जांघों और नितंबों की चर्बी कम करें
एक पाद वृत्ताकार क्रिया
आप सभी का हमारे विशेष कार्यक्रम “एक कदम स्वास्थ्य से आनंद की ओर” में हार्दिक स्वागत है। आशा है कि आप सभी मस्त और आनंदित होंगे। आज हम “एक पाद वृत्ताकार क्रिया” के बारे में जानेंगे। यह अभ्यास शरीर को लचीला बनाने और स्वास्थ्य लाभ देने में मदद करता है।


एक पाद वृत्ताकार क्रिया करने की विधि
- सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं।
- अपने कोहनियों के ऊपर शरीर का भार रखें और छाती को ऊपर उठाएं।
- पैर जमीन पर सीधे रखें और गर्दन विश्राम की अवस्था में रहे।
- दोनों कोहनियों को एक-दूसरे के पास रखें ताकि छाती अच्छी तरह खुल जाए।
- दाएं पैर को ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे दक्षिणावृत (घड़ी की दिशा में) बड़ा गोला बनाएं। इसे 4 से 6 बार दोहराएं।
- दाएं पैर को नीचे रखकर, बाएं पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं।
- अब दाएं पैर को ऊपर उठाएं और वामावृत्त (घड़ी की विपरीत दिशा में) बड़ा गोला बनाएं। इसे 4 से 6 बार दोहराएं।
- इसी प्रकार बाएं पैर से भी वामावृत्त क्रिया करें।
- सभी क्रियाएं पूरी करने के बाद विश्राम करें। फिर बगल की तरफ करवट लेकर धीरे-धीरे बैठ जाएं।
- एक गोला बनाने में कम से कम 15-20 सेकंड का समय लें।






विशेष ध्यान दें:
- जिन्हें कंधों या कमर में अधिक दर्द हो, वे यह क्रिया लेटकर भी कर सकते हैं।
- लेटकर करने पर हाथों को कमर के पास रखना चाहिए।
एक पाद वृत्ताकार क्रिया के लाभ
- जांघों और नितंबों की चर्बी कम करता है।
- पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है।
- मांसपेशियों को लचीला बनाता है।
- कंधों और गर्दन की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद है।
सावधानियां
- इस क्रिया को लेटकर न करें, बल्कि कोहनियों के बल करें।
- दक्षिणावृत और वामावृत्त घुमाव बराबर संख्या में करें।
- पैर गोलाकार घुमाते समय घुटनों को सीधा और खींचकर रखें।
- दोनों पैरों से समान संख्या में दक्षिणावृत और वामावृत्त घुमाव करना आवश्यक है।



आप सभी का बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद! स्वस्थ रहें, मस्त रहें और आनंदित रहें। अपने जीवन को खूबसूरत बनाने के लिए रोज़ कम से कम 1 से 1.5 घंटे योग का अभ्यास अवश्य करें।
योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान


































































































