।

धन्यवाद!

योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

टखना और घुटने के दर्द के लिए गुल्फ चक्र क्रिया

नमस्कार दोस्तों! एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे गुल्फ चक्र के बारे में।गुल्फ का मतलब होता है टखना और चक्र का मतलब होता है गोलाकार घूमना। यह एक योग क्रिया है जो टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करती है। यह टखना और घुटने के दर्द को दूर करने के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

कैसे करें :

सबसे पहले नीचे बैठ जाएं और पैरों को दंडासन की स्थिति में सामने फैलाएं। पैरों के बीच एक से डेढ़ फुट का फासला रखें। अपने हाथों को अपनी कमर के पीछे जमीन पर लगाएं और छाती को फूला हुआ रखें।

अब अपने पैरों के टखनों को गोलाकार घुमाएं। इसके लिए अपने बाएं पैर के पंजे से दाएं पैर की एड़ी को और दाएं पैर के पंजे से बाएं पैर की एड़ी को छूने का प्रयास करें। इस प्रकार कम से कम तीन बार करे और एक चक्र में कम से कम 15 से 20 सेकंड लगना चाहिए जितनी बार दाएं ओर टखनों को हमने घड़ी की दिशा में घुमाया है उतनी बार हम घड़ी की विपरीत दिशा में पैरों को गोलाकार घुमाएंगे। पैरों को घुमाते हुए एड़ी टखनों पिंडलियों और घुटनों के साथ जांघो में होने वाले खिंचाव का अवलोकन करें और अपने पैरों को विश्राम की अवस्था में ले आएं। जब आप विश्राम करें गुल्फ चक्र करने से पहले और करने के बाद की परिवर्तन को महसूस करें।

गुल्फ चक्र के लाभ:

  • टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों को मजबूत और लचीला बनाता है।
  • टखना और घुटने के दर्द को दूर करता है।
  • रक्त संचार में सुधार करता है।

गुल्फ चक्र के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:

  • गुल्फ चक्र को धीरे-धीरे करें। जल्दी-जल्दी करने से इसका प्रभाव कम हो जाएगा।
  • दोनों पैरों के बीच एक से डेढ़ फुट का फासला अवश्य रखें। इससे पैरों पर पूरा खिंचाव आएगा।
  • आंखें बंद करके चेहरे पर मुस्कुराहट रखते हुए सहज भाव से क्रिया करें।
  • क्रिया करने के बाद शरीर को ढीला छोड़ दें।

प्रतिदिन कितनी बार करें गुल्फ चक्र:

जिन लोगों को टखनों, पिंडलियों, घुटनों या जांघों में दर्द है उन्हें दिन में तीन बार गुल्फ चक्र करना चाहिए। इसे सुबह, दोपहर और शाम में कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

गुल्फ चक्र एक सरल लेकिन प्रभावी योग क्रिया है जो टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। नियमित रूप से गुल्फ चक्र करने से आप इन क्षेत्रों में होने वाली समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। और खास बात इसकी यह है आप अपने बिस्तर के ऊपर भी कर सकते हैं लेकिन बिस्तर स्पंजी नहीं होना चाहिए ना बहुत नरम और ना बहुत कठोर होना चाहिए

इसी के साथ आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद और आप सभी को हमारा मुस्कुराता हुआ नमन। अन्य जानकारी के लिए क्लिक करें www.DhakaRam.com

योगाचार्य ढाकाराम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

कमर दर्द से राहत के लिए कटि चक्रासन

नमस्कार दोस्तों! एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में आपका स्वागत है। आज हम कटि चक्रासन के बारे में बात करेंगे। कटि का मतलब होता है कमर और चक्रासन का मतलब होता है गोलाकार घूमना। यह एक योग क्रिया है जो कमर को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करती है। यह कमर दर्द को दूर करने के लिए भी बहुत फायदेमंद है। कटी का मतलब कमर चक्र का मतलब गोलाकार अपनी कमर को चक्र की भांति गोलाकार घूमना इसीलिए इसका नाम कटि चक्रासन है।

कैसे करें कटि चक्रासन:

  • कटि चक्रासन के लिए हम दोनों पैरों के बीच एक से डेढ़ फुट का फैसला रखेंगे।
  • पैरों के पंजे थोड़ा सा अंदर की तरफ रखेंगे और एड़ियों को थोड़ा सा बाहर की तरफ रखेंगे।
  • अपने हाथों को जांघों पर रखेंगे धीरे-धीरे हाथों को ऊपर उठा कर कंधों के बराबर ले जाएंगे।
  • दोनों हाथों को अच्छी तरह तानेंगे दाएं हाथ को दाई तरफ खींचेंगे और बाएं हाथ को बाई तरफ खींचेंगे और श्वास छोड़ते हुए हम दाहिनी तरफ कमर को मरोड़ देंगे।
  • दाहिने हाथ को धीरे से कमर के पीछे से लाकर बाई तरफ की पसलियों पर रख देंगे और उंगलियों से नाभि को छूने का प्रयास करेंगेऔर बाएं हाथ को हम दाहिने कंधे पर बहुत ही हल्के हाथों से रखेंगे। हमारी कमर को ज्यादा से ज्यादा मरोड़ने की कोशिश करेंगे। कम से कम हम एक मिनट दाहिनी तरफ इसी अवस्था में रहेंगे।
  • धीरे-धीरे हम जैसे गए थे वैसे हम वापस आएंगे और हाथों को जांघों के ऊपर रख देंगे और आधा मिनट हम अपने आसन को करने के बाद क्या परिवर्तन हुआ है उसे महसूस करेंगे।
  • एक तरफ करने के बाद विश्राम करना जरूरी है ताकि एक तरफ करने का जो खिंचाव है वह हमारे दूसरी तरफ आसान करने पर ना पड़े।
  • अब हम इसे दूसरी तरफ दोहराएंगे।दोनों हाथों को हम धीरे-धीरे अपने बगल से उठाएंगे। दोनों हाथों को बगल में तान देंगे।
  • दाहिने हाथ को हम दाई तरफ खींचेंगे और बाएं हाथ को हम बाई तरफ खींचेंगे। धीरे-धीरे अब हम श्वास छोड़ते हुए कमर को घुमाएंगे।
  • अब धीरे-धीरे बाएं हाथ को हम कमर के पीछे से दाहिनी तरफ की पसलियां पर रखेंगे और उंगलियों से नाभि छूने का प्रयास करेंगे और दाएं हाथ को हम बाएं कंधे पर हल्के से रखेंगे और इसी अवस्था में हम 1 मिनट तक रुकेंगे।
  • 1 मिनट पूरा होने के बाद हम जैसे आसन में गए थे वैसे ही धीरे-धीरे हम आसान से बाहर आएंगे। हम आधा मिनट विश्राम करेंगे और जब हम विश्राम करेंगे तो हम हमारे शरीर में हुए परिवर्तन का अवलोकन करेंगे।

कटि चक्रासन के लाभ:

  • कमर को मजबूत और लचीला बनाता है।
  • कमर दर्द को दूर करता है।
  • मेरुदंड को स्वस्थ रखता है।
  • गुर्दे, यकृत और अग्नाशय को स्वस्थ रखता है।
  • पाचन क्रिया को बेहतर करता है।

कटि चक्रासन के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:

  • पैरों में एक से डेढ़ फीट का फासला होना चाहिए सरल भाषा में कहीं तो कंधे जितना फासला।
  • पंजे थोड़े से अंदर की तरफ और एड़ियां थोडी सी बाहर की तरफ होनी चाहिए।
  • जैसे हम आसन में गए थे वैसे ही हमें आसान से वापस आना चाहिए।
  • कटि चक्रासन में हमें अपने कंधों को थोड़ा ऊपर की ओर उठा कर समान रखना चाहिए न की ऊपर नीचे।
  • कटि चक्रासन में शरीर को घुमाते समय हमें कोशिश करनी है कि हमारे कमर से नीचे का हिस्सा नहीं घूमें।
  • अपने हाथों से नाभि को छूने की कोशिश करनी चाहिए मतलब जब दाहिनी तरफ मरोड़े तब दाहिने हाथ बाई ओर से और जब बाई तरफ से मरोड़े तब बाई ओर से दाहिने पीछे से नाभि छूने का प्रयास करेंगे।

कटि चक्रासन के बाद क्या करें:

  • आसन को करने के बाद उसका आंखें बंद करके अवलोकन अवश्य करें।
  • कम से कम आधा मिनट तक आराम करें।

निष्कर्ष:

कटि चक्रासन एक सरल लेकिन प्रभावी योग क्रिया है जो कमर के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। नियमित रूप से कटि चक्रासन करने से आप कमर दर्द से छुटकारा पा सकते हैं और अपनी कमर को मजबूत और लचीला बना सकते हैं।

तो प्यारे मित्रों अपना अभ्यास जारी रखें। आप सभी का मुस्कुराता हुआ धन्यवाद आप का दिन मंगलमय हो। और ऐसे ही एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर कार्यक्रम में हमारा साथ देते रहिए और हमारे साथ अपने शरीर को मजबूत और निरोगी बनाकर अपने नियर और डियर को शेयर कर उन्हें भी स्वास्थ्य का लाभ प्राप्त कर कर विश्व कल्याण में अपना योगदान प्रदान करें।

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योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान